जागरण संवाददाता, पूर्णिया। लोककला की परंपरा अब लुप्त हो रही है। वर्तमान में युवा पीढ़ी परंपरागत संगीत और नृत्य को अब विस्मृत कर रहे हैं। ऐसे में वरिष्ठ रंगकर्मी सह भिखारी ठाकुर सम्मान प्राप्त विश्वजीत कुमार सिंह ने कलाभवन में लोककला प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र स्थापित किया। केंद्र के माध्यम से कलाकारों के बीच विलुप्त होती लोक कला को संजोने के लिए प्रयासरत हैं। इससे कलाकारों को लोकगीत व नृत्य का प्रशिक्षण दिया जाता है बल्कि सभी को प्रदर्शन का भी मौका मिलता है। विश्वजीत कुमार सिंह ने बताया कि उनका उद्देश्य यहां पर कला विश्वविद्यालय की स्थापना करना है जिसके लिए वे प्रयासरत हैं। कलाकार जब राज्य के बाहर प्रदर्शन के लिए जाते हैं तो वहां उन्हें पुरस्कार और सम्मान मिलता है। वे कोसी और मिथिलांचन की सांस्कृतिक परंपराओं से भी परिचित होते हैं। इसका प्रचार और प्रसार भी होता है। केंद्र के कलाकारों को प्रशिक्षण के बाद राज्य स्तर पर बल्कि देश के दूसरे राज्यों में भी कामयाबी हासिल की है। 2018 में गणतंत्र दिवस के मौके कलाकारों को उत्तर प्रदेश महोत्सव में प्रदर्शन का मौका मिला था जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुरस्कृत किया था।

लोककला की परंपरा को अब लोग भूल रहे हैं। जब मंच पर इसकी प्रस्तुति होती है तो वह लोगों को काफी आकर्षक और अपनी मिट्टी की याद दिलाता है। क्षेत्र की संवेदनाओं के प्रतीक लोकगीतों, लोककथाओं को युवाओं के बीच लोकप्रिय कर रहे हैं। हाल में जिला युवा उत्सव में एक भी लोक गाथा की प्रस्तुति नहीं हुई। यह लोक परंपराओं से टूटते रिश्ते का प्रतीक है। कभी राज्य स्तर तक यहां से इस विधा में कलाकारों को प्रदर्शन होता था।

संस्था की स्थापना -:

इस संस्था की स्थापना भिखारी ठाकुर सम्मान से सम्मानित और कला भवन नाट्य विभाग के

संयोजक रंगकर्मी विश्वजीत कुमार सिंह उर्फ छोटू ने की है। कलाकारों को प्रशिक्षण देकर विलुप्त होती लोक कलाओं को संजीवनी प्रदान कर रह रहें हैं। केंद्र से सांस्कृतिक महोत्सव में प्रदर्शन के लिए कलाकारों को आमंत्रित किया जाता है। लोककला प्रशिक्षण केंद्र क्षेत्र में प्रचलित लोककलाओं को विभिन्न विधाओं में युवा कलाकारों को प्रशिक्षण प्रदान करता है। स्थानीय और राज्य स्तर के कलाकार और गुरु समय -समय पर आ कर प्रशिक्षण देता है। केंद्र की स्थापना 2016 में हुई है। कम समय में ही कलाकारों ने मनाली, गोवा, लखनऊ, रायपुर, शिमला जैसे जगहों पर प्रदर्शन का मौका मिला है। कलाकारों को मनाली में अंतरराष्ट्रीय लोकनृत्य महोत्सव में कलाकार प्रदर्शन कर चुके हैं। सिक्किम में गेंगटोक में भी आयोजित राष्ट्रीय शिल्प महोत्सव, इलाहाबाद में आयोजित राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव, पटना में आयोजित प्रकाश उत्सव में कलाकारों को प्रदर्शन का मौका मिला है। उत्तर प्रदेश महोत्सव में गणतंत्र दिवस परेड में केंद्र के कलाकार हिस्सा ले चुके हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में झिझिया और झूमर लोकनृत्य की प्रस्तुति की थी।

--------------------------------------------------------------

Edited By: Jagran