सिडनी से लौटीं बिहार की बेटी डॉ. रीना सिंह, 1000 करोड़ के प्रोजेक्ट से करेंगी डायबिटीज का जड़ से इलाज
रोहतास के डेहरी आनसोन में 1000 करोड़ रुपये की लागत से ग्लोबल स्टेम-सेल डायबिटीज क्योर लैब स्थापित होगी, जिसका नेतृत्व वैज्ञानिक डॉ. रीना सिंह करेंगी।

गोवा में उद्योग मंत्री को ग्लोबल स्टेम-सेल डायबिटीज क्योर प्रयोगशाला का प्रस्तावित एमओयू सौंपतीं डॉ. रीना सिंह।
HighLights
डेहरी आनसोन में ग्लोबल स्टेम-सेल डायबिटीज लैब स्थापित होगी।
वैज्ञानिक डॉ. रीना सिंह 1000 करोड़ के प्रोजेक्ट का नेतृत्व करेंगी।
लैब मधुमेह के स्थायी और किफायती इलाज पर शोध करेगी।
उपेंद्र मिश्र, डेहरी आनसोन (रोहतास)। मधुमेह जैसी लाइलाज मानी जाने वाली बीमारी के इलाज में अब रोहतास जिला एक वैश्विक क्रांति का गवाह बनने जा रहा है। जिले के डेहरी आनसोन में जल्द ही अत्याधुनिक ग्लोबल स्टेम-सेल डायबिटीज क्योर प्रयोगशाला की स्थापना की जाएगी।
इसपर एक हजार करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है। यह केंद्र मरीजों को केवल दवाओं या इंसुलिन के भरोसे रखने के बजाय, बीमारी के स्थाई और किफायती इलाज पर शोध करेगा।
गोवा के वास्को द गामा स्थित रवींद्र भवन में 'लेट्स इंस्पायर बिहार' द्वारा आयोजित बिहार डेवलपमेंट समिट 2026 में इस ऐतिहासिक पहल की नींव रखी गई। समिट में डेहरी की बेटी व प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. रीना सिंह ने बिहार की उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह को प्रोजेक्ट से जुड़े समझौते का प्रारूप समर्पित किया।
पैंक्रियाज को प्राकृतिक रूप से सक्रिय करने पर शोध:
सिडनी मेडिकल स्कूल ऑस्ट्रेलिया में कार्य कर चुकीं और वर्तमान में केंद्रीय बायोटेक्नोलॉजी विभाग बेंगलुरू में वैज्ञानिक डॉ. रीना सिंह ने बताया कि यह लैब रीजनरेटिव स्टेम-सेल बायोलॉजी तकनीक पर कार्य करेगी।
उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य अग्न्याशय के प्राकृतिक फंक्शन को पुनर्जीवित करना है, जिससे शरीर में इंसुलिन का बनना स्वतः शुरू हो सके। इस परियोजना पर एक हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
सरकार देगी भूमि और हर संभव सहयोग:
उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने परियोजना का स्वागत करते हुए डेहरी में भूमि आवंटन समेत राज्य सरकार की ओर से पूर्ण प्रशासनिक और तकनीकी सहयोग का आश्वासन दिया।
वहीं, आईजी विकास वैभव के आइए प्रेरित करें बिहार अभियान से जुड़ी इस पहल की सराहना करते हुए कहा गया कि प्रवासी प्रतिभाओं के अपने गृह राज्य लौटने से बिहार की विकास यात्रा को एक नई गति मिलेगी।
जानिए कौन हैं डेहरी की बेटी डॉ. रीना सिंह?
डॉ. रीना सिंह डेहरी के जवाहर लाल नेहरू कालेज के सेवानिवृत विभागाध्यक्ष प्रो. कामेश्वर सिंह की पुत्री हैं। उन्होंने नोवर मेडिकल स्कूल जर्मनी से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की हैं। सिडनी मेडिकल स्कूल, आस्ट्रेलिया में वे प्राध्यापक व वैज्ञानिक के तौर पर अपनी सेवा दी हैं।
वर्तमान में वे स्वदेश लौट भारत सरकार की संस्था बायोटेक्नोलॉजी विभाग बेंगलुरु में रीडर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने स्टेम सेल आधारित डायबिटीज थेरेपी व नवजात हृदय रोग पर विशेष शोध की हैं और उसमें विशेषज्ञता रखती हैं।
