Trump Tariff News: अमेरिकी टैरिफ से बिहार के मखाना व्यापार पर संकट, पूर्णिया के किसानों को झटका!
अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से बिहार के मखाना व्यापार पर गंभीर असर पड़ने वाला है। आयात शुल्क 3.5% से बढ़कर लगभग ...और पढ़ें

अमेरिकी टैरिफ से बिहार के मखाना व्यापार पर संकट, पूर्णिया के किसानों को झटका!

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
मनोज कुमार, पूर्णिया। सबसे अधिक मखाने का उत्पादन करने वाले सीमांचल व मिथिलांचल के कारोबारियों के लिए अमेरिकी टेरिफ परेशानी का सबब बनने वाला है। आने वाले समय में अमेरिकी टैरिफ का असर मखाना की कीमत पर पड़ने वाला है। इससे अमेरिका में इस उत्पाद की कीमत में भारी वृद्धि हो जाएगी।
टैरिफ बढ़ने से इनकी प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है। साथ ही अमेरिका में उनकी मांग में 40 से 60 फीसद कमी हो सकती है। इसका सीधा असर स्थानीय बाजार पर पड़ेगा और व्यापारियों को नया बाजार तलाशना पड़ेगा।
टैरिफ से अमेरिका में घटेगी मखाना की मांग
अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) से बिहार के मखाने पर बुरा असर पड़ने वाला है, जिससे अमेरिका में मखाने की कीमत और बढ़ जाएगी, जिससे निर्यात प्रभावित होगा। पहले अमेरिका द्वारा मखाने पर मात्र 3.5 फीसद टैरिफ लगाया गया था लेकिन बदले हालात में उसे बढ़ाकर लगभग 30 फीसद करने की तैयारी कर ली है।
टैरिफ में इतना उछाल आने के बाद अमेरिकी बाजार में मखाने की कीमत काफी बढ़ जाएगी जिससे अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए मखाना महंगा हो जाएगा तथा इसकी मांग घटने की आशंका बढ़ गई है। इससे पूर्णिया सहित मिथिलांचल और सीमांचल सहित बिहार और पूरे देश से अमेरिका को होने वाले मखाने के निर्यात पर असर पड़ा है।
इससे पूर्णिया सहित पूरे राज्य के हजारों मखाना किसान इस टैरिफ से प्रभावित होंगे। न सिर्फ मखाना बल्कि बिहार से निर्यात होने वाले जर्दालु व मालदा आम, लीची, हल्दी, मधुबनी पेंटिंग, हल्दी भागलपुरी सिल्क, हस्तशिल्प आदि उत्पादों का निर्यात अमेरिका में सर्वाधिक होता है। टेरिफ के कारण उक्त सभी उत्पादों की कीमत में भारी उछाल आएगा और उसकी मांग घटेगी।
सीमांचल-मिथिलांचल में होता है करीब 90 फीसद मखाना
पूर्णिया सहित सीमांचल और मिथिलांचल में देश का सबसे अधिक मखाना का उत्पादन होता है। इस क्षेत्र में करीब 90 फीसद मखाना का उत्पादन होता है। खासकर मखाना उत्पादन में पूर्णिया लगातार आगे बढ़ रहा है। भोला पासवान शास्त्री कृषि कॉलेज में सबसे अधिक उपज देने वाली सबौर मखाना-वन बीज की खोज किए जाने के बाद से पूरे क्षेत्र में मखाना का रकवा में वृद्धि हुई है। फिलहाल, सिर्फ पूर्णिया में मखाना का उत्पादन 10 हजार हेक्टेयर में हो रहा है।
साथ ही मखाना के व्यापार का केंद्र भी पूर्णिया ही है। पूर्णिया के हरदा बाजार अभी राज्य का सबसे बड़ा मखाना मंडी है। यहां 100 से अधिक मखाना फैक्ट्री काम कर रही है। पूरे देश में मखाना का रेट भी इसी हरदा मंडी से तय होता है। यहां से बड़े पैमाने पर मखाना का निर्यात अमेरिका यूरोप आदि देशों में होता है। लेकिन टैरिफ बढ़ने के बाद होने वाला निर्यात प्रभावित होगा।
क्या कहते हैं मखाना उद्यमी?
फार्म टू फैक्ट्री के डायरेक्टर मनीष कुमार कहते हैं कि मखाना पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ाए जाने से यहां का मखाना कारोबार बुरी तरह प्रभावित होगा। यहां से सबसे अधिक मखाना का निर्यात अमेरिका में ही होता है। बताया कि विदेशों में निर्यात का लगभग 30 फीसद मखाना सिर्फ अमेरिका को निर्यात होता है। टैरिफ बढ़ने से वहां मखाना की कीमत में भारी उछाल आ जाएगा जिससे वहां इसकी मांग में गिरावट आएगी जिससे मखाना कारोबार प्रभावित होगा।
मखाना कारोबारी अमरेंद्र कुमार ने बताया कि मखाने एक हेल्दी और प्लांट-बेस्ड सुपरफूड के रूप में जाना जाता है। लोकप्रियता के कारण मखाना प्रीमियम बाजार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। इसी वजह से विदेशों में इसकी मांग बढ़ी है। खासकर अमेरिका में यहां से सबसे अधिक मखाना जाता है, लेकिन जैसा कि बताया जा रहा है ट्रंप सरकार ने मखाना पर 50 फीसद तक टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में वहां मखाना का डिमांड घटेगा। ऐसे में निर्यातकों को अमेरिका के विकल्प के रूप में यूरोप, मध्य पूर्व और अन्य एशियाई देशों में नए बाजार तलाशने की जरूरत पड़ेगी। इसमें सरकार को सहयोग करना चाहिए।
