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पूर्णिया में 'मौत का गड्ढा': जिस घर में गूंजती थी 3 भाइयों की किलकारी, वहां अब पसरा है मातम

Published: Wed, 12 Aug 2026 02:39 PM (IST)

पूर्णिया के कसबा में अवैध खनन से बने पानी भरे गड्ढे में खेलने के दौरान तीन मासूम भाई डूब गए, ...और पढ़ें

रोती-बिलखती मां। जागरण

रोती-बिलखती मां। जागरण

HighLights

  1. कसबा, पूर्णिया में तीन मासूम भाई गड्ढे में डूबे।

  2. अवैध मिट्टी खनन से बने गहरे गड्ढे में हादसा।

  3. पूर्व मंत्री ने पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की मांग की।

संवाद सहयोगी, कसबा (पूर्णिया)। रविवार की सुबह गांव के लिए एक काले दिन के समान थी। घर के पास खेल रहे तीन मासूम भाई अचानक एक गहरे गड्ढे में गिर गए, जिससे निकलना उनके लिए संभव नहीं था। 11 साल का मोफिजूल, 9 साल का तफीजूल और 7 साल का सैराजुल, तीनों भाई हर दिन की तरह खेल रहे थे।

माता-पिता को नहीं पता था कि बच्चों का घर से निकलना उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बन जाएगा। सुबह करीब 8 बजे, तीनों भाई खेलते-खेलते धर्म कांटा के पास पहुंचे, जहां बारिश के पानी से भरा एक गहरा गड्ढा था। बच्चों को इसकी गहराई का अंदाजा नहीं था।

देखते ही देखते, तीनों उसमें गिर गए। मौके पर मौजूद अन्य बच्चों ने यह भयावह दृश्य देखा और चीखते हुए गांव की ओर भागे। ग्रामीण दौड़कर मौके पर पहुंचे और बच्चों की तलाश शुरू की। हर गुजरते पल के साथ परिजनों की उम्मीद टूटती जा रही थी।

जब तीनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। एक साथ तीन मासूम शरीर देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। जिस मां की गोद में कुछ देर पहले तक उसके बच्चे खेलते थे, उसी मां के सामने उसके तीनों बेटे हमेशा के लिए खामोश पड़े थे।

तीन बेटों की मौत का सोचकर ही कलेजा कांप जाता है। मां-बाप की चीख-पुकार से पूरा गांव गूंज उठा। घर की चौखट, जहां तीनों भाई खेलते थे, अब उनकी यादों की गवाह बन गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में खेतों से कथित तौर पर अवैध तरीके से मिट्टी निकाली गई थी। मिट्टी निकालने के बाद कई फीट गहरा गड्ढा खुला छोड़ दिया गया। बारिश के बाद यही गड्ढा पानी से भर गया और किसी ने नहीं सोचा कि यह मासूम बच्चों के लिए मौत का कुआं बन सकता है।

अगर गड्ढे को भर दिया गया होता, अगर उसके चारों तरफ सुरक्षा की व्यवस्था होती, या अगर समय रहते किसी ने खतरे को समझा होता, तो शायद आज ये तीनों बच्चे अपने मां-बाप के बीच होते।

सोमवार को पूर्व मंत्री मो. आफाक आलम पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया और सरकार से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने, पक्का मकान और शौचालय उपलब्ध कराने तथा इलाके में चल रहे अवैध मिट्टी खनन पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

मुआवजा शायद परिवार की कुछ जरूरतें पूरी कर दे, लेकिन जिस मां की गोद से तीन बेटे चले गए, उस खाली गोद को कौन भर पाएगा? यह हादसा सिर्फ तीन बच्चों की मौत नहीं है। यह एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब पूरे सिस्टम को देना होगा-आखिर कब तक खुले और गहरे गड्ढे मासूमों की जान लेते रहेंगे।

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