प्रकाश वत्स, पूर्णिया। 80 लाख भुगतान के नौ माह बाद भी पूर्णिया कालेज में साइंस विभाग के भवन निर्माण का कार्य आरंभ नहीं हो पाया है। कालेज प्रशासन बेसब्री से संवेदक की राह देख रहे हैं। इसको लेकर लगातार पत्राचार भी हो रहा है, लेकिन फिलहाल इस दिशा में कोई पहल नहीं हो पाई है।

दरअसल कालेज प्रशासन को आधारभूत संरचना विकास मद में कुल दो करोड़ की राशि प्राप्त हुई थी। इसमें कालेज प्रशासन द्वारा अति महत्वपूर्ण साइंस विभाग के नव निर्माण का निर्णय लिया गया था। तय व्यवस्था के अनुसार तैयार स्टीमेट की लागत कुल 80 करोड़ की राशि बिहार शैक्षिक आधारभूत संरचना निगम को कालेज को भुगतान भी कर दी गई। यह भुगतान मार्च-2021 में ही किया गया था। बाद में निगम द्वारा इसकी निविदा की प्रक्रिया भी पूरी की गई और संवेदक को कार्य आवंटित कर दिया गया। इसमें भवन सहित अत्याधुनिक प्रयोगशाला का भी निर्माण होना है। इधर निविदा की सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी अब तक संवेदक का कोई अता-पता नहीं है। स्थिति यह है कि इस भव की नींव तक नहीं रखी जा सकी है। संवेदक निविदा प्राप्त करने के बाद कालेज में झांकने तक नहीं पहुंचा है। ऐसे में कालेज प्रशासन के लिए संवेदक की राह देखने के सिवाय कोई चारा नहीं रह गया है। इस स्थिति को लेकर छात्र नेताओं द्वारा भी लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। सीमांचल के चंद महत्वपूर्ण कालेजों में शुमार है पूर्णिया कालेज

बता दें कि पूर्णिया कालेज पूर्णिया की हर मायने में अलग पहचान रही है। इसका समृद्ध इतिहास रहा है और शैक्षणिक ²ष्टि से भी इसकी अलग प्रतिष्ठा रही है। सीमांचल के चंद महत्वपूर्ण कालेजों में इसका नाम शुमार है। यद्यपि बीच के दौर में इस कालेज की प्रतिष्ठा पर भी आघात पहुंचा है, जिसे विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद फिर से संवारने की कोशिश चल रही है। इसी क्रम में आधारभूत संरचना विकास को लेकर भी लगातार कार्य हो रहे हैं।

कोट-

कालेज के आधारभूत संरचना विकास के लिए दो करोड़ की राशि प्राप्त हुई थी। इसमें साइंस विभाग के भवन के साथ-साथ प्रयोगशाला आदि के नव निर्माण के लिए मार्च माह में बिहार शैक्षिक आधारभूत संरचना निगम को

80 लाख का भुगतान किया गया है। निगम के स्तर से इसकी निविदा की प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है। संवेदक द्वारा अब तक कार्य आरंभ नहीं किया गया है। इसको लेकर निगम को पत्र लिखा गया है।

डा. मु. कमाल, प्राचार्य, पूर्णिया कालेज।

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Edited By: Jagran