बिहार में राशन की दुकान के लिए फर्जी डिग्री का खेल, यूपी के संस्थान से 2-2 लाख रुपये में खरीदे सर्टिफिकेट
पूर्णिया में पीडीएस दुकानों का लाइसेंस पाने के लिए यूपी के संस्थानों की फर्जी डिग्रियां दो-दो लाख रुपये में बेची ...और पढ़ें
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एआई जनरेटेड फोटो
HighLights
पूर्णिया में पीडीएस लाइसेंस हेतु यूपी की फर्जी डिग्रियां बेची गईं।
जिलाधिकारी ने सभी 5000 आवेदकों के प्रमाण पत्रों की जांच का आदेश दिया।
फर्जीवाड़े में एसडीओ कार्यालय के नाजिर और प्रधान लिपिक गिरफ्तार।
राजीव कुमार, पूर्णिया। पीडीएस दुकानों का लाइसेंस पाने के लिए पूर्णिया में यूपी के संस्थानों की फर्जी डिग्री दो-दो लाख में खरीदी गई हैं।
यही वजह है कि जिले में 386 पीडीएस दुकानों के लाइसेंस लेने के लिए जिन पांच हजार आवेदकों ने आवेदन किया है, उनके प्रमाण यूपी के संस्थान से निर्गत हैं।
जिले में पूर्णिया सदर अनुमंडल में 123, बायसी अनुमंडल में 117, धमदाहा में 116, बनमनखी में 30 पीडीएस दुकानों का लाइसेंस निर्गत किया जाना है। इसके लिए मेधा सूची का प्रकाशन भी कर दिया गया है।
मेधा सूची में चयनित कई आवेदकों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने के बाद जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने मेधा सूची में चयनित सभी आवेदकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच का निर्देश दिया है। जांच के बाद ही अब आवेदकों को पीडीएस दुकानों का लाइसेंस निर्गत किया जाएगा।
इस संबंध में जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने यह निर्देश जारी किया है कि जांच के दौरान मेधा सूची में चयनित उम्मीदवारों के प्रमाण पत्रों की जांच के बाद अगर प्रमाण पत्र फर्जी पाया जाता है, तो मेधा सूची से नाम हटाते हुए उसके आवेदक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
जिलाधिकारी ने यह भी साफ कर दिया है कि बिना प्रमाण पत्रों की जांच के लिए किसी को भी लाइसेंस निर्गत नहीं किया जाएगा। बनमनखी अनुमंडल में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर मेधा सूची में नाम आने का आडियो वीडियो वायरल हुआ था।
इस मामले में प्राथमिकी के बाद पुलिस ने फर्जी प्रमाण पत्र बेचने वाले अमरेन्द्र गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में यह बात भी सामने आई है कि पीडीएस दुकान का लाइसेंस पाने के लिए जिन प्रमाण पत्रों का उपयोग किया गया है, उसमें अधिकांश प्रमाण पत्र यूपी के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से निर्गत है। इसमें से निर्गत कई प्रमाण पत्र सूचना अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी में फर्जी पाए गए है।
एसडीओ कार्यालय के बड़ा बाबू एवं नाजिर होंगे निलंबित
पीडीएस दुकानों के लाइसेंस मामले में डीएम के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने एसडीओ कार्यालय के नाजिर कन्हैया झा एवं प्रधान लिपिक अभिषेक कुमार की संलिप्तता पायी। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने बताया कि इन दोनों कर्मियों के खिलाफ अब अनुशासनिक कार्रर्वाई भी शुरू की जा रही है। जिसके बाद इन दोनों कर्मियों से पहले स्पष्टीकरण पूछा जाएगा फिर इनके खिलाफ प्रपत्र क गठित कर निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
जांच टीम ने यह पाया कि इन दोनों कर्मियों ने पीडीएस दुकानों के लाइसेंस निर्गत करने के मामले में कई आवेदकों से अवैध वसूली की।
अवैध वसूली मामले में फंस सकती है कई अन्य लोगों की गर्दन
बनमनखी में पीडीएस दुकानों के लाइसेस देने के नाम पर अवैध वसूली मामलों में पुलिस जांच के बाद कई अन्य लोगों की गर्दन फंस सकती है। बताया जाता है कि एसडीओ कार्यालय के नाजिर एवं प्रधान लिपिक द्वारा जिन नंबरों पर आवेदकों से मोटी रकम की वसूली की है।
पुलिस अब उसका डिटेल खंगालने की तैयारी में भी जुटी हुई है। बताया जाता है कि बनमनखी में पीडीएस दुकानों के लाइसेंस निर्गत करने में फर्जी दस्तावेज के अलावा मेधा सूची तैयार करने में भी बड़े पैमाने पर धांधली बरती गयी है। यहां फर्जी प्रमाण पत्रों का बड़े पैमाने पर खेल हुआ है।
पीडीएस दुकानों के लाइसेंस के लिए जिनका मेधा सूची में नाम आया है, सभी के प्रमाण पत्रों की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही पीडीएस दुकानदारों को लाइसेंस निर्गत किया जाएगा। जिनका प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाया जाएगा उनका सूची से नाम हटाते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। -अंशुल कुमार, जिलाधिकारी, पूर्णिया
