संस बैसा (पूर्णिया)। बैसा प्रखंड क्षेत्र में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। क्षेत्र की जनता को मूलभूत आवश्यकताएं भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। जनप्रतिनिधि भी विवश नजर आ रहे हैं। नागरिकों को संवैधानिक तौर पर मौलिक अधिकार तो प्राप्त है । लेकिन इस क्षेत्र की जनता को मूलभूत सुविधाएं मयस्सर नहीं हो रही हैं। पंचायती राज व्यवस्था भी लागू हो गई है, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। क्षेत्र की सबसे अहम समस्या स्वास्थ्य की है। कहने को तो पंचायत स्तर तक स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति कर दी गई है, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और है। पंचायत स्तर पर बनाया गया उपस्वास्थ्य स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक सेवा नहीं दे रहे हैं। सरकारी स्तर पर यहां न तो महिलाओं के प्रसव की व्यवस्था है। और न ही कोई महिला चिकित्सक। शिक्षा की स्थिति भी इस क्षेत्र में दयनीय है। क्षेत्र के लगभग सभी प्राथमिक व उच्च विद्यालयों में स्वीकृत इकाई से कम शिक्षक हैं। इस कारण शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है।साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों को सौ दिन रोजगार देने का दंभ भरनेवाला मनरेगा भी दलालों और अधिकारियों की भेंट चढ़ गया है। मनरेगा योजनाओं में जेसीबी मशीन से काम कराया जा रहा है। भुगतान फर्जी जाब कार्डधारियों के खाते में किया जा रहा है। क्षेत्र में रोजगार के कोई अन्य साधन भी नहीं है। लिहाजा क्षेत्र के 70-80 फीसदी युवा रोजगार के लिए पलायन कर चुके हैं। वहीं क्षेत्र में बिजली और पानी की स्थिति भी बदतर है। लोग पानी-बिजली की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके समाधान की दिशा में अब तक कोई प्रयास धरातल पर नजर नहीं आ रहा है। वहीं इस संबंध में विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रयास जारी है। विधानसभा में आवाज उठाई है। तमाम स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक नियुक्ति की मांग की है।

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