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बिहार के पैक्स अध्यक्ष ध्यान दें! उर्वरक लाइसेंस रिन्यू कराने में अब नहीं होगी तकनीकी डिग्री की बाध्यता

Published: Sat, 22 Aug 2026 01:57 PM (IST)

बिहार में पैक्स अध्यक्षों के लिए उर्वरक लाइसेंस नवीनीकरण के नियमों में बदलाव किया गया है। 30 जुलाई 2018 से ...और पढ़ें

पैक्‍सों को खाद ब‍िक्री में नहीं होगी परेशानी। सांकेत‍िक तस्‍वीर

पैक्‍सों को खाद ब‍िक्री में नहीं होगी परेशानी। सांकेत‍िक तस्‍वीर

HighLights

  1. तकनीकी डिग्री की अनिवार्यता से पैक्स अध्यक्षों को मिली छूट।

  2. 30 जुलाई 2018 से पहले के वैध लाइसेंस धारकों को लाभ।

  3. उर्वरक लाइसेंस नवीनीकरण प्रक्रिया अब होगी और आसान।

संवाद सहयोगी, डेहरी ऑन सोन (रोहतास)। पैक्स अध्यक्षों के लिए उर्वरक लाइसेंस के नवीनीकरण को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया गया है।

इसके तहत 30 जुलाई 2018 से पहले वैध उर्वरक लाइसेंस या प्रमाणपत्र रखने वाले पैक्स अध्यक्षों को लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए केमिस्ट्री ऑनर्स, एग्रीकल्चर ऑनर्स तथा तकनीकी प्रशिक्षण की अनिवार्यता से राहत दी गई है।

नवीनीकरण में नहीं होगी परेशानी

डेहरी प्रखंड के बीसीओ विकास सिंह ने बताया कि सरकार के इस निर्णय से उन पैक्स अध्यक्षों को काफी सुविधा मिलेगी, जिन्हें तकनीकी डिग्री अथवा प्रबंधकीय प्रशिक्षण के अभाव में उर्वरक लाइसेंस के नवीनीकरण में परेशानी हो रही थी।

उन्होंने बताया कि जिन पैक्स अध्यक्षों के पास पूर्व में जारी वैध उर्वरक लाइसेंस या प्रमाणपत्र मौजूद है, वे उसे खोजकर नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी करा सकते हैं।

बताया कि डेहरी प्रखंड में कई पैक्स के उर्वरक लाइसेंस पहले ही नवीनीकृत हैं और वे खाद का वितरण कर रहे हैं। बरांव कला पैक्स का प्रमाणपत्र वर्ष 2030 तक, गंगौली और जमुहार का 2028 तक तथा चकन्हा और दरियात पैक्स का प्रमाणपत्र 2030 तक वैध है। ऐसे पैक्स को फिलहाल इस संबंध में कोई परेशानी नहीं है।

नया वैध प्रमाणपत्र नहीं रखने वालों को होगी सुविधा

बीसीओ ने स्पष्ट किया कि यह सुविधा मुख्य रूप से उन पैक्स अध्यक्षों के लिए उपयोगी है, जिनके पास नया वैध प्रमाणपत्र नहीं है या जिन्होंने नया लाइसेंस बनवाने अथवा नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है।

उन्होंने पैक्स अध्यक्षों से सरकार के नए दिशा-निर्देश का लाभ उठाते हुए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने और प्रक्रिया पूरी करने की अपील की।

सरकार के इस निर्णय से उर्वरक लाइसेंस के नवीनीकरण में तकनीकी डिग्री को लेकर आ रही परेशानी कम होने तथा पैक्स के माध्यम से किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सुगम होने की उम्मीद है।