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पूर्णिया के रूपौली में खेती का नया अंदाज, मशीन से आसान हुई आलू की रोपाई, मजदूरों की किल्लत से किसानों को राहत

Published: Sun, 25 Oct 2026 06:57 PM (IST)

पूर्णिया के रूपौली प्रखंड में आलू की बुआई के लिए आधुनिक मशीनों (पोटैटो प्लांटर) का उपयोग किया जा रहा है। ...और पढ़ें

पूर्णिया के रूपौली प्रखंड के खेत में आधुनिक मशीन (पोटैटो प्लांटर) के जरिए आलू की फसल की रोपाई करते किसान

पूर्णिया के रूपौली प्रखंड के खेत में आधुनिक मशीन (पोटैटो प्लांटर) के जरिए आलू की फसल की रोपाई करते किसान

HighLights

  1. आधुनिक पोटैटो प्लांटर से आलू की बुआई।

  2. मजदूरों की कमी की समस्या हुई दूर।

  3. समय और लागत में भारी बचत हुई।

संवाद सूत्र, रूपौली (पूर्णिया)। पूर्णिया जिले के रूपौली प्रखंड अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में इस बार आलू की बुआई और रोपाई का अंदाज पूरी तरह बदला-बदला नजर आ रहा है।

खेतों में आलू की फसल लगाने के लिए पहुँची आधुनिक कृषि मशीनों (पोटैटो प्लांटर) ने स्थानीय किसानों की वर्षों पुरानी चिंताओं और समस्याओं को काफी हद तक समाप्त कर दिया है।

पिछले कुछ समय से खेती के सीजन में लगातार मजदूरों के अभाव से जूझ रहे किसान बेहद परेशान चल रहे थे। समय पर मजदूर न मिलने के कारण फसल की रोपाई में देरी हो जाती थी, जिसका सीधा असर पैदावार पर पड़ता था। अब अत्याधुनिक मशीन के आ जाने से प्रखंड के किसानों ने बड़ी राहत की सांस ली है।

समय और मजदूरी दोनों की भारी बचत

आधुनिक मशीन से आलू रोपाई की प्रक्रिया बेहद सरल और सुगम हो गई है। किसानों को अब सिर्फ अपने खेतों की जुताई कर उसे तैयार करना होता है और आलू के बीज को खेत के मुहाने तक पहुँचाना पड़ता है। इसके बाद का पूरा काम मशीन अपने आप संभाल लेती है।

मशीन के संचालक अपने साथ प्रशिक्षित मजदूर भी लाते हैं। ये मजदूर मशीन के ऊपरी होपर में आलू डालते रहते हैं और ट्रैक्टर के साथ चलती हुई मशीन जमीन में सही दूरी व गहराई पर आलू की सुव्यवस्थित रोपाई करती जाती है। इससे न केवल समय की भारी बचत हो रही है, बल्कि पारंपरिक खेती के मुकाबले मजदूरी पर होने वाले खर्च में भी बड़ी कमी आई है।

किसानों का बढ़ा उत्साह, तकनीक की सराहना

क्षेत्र में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर मशीन के माध्यम से आलू की रोपाई होते देख किसानों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। नई तकनीक का इस्तेमाल करने वाले स्थानीय किसान अजय कुमार, दिवाकर सिंह, उदय यादव समेत दर्जनों किसानों ने अपनी खुशी व्यक्त की है।

कृषकों का कहना है कि पारंपरिक तरीके की तुलना में मशीन से आलू लगाने का यह पहला अनुभव बेहद शानदार रहा। इससे न केवल खेती की लागत घटी है, बल्कि कम समय में बड़े रकबे में आलू की रोपाई संभव हो पा रही है।

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