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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 14, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पौराणिकता के वाबजूद उपेक्षित है सिकलीगढ़ का टीला

By JagranEdited By:
Published: Wed, 14 Jul 2021 11:49 PM (IST)

पूर्णिया। पूर्ण अरण्य कहलाने वाले पूर्णिया के बनमनखी अनुमंडल में हजारों एकड़ में फैला टीला आज भी अपनी पौराणिक होने ...और पढ़ें

पौराणिकता के वाबजूद उपेक्षित है सिकलीगढ़ का टीला
पौराणिकता के वाबजूद उपेक्षित है सिकलीगढ़ का टीला

पूर्णिया। पूर्ण अरण्य कहलाने वाले पूर्णिया के बनमनखी अनुमंडल में हजारों एकड़ में फैला टीला आज भी अपनी पौराणिक होने का परिचय देने में लगा है, लेकिन इस ओर न तो प्रशासनिक स्तर से और न ही पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के स्तर से ध्यान दिए जाने के कारण यह उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। ये बड़े- बड़े टीले किसी किले के पूर्व में इस स्थल पर होने का संकेत दे रहे हैं ।बड़े-बड़े ईंटों से बने इन टीलों को अनाधिकृत रूप से तोड़कर इसके पौराणिक स्वरूप को बिगाड़ने की भी कोशिशें की गई है ।पौराणिक इतिहास को पलटकर देखने से इस स्थल के संदर्भ में विस्तृत जानकारी प्राप्त हो सकती है ।यह स्थल अनुमंडल मुख्यालय से सटे सिकलीगढ़ धरहरा में है ।जहां पौराणिक कई ऐसे स्थल हैं जिनके संदर्भ में कई पुस्तकों में जानकारी दी गई है । इन टीलों में से एक टीले पर चुनार बाबा का पौराणिक एवं अलौकिक मजार आज भी अवस्थित है। जिनके संदर्भ में मान्यता है कि यहां चूना चढ़कर ध्यान करने से मन की मुराद पूरी होती है ।इसके सटे मानिक स्थान है जिसे भगवान नरसिंह अवतार स्थल कहा जा रहा है ।इस स्थल पर पौराणिक खंभ आज भी अपनी पौराणिकता की कथा को दुहराने में लगा है ।मान्यता है कि, इसी खंभ को फाड़ कर भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया था तथा असुर सम्राट हिरण्यकशिपु का वध कर पृथ्वी पर से पाप का नाश किया था ।इस पौराणिक स्थल के आसपास हृदेश्वरी दुर्गा स्थान एवं बाबा धीमेश्वर नाथ महादेव मंदिर के आपरूपी सुन्दर शिवलिग का होना भी इस स्थल के पौराणिक होने की पुष्टि करता है ।कहा जाता है कि, असुर सम्राट हिरण्यकशिपु के इष्ट देवता भी महादेव ही थे । हजारों एकड़ में फैले इस गढ़ की भूमि को देख ऐसा प्रतीत होता है कि भू माफियाओं द्वारा आर एस सर्वे के दौरान अपने नाम से खतियान इन्द्राज करा लिए गए हैं ।सिकलीगढ़ के समीप उस समय का एक पत्थर आज भी उस स्थल पर गड़ा है जिसपर धरहरा थाना का जिक्र है ।इस क्षेत्र के अगल-बगल के गांवों के नाम भी देवी देवताओं के नाम से अवस्थित होना इस स्थल के पौराणिक एवं ऐतिहासिक होने का प्रमाण प्रस्तुत करता है ।इस स्थल के समीप हृदयनगर, राधानगर, हनुमान नगर, रामनगर आदि गांव हैं जिनसे इस स्थल के मान्यता की कड़ी जुड़ी हुई है स्थानीय लोगों का मानना है कि इस हरित क्षेत्र में घुसते ही लोगों को नैसर्गिक उर्जा की प्राप्ति के साथ साथ मन को अपार शांति प्राप्त होती है ।परन्तु इतने महत्व का यह स्थल होने के वाबजूद अबतक यह स्थल उपेक्षित है ।पूर्व पुरातत्व विभाग की एक टीम यहाँ पहुंची थी तथा इस स्थल के पौराणिक ईंट वगैरह भी उठाकर ले गई परन्तु उसके बाद किसी प्रकार की कार्रवाई सरकार के स्तर से नहीं की जा सकी है जिस कारण पौराणिकता के वाबजूद यह स्थल पर्यटक स्थल के रूप में विकसित नहीं हो पाया है ।अगर इस स्थल को विकसित किया जाए तो यह पर्यटकों के लिये विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा तथा सरकार को बड़ राजस्व की प्राप्ति के साथ-साथ क्षेत्र में रोजगार के अवसर बंढेगें ।

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