सीमांचल को मिली बड़ी सौगात, 51.6 KM लंबी रेल लाइन से जुड़ेगा पूर्णिया-बंगाल; नोटिफिकेशन जारी
सांसद पप्पू यादव के लगातार प्रयासों के बाद किशनगंज-जलालगढ़ नई रेल लाइन परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में आगे ...और पढ़ें

पप्पू यादव के अथक प्रयास लाए रंग, किशनगंज-जलालगढ़ रेल परियोजना का टेंडर शुरू (AI Generated Image)
HighLights
सांसद पप्पू यादव के प्रयासों से किशनगंज-जलालगढ़ रेल परियोजना को मंजूरी।
राष्ट्रीय परियोजना के रूप में टेंडर प्रक्रिया अब होगी शुरू।
सीमांचल में रेल कनेक्टिविटी, आर्थिक विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
जागरण संवाददाता, पूर्णिया। सीमांचल में रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के लगातार पत्राचार, लोकसभा में उठाए गए सवालों और रेल मंत्रालय व रेलवे बोर्ड के स्तर पर किए गए सक्रिय हस्तक्षेप के बाद किशनगंज-जलालगढ़ नई रेल लाइन परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में आगे बढ़ाने तथा कार्य प्रारंभ करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति मिल गई है।
भारत के राजपत्र में 30 जुलाई, 2026 को प्रकाशित अधिसूचना (जिसकी मूल तिथि 28 जुलाई, 2026 है) के तहत 51.632 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना का लाभ पूर्णिया (बिहार) और पश्चिम बंगाल को मिलेगा। यह परियोजना लंबे समय से सीमांचल की प्रमुख मांग रही है।
वर्ष 2008-09 से प्रस्तावित किशनगंज-जलालगढ़ रेल लाइन के लिए लगभग 17 वर्षों से क्षेत्रवासी इसका इंतजार कर रहे थे। बजटीय प्रावधान होने के बावजूद परियोजना की गति अपेक्षित न होने पर सांसद पप्पू यादव ने लगातार इसे लोकसभा में उठाया तथा रेल मंत्री, रेलवे बोर्ड और संबंधित अधिकारियों के समक्ष पत्राचार के माध्यम से कार्य में तेजी लाने की मांग की।
भूमि अधिग्रहण, सर्वेक्षण, मुआवजा, टेंडर और रेलवे तथा राज्य सरकार के बीच समन्वय जैसी प्रक्रियाओं में देरी को लेकर भी सांसद ने संबंधित स्तर पर कार्रवाई की मांग की थी। राजपत्र अधिसूचना के बाद चिन्हित जमीनों के सर्वे और पैमाइश, प्रभावित भूस्वामियों से आपत्तियां प्राप्त करने तथा नियमानुसार मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है।
सांसद पप्पू यादव ने इस पहल के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे का आभार जताते हुए कहा कि सीमांचल लंबे समय से रेल कनेक्टिविटी, उद्योग और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में पिछड़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि जलालगढ़-किशनगंज रेल लाइन बनने से पूर्णिया और किशनगंज क्षेत्र के लोगों को सीधा रेल संपर्क मिलने की संभावना मजबूत होगी। इससे विद्यार्थियों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और आम यात्रियों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।
कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में परिवहन लागत और समय कम होने से किसानों को लाभ मिल सकता है, जबकि बेहतर माल ढुलाई व्यवस्था से व्यापारिक गतिविधियों और स्थानीय बाजारों के विस्तार को भी गति मिलने की उम्मीद है।
रेल परियोजना के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने तथा क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना भी है।
सांसद ने कहा कि यह परियोजना केवल यात्री सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि सीमांचल के आर्थिक और रणनीतिक विकास से भी जुड़ी है। बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच बेहतर रेल संपर्क बनने से क्षेत्रीय व्यापार और आवागमन मजबूत होगा।
नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित क्षेत्र होने के कारण रेल संपर्क का महत्व सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टि से भी बढ़ जाता है। आपातकालीन परिस्थितियों में तेज आवागमन, प्रशासनिक पहुंच और निगरानी व्यवस्था को इससे मजबूती मिल सकती है।
सांसद ने कहा कि 17 वर्षों से प्रतीक्षारत इस परियोजना को अब किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब का शिकार नहीं होने दिया जाना चाहिए तथा भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, टेंडर और निर्माण की सभी प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किशनगंज-जलालगढ़ रेल लाइन सीमांचल की जनता की लंबे संघर्ष और उम्मीदों से जुड़ी परियोजना है। बजट आवंटन और टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की अनुमति को उन्होंने क्षेत्र की जनता की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अब अगला लक्ष्य निर्माण कार्य को धरातल पर तेजी से उतारना होना चाहिए।
