जागरण संवाददाता, पूर्णिया। ग्रामीण इलाकों में अब भी यूरिया के लिए हाहाकार मचा हुआ है। किसान लगातार यूरिया के लिए इस बाजार से उस बाजार तक भटक रहे हैं। विक्रेताओं पर नकेल कसने में विभाग पूरी तरह फेल हो रहा है। यही कारण है कि किसान इस आड़ में शोषण के शिकार हो रहे हैं।

बता दें कि जिले को आवश्यकता के अनुसार महज 60 फीसदी यूरिया ही अब तक मिल पाया है। इस स्थिति का लाभ थोक से लेकर खुदरा विक्रेता तक उठा रहे हैं। स्थिति यह है कि दुकानदार की शर्त पर भी आवश्यकता के अनुसार यूरिया किसानों को नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण इलाकों में खुदरा बिक्रेता यूरिया के साथ उतनी ही कीमत के दूसरा खाद बीज लेने या फिर कोई अन्य उपकरण लेने पर ही किसान को यूरिया देते हैं। खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि इसी शर्त पर उन्हें थोक बिक्रेताओं से यूरिया मिल रहा है। विभाग थोक बिक्रेताओं पर नकेल नहीं कस पा रहा है। वे जिस शर्त पर यूरिया लेते हैं उसी शर्त पर बेच रहे हैं। कहीं कहीं तो महज डेढ़ सौ व दो सौ रुपये के मवेशी का मच्छरदानी भी तीन सौ में लेने पर यूरिया किसानों को दिया जा रहा है। इधर विभाग का स्पष्ट कहना है कि आवंटन के अनुसार वे तत्काल इसे प्रखंडों तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। बिक्री में गड़बड़ी को लेकर कई दुकानदारों के खिलाफ अब तक कार्रवाई भी की जा चुकी है और आगे भी कार्रवाई की जाएगी। इसके विपरीत ग्रामीण इलाकों में विभाग की कोई हनक कहीं नहीं दिख रही है। बायसी के किसान मु. हसीम ने कहा कि वे तीन दिनों से यूरिया के लिए पूर्णिया में भटक रहे हैं। दुकानदारों के अजीब शर्त होते हैं। वे यूरिया के साथ मिक्चर खाद या फिर कुछ अन्य सामान लेने की शर्त रखते हैं। इतना हीं नहीं दस बोरे की आवश्यकता बताने पर पांच बोरा यूरिया देने को तैयार होते हैं।

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