एक साल भी नहीं टिक पाया 14 लाख का पुल; कसबा के मोहनी में धंसने लगा पुल, पूर्णिया के 5 पंचायतों की बढ़ी चिंता
कसबा प्रखंड के मोहनी पंचायत में सौरा नदी पर 14 लाख रुपये की लागत से बना पुल एक साल में ...और पढ़ें

कसबा के गेरुआ चौक के समीप सौरा नदी पर धंसे पुल
HighLights
मोहनी पंचायत में 14 लाख का पुल एक साल में धंसा।
घटिया निर्माण सामग्री और तकनीकी अनियमितताओं का आरोप।
भारी वाहनों की आवाजाही पर तत्काल रोक लगाई गई।
संवाद सूत्र, कसबा (पूर्णिया)। कसबा प्रखंड अंतर्गत मोहनी पंचायत में सौरा नदी पर महज एक वर्ष पूर्व 14 लाख रुपये की लागत से निर्मित पुल धंसने लगा है। गेरुआ चौक के पूरब स्थित इस नवनिर्मित पुल के क्षतिग्रस्त होने और धंसने की खबर से क्षेत्र की लगभग पांच पंचायतों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। 15वीं वित्त योजना की राशि से बने इस पुल के निर्माण में घोर तकनीकी अनियमितता और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोग लगातार विरोध जता रहे हैं।
कसबा प्रखंड की मोहनी पंचायत में 15वीं वित्त योजना से 14 लाख की लागत से सौरा नदी पर बना पुल एक साल में ही हुआ क्षतिग्रस्त
डीआरडीए निदेशक, बीडीओ और बीपीआरओ ने अभियंताओं के साथ मौके पर पहुंचकर लिया जायजा; भारी वाहनों की आवाजाही पर तत्काल रोक
ग्रामीणों ने लगाया घटिया निर्माण व सरिया की अनदेखी का आरोप; मुखिया बोले- 'पुल सुरक्षित, सिर्फ संपर्क पथ का हुआ है कटाव'
आक्रोशित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से तकनीकी जांच, निर्माण सामग्री की जांच और खर्च के वित्तीय ऑडिट की उठाई मांग
पुल धंसने की गंभीर सूचना मिलने के बाद शनिवार को जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (DRDA) के निदेशक अमरेंद्र कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) मधु कुमारी और प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी (BPRO) दीपक कुमार ने तकनीकी अभियंताओं की टीम के साथ गेरुआ पहुंचकर पुल की वस्तुस्थिति का सघन निरीक्षण किया। जांच के दौरान पुल की संरचना कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त पाई गई, जिसके बाद सुरक्षा के मद्देनजर तत्काल प्रभाव से पुल के ऊपर भारी वाहनों के आवागमन पर पूर्णतः रोक लगा दी गई है।
घटिया निर्माण और मानकों की अनदेखी का आरोप
स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि निर्माण के समय निर्धारित तकनीकी मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई और पुल में पर्याप्त मात्रा में सरिया तथा गुणवत्तापूर्ण सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया। यही मुख्य वजह है कि निर्माण के मात्र एक साल के भीतर ही पुल की बुनियाद और ऊपरी संरचना कमजोर पड़ गई और यह जगह-जगह से धंसने लगा। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते पुल की मुकम्मल मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं कराया गया, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
सरकारी राशि के ऑडिट और उच्चस्तरीय जांच की मांग
15वीं वित्त योजना के तहत ग्रामीण संपर्कता को मजबूत करने के दावे पर इस पुल की बदहाली ने सरकारी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। रोजाना सैकड़ों राहगीरों और वाहनों का आवागमन होने के कारण ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। प्रभावित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता लैब टेस्ट कराने और सरकारी राशि के खर्च का वित्तीय ऑडिट कराने की पुरजोर मांग की है। लोगों का कहना है कि गड़बड़ी की पुष्टि होने पर जिम्मेदार जनप्रतिनिधि, निर्माण एजेंसी और संलिप्त कर्मियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
"ग्रामीणों द्वारा लगाए जा रहे अनियमितता के सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। नदी में पानी के तेज बहाव के कारण केवल पुल का संपर्क पथ (एप्रोच रोड) आंशिक रूप से कटा था, मुख्य पुल की संरचना पूरी तरह सुरक्षित है। निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार ही कराया गया है।"
