पूर्णिया। मझुवा गांव में 19 मई की रात जिस तरह असामाजिक तत्वों की भीड़ ने 13 महादलित परिवारों के घर को जला डाला। यह अमानवीय और असंवेदनशील है। इसे किसी सूरत में बर्दाश्त नही किया जाएगा। विवादों का हल संवैधानिक दायरे में ही खोजा जाना चाहिए, न कि सामाजिक सद्भावना के साथ खिलवाड़ होना चाहिए। पूरा घटनाक्रम दु:खद है और समस्या के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर ठोस पहल होनी चाहिए।

उक्त बातें हिदुस्तानी आवाम मोर्चा के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र यादव ने सोमवार को मझुआ के पीड़ितों से मिलने के बाद बयान जारी कर कहा है।राजेंद्र यादव ने कहा कि यह जांच का विषय है कि जब विवाद 2015 से ही जारी है तो अब तक इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासनिक पहल क्यों नही की गई। जब इससे पहले भी कई बार इस तरह की घटना घटित हो चुकी है है और पीड़ितों को लगातार उपद्रवियों द्वारा धमकी दी जा रही थी तो प्रशासन सोया क्यों रहा। अप्रैल माह से ही गांव में तनाव रहने के वाबजूद मामले को हल्के तौर पर लिया जाना आश्चर्यजनक है। कहा कि मामले को धार्मिक रंग देने की कोशिश नही होनी चाहिए और न ही राजनीति होनी चाहिए। यह सुकून की बात है कि जिला प्रशासन पीड़ित परिवारों को हर सम्भव सहायता उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी इस घटना से दुखी हैं और मुख्यमंत्री जी और डीजीपी से बात कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। कहा कि पार्टी मृतक रिटायर्ड चौकीदार के आश्रितों को 50 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग करती है।

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