पूर्णिया। इचालो पंचायत के विभिन्न वार्डों में अचानक आयी बाढ़ की पानी से सैकड़ों एकड़ धान की फसल प्रभावित हो गई। वहीं बाढ़ की पानी से आमजनों पर काफी असर पड़ा है । मालूम हो कि पिछले दिनों हुई लगातार बारिश के कारण बाढ़ का पानी आने से प्रखंड के कई पंचायतों का धान का फसल पूर्णत: प्रभावित हो गया जिसे लेकर किसान काफी चिन्तित है। वहीं इचालो पंचायत के अंसर अली ने बताया कि बाढ़ का पानी पंचायत में घुसने से हजारों किसानों का धान का फसल पूर्णत: प्रभावित हो गया हैं । इस वजह से किसानों के चेहरे पर मायूसी छा गयी है कैसे आगे की खेती होगी कैसे कर्ज अदा होगी । उन्होंने बताया कि अचानक से आई बाढ़ के चलते हपका जाने वाली सड़क में पानी होने से आवागमन बाधित है। बनयारा पक्की सड़क पर पानी चढ़ गया जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। दरहा , हपका, बनयारा, हटगाछी गांव के कई घरों में पानी घुस गया है ।वहीं धान की पककर तैयार हुई फसल डूबकर बर्बाद हो गयी है । वहीं समाजसेवी मोजफ्फर हुसैन व अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत के दरहा गांव जाने वाली सड़क पर बाढ़ का पानी फैलने से आवागमन बाधित हो गया है । ग्रामीणों का मानना है कि अगर अधिक पानी फैले स्थानों पर नाव की व्यवस्था नहीं गयी तो सैकड़ों मतदाता मतदान करने से वंचित रह जाएंगे साथ ही बताया कि पंचायत के आंगनबाड़ी केन्द्र पर संचालित मतदान केंद्र संख्या 127 में बाढ़ का पानी वर्तमान में फैल गया है ।

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खेतों में बाढ़ का पानी घुसने से फसल हुई बर्बाद

संस,अमौर (पूर्णिया) : प्रखंड क्षेत्र में किसानों के खेतों में बाढ़ का पानी घुस जाने से खेतों में लगी धान, मक्का ,सरसों ,आलू एवं सब्जी फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। इससे किसानों में हताश का माहौल बना हुआ है। किसान, शिवानंद विश्वास, अरुण विश्वास, डोमर विश्वास, हरिलाल विश्वास, उमेश विश्वास, पंचानन विश्वास, फटकन विश्वास , मंगल हरिजन, शुभुल हरिजन, गंगालाल विश्वास, झड़ी लाल विश्वास सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि बेमौसम बारिश के कारण परमान, कनकेई, महानंदा नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है। बाढ़ के पानी आने के कारण खेतों में लगी फसल डूब गई है जिससे किसानों के समक्ष समस्या उत्पन्न हो गई है। विदित हो कि यहां पर हर साल जुलाई से लेकर अगस्त महीने के बीच बाढ़ आती है। इस बार भी जुलाई एवं अगस्त में दो बार बाढ़ आ चुकी है। लेकिन इस बार वर्षों बाद अक्टूबर माह में आई बेमौसम बाढ़ ने पक्का धान, खेतों में लगे आलू, सरसों, मक्का फसल को बर्बाद कर दिया है। किसानों ने बताया कि वे लोग कर्ज लेकर हर साल खेती करते हैं। खेती पर ही हम लोग निर्भर हैं। हमारे बाल बच्चों की पढ़ाई लिखाई ,शादी विवाह से लेकर अन्य सभी कार्य खेती पर ही निर्भर है। लेकिन सभी फसल बर्बाद हो जाने के कारण अब उनके समक्ष एक बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। किसानों ने जिला पदाधिकारी से इस ओर ध्यान देकर फसल क्षति मुआवजा दिलाने की मांग की है। वहीं बायसील प्रखंड के आसजा मोबैया पंचायत के वार्ड नंबर 15 बजरडीह गांव में कनकई नदी के धार में पांच घर नदी में समा गया एवं दर्जनों घर कटने के कगार में है। इजहार अहमद ने बताया कि यह कनकई नदी से ही निकला हुआ धार है जो कि कई सालों से बंद था ,पुन: इस वर्ष में कनकई नदी धार में मिल जाने के कारण इनका बहाव काफी तेज हो गया , जिस कारण से नदी कटाव भी काफी तेजी से हो रहा है। फैयाज आलम का दो घर पक्का और एक कच्चा घर, शब्बीर उर्फ सेमू का दो पक्का घर नदी में कट चुका है।

Edited By: Jagran