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बिहार के इस रेलखंड पर अब बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार, 87 किमी में कवच सिस्टम की कमीशनिंग; क्या होगा फायदा?

Published: Mon, 12 Oct 2026 05:55 PM (IST)

पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल ने रेल परिचालन की गति बढ़ाने में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इसमें सासाराम-भभुआ रेलखंड ...और पढ़ें

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से युक्त कुम्हऊ स्टेशन। सौ- रेलवे

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से युक्त कुम्हऊ स्टेशन। सौ- रेलवे

HighLights

  1. सासाराम-भभुआ रेलखंड पर 87 KM कवच प्रणाली स्थापित।

  2. ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग से बढ़ी परिचालन क्षमता।

  3. इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से स्टेशनों पर सुरक्षा सुदृढ़ हुई।

जागरण संवाददाता, सासाराम (रोहतास)। पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल ने चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में रेल परिचालन की गति बढ़ाने में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

इस दौरान लगभग 47 किलोमीटर लंबे सासाराम-भभुअ रेलखंड को कवच प्रणाली से लैस करने के अलावा ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग तथा कुम्हऊ व मुठानी रेलवे स्टेशन को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से जोड़ने का कार्य किया गया।

ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग का विस्तार

चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में भभुआ रोड–सासाराम रेलखंड पर 47.50 रूट किलोमीटर में ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली की कमीशनिंग की गई।

डीडीयू–मानपुर ग्रैंड कॉर्ड रेलखंड पर कुल 214 रूट किलोमीटर में से अब तक 164.28 रूट किलोमीटर में यह प्रणाली स्थापित की जा चुकी है।

इसके माध्यम से दो ब्लॉक स्टेशनों के बीच ट्रेनों की आवाजाही को अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने में विभाग को सहूलियत हो गई है।

पारंपरिक एब्सोल्यूट ब्लॉक की तुलना में यह प्रणाली उपलब्ध रेलखंड पर एक ही दिशा में ट्रेनों के बीच निर्धारित सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए अधिक ट्रेनों के परिचालन की क्षमता बढ़ाती है।

साथ ही मुठानी और कुम्हऊ पर पैनल इंटरलॉकिंग के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली की कमीशनिंग की गई। मंडल में अब तक 41 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली स्थापित हो चुकी है।

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग कंप्यूटर आधारित आधुनिक तकनीक है, जो सिग्नलों और रेलमार्गों के बीच निर्धारित सुरक्षा शर्तों के अनुरूप समन्वय सुनिश्चित करती है।

कवच प्रणाली से जुड़ा 87 किलोमीटर

चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में गंजख्वाजा–भभुआ रोड तथा सासाराम–फेसर रेलखंडों में 87 किलोमीटर में कवच प्रणाली की कमीशनिंग की गई।

मंडल में कवच सिस्टम लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है, रेलवे ट्रैक पर इससे संबंधित टैग लगाए जा रहे हैं। कवच भारतीय रेल की स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली है।

यह ट्रैक पर स्थापित टैग्स और रेडियो संचार सहित निर्धारित तकनीकी व्यवस्थाओं के माध्यम से ट्रेन की स्थिति एवं सिग्नल संबंधी जानकारी के आधार पर कार्य करती है।

निर्धारित परिचालन परिस्थितियों में यह सिग्नल की अनदेखी कर आगे बढ़ने या निर्धारित गति सीमा से अधिक गति होने की स्थिति में लोको पायलट को सहायता देने तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित ब्रेकिंग के माध्यम से ट्रेन की गति नियंत्रित करने में सक्षम है।

इस प्रकार, यह ट्रेनों के बीच टक्कर के जोखिम को कम करने और ट्रेन संरक्षा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आधुनिक ट्रेन डिटेक्शन तकनीक का उपयोग

दो स्टेशनों पर ड्यूल मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर लगाए गए। इसके साथ मंडल में अब तक 25 स्टेशनों पर पुराने डीसी ट्रैक सर्किट के स्थान पर यह तकनीक स्थापित की जा चुकी है।

यह आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक तकनीक रेलखंड में ट्रेन की मौजूदगी का पता लगाने के लिए एक्सल काउंटर का उपयोग करती है और सिग्नलिंग व्यवस्था को ट्रेन की स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराती है।

बरसात के मौसम में जलभराव या अन्य कारणों से डीसी ट्रैक सर्किट में होने वाली खराबियों के चलते परिचालन में आने वाली देरी को कम करने तथा ट्रेन डिटेक्शन व्यवस्था की विश्वसनीयता बढ़ाने में यह तकनीक सहायक है। 

मंडल रेल प्रबंधक उदय सिंह मीना के नेतृत्व में मंडल में रेल परिचालन की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने पर निरंतर ध्यान दिया जा रहा है।