जागरण संवाददाता, पूर्णिया। कुख्यात आशीष सिंह उर्फ अटिया की गिरफ्तारी से तकरीबन दो माह से सियासी गलियारों मचा उफान भी शांत हो गया। आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर से लगातार जिला में सूर्खियों में रह रहा था। दरअसल अटिया सिंह सरसी का रहने वाला है। उसका आपराधिक सफर भी वहीं से शुरु हुआ है। यही वजह थी कि इसको लेकर यहां सियासी उफान मच गया था। किसी भी वारदात में अटिया का नाम आते ही विपक्षी मंत्री लेशी सिंह पर वार करने से नहीं चूक रहे थे। यद्यपि अटिया की गिरफ्तारी के बाद एसपी ने यह साफ कर दिया कि अटिया का कोई राजनीतिक कनेक्शन नहीं रहा है। वह विशुद्ध अपराधी है और खुद का गैंग बना वर्चस्व कायम करने की फिराक में था। बता दें कि गत विधानसभा चुनाव के दिन ही अटिया ने जेल में बंद कुख्यात बिट्टू सिंह के भाई बेनी सिंह की हत्या कर दी थी। इस मामले को भी उस दौरान सियासी कोण देने का भरसक प्रयास हुआ था। बाद में पूर्व जिला पार्षद विश्वजीत सिंह उर्फ रिटू सिंह की हत्या सरसी बाजार में दिनदहाड़े कर दी गई थी। इसमें पूर्व जिला पार्षद की पत्नी सह जिला पार्षद अनुलिका सिंह ने मंत्री के इशारे पर अटिया द्वारा हत्या का आरोप लगाया था। साथ ही राजद ने इसको लेकर विरोध जताया था। यद्यपि मंत्री ने भी उस दौरान भी यह साफ किया था कि सरसी से उनका नाता कब का टूट चुका है। वे पूर्णिया में बस चुकी हैं। उन्होंने खुद पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी। इधर हाल में पूर्णिया शहर में कुख्यात बिट्टू सिंह के करीबी नीरज कुमार झा की हत्या में भी अटिया को नामजद किया गया। इस मामले को लेकर भी विपक्षियों द्वारा मंत्री को घेरने का प्रयास किया गया। पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने भी इसको लेकर बयान दिया था। इस स्थिति में मंत्री के पक्ष में जदयू भी उतर आई थी। जदयू के शिष्टमंडल ने पुलिस अधीक्षक से भेंटकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। साथ ही विपक्षियों के आरोप पर जमकर पलटवार किया था। बहरहाल इस चलते अटिया की संलिप्तता वाला हर मामला हाई प्रोफाइल हो जा रहा था और उसकी गिरफ्तारी में देरी से पुलिस की भी किरकिरी हो रही थी।

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