सासाराम : रोहतास । पूर्वजों के दिए संस्कार हमारे भविष्य के द्वार खोलते हैं। यह हमारे साथ तो सौ फीसद सच साबित हुआ है। मेरे पिताजी स्वर्गीय पंडित त्रिभुवन तिवारी का साथ हमें बहुत दिनों तक तो नहीं मिला जिसकी कमी हमें आजीवन खलती रहेगी। लेकिन उनके दिए संस्कारों ने मेरी जीवन यात्रा को आसान बना दिया। 30 वर्ष पूर्व जब उनकी मृत्यु हुई थी, उस समय मैं करीब 20 वर्ष का था। उस समय मेरा विद्यार्थी जीवन चल रहा था। उनके जाने के बाद उनकी यादों, विचारों, रहन-सहन व सिद्धांतों को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। आज जब जीवन के हर क्षेत्र में मुझे लोगों का प्यार मिलता है, तो क्षितिज में दूर कहीं पिताजी की शांत व संतुष्ट उपस्थिति का आभास होता है। वाकई जीवन में जो कुछ भी प्राप्त हुआ है, उनके आशीर्वाद के बिना संभव नहीं है। आकाशवाणी के दैनिक कार्यों से लेकर इतिहास के क्षेत्र में शोध अण्वेषण व सामाजिक कार्यों तक में लोगों के असीम प्यार व सहयोग मिलना पिताजी के दिए संस्कारों की ही देन है।

डा. श्यामसुंदर तिवारी, इतिहासकार

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