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एकता दिवस पर PM मोदी के सामने सजेगी बिहार की संस्कृति, गुजरात में झिझिया लोक नृत्य पेश करेंगे पूर्णिया के 16 कलाकार

Published: Sat, 10 Oct 2026 07:59 AM (IST)

Bihar Dance National Unity Day: राष्ट्रीय एकता दिवस पर गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष पूर्णिया के 16 कलाकार ...और पढ़ें

Bihar Dance National Unity Day: बिहार और मिथिलांचल की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर झ‍िझ‍िया।

Bihar Dance National Unity Day: बिहार और मिथिलांचल की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर झ‍िझ‍िया।

HighLights

  1. पूर्णिया के 16 कलाकार गुजरात में पीएम मोदी के समक्ष झिझिया नृत्य।

  2. राष्ट्रीय एकता दिवस पर बिहार की संस्कृति का राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शन।

  3. झिझिया नृत्य: सिर पर जलते दीप वाले घड़े का अद्भुत संतुलन।

दीपक शरण, पूर्णिया। Bihar Dance National Unity Day: बिहार और मिथिलांचल की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर की पहचान बन चुका पारंपरिक लोक नृत्य 'झिझिया' अब राष्ट्रीय फलक पर अपनी छटा बिखेरेगा। आगामी 31 अक्टूबर को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' (सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती) के पावन अवसर पर गुजरात में आयोजित भव्य राष्ट्रीय समारोह में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष पूर्णिया के 16 लोक कलाकार झिझिया नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देंगे।

इस सांस्कृतिक दल का नेतृत्व पूर्णिया कला भवन के ख्यातिप्राप्त रंगकर्मी, बिहार कला पुरस्कार एवं राष्ट्रीय लोक विद पुरस्कार से अलंकृत विश्वजीत कुमार सिंह कर रहे हैं। यह प्रतिष्ठित आयोजन गुजरात सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग तथा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

बिहार से 80 कलाकार चयनित

संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (ईजेडसीसी), कोलकाता द्वारा पूरे बिहार से कुल 80 लोक कलाकारों का चयन इस राष्ट्रीय समारोह के लिए किया गया है। इसमें पूर्णिया जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक 'कला भवन' के 16 कलाकारों का चयन होना जिले और पूरे कोसी-सीमांचल क्षेत्र के लिए बड़े गौरव की बात है।

पूर्णिया से 16 को मिला मौका

दल के निर्देशक विश्वजीत कुमार सिंह ने बताया कि 16 सदस्यीय कलाकारों की टीम 20 अक्टूबर को पूर्णिया से गुजरात के लिए रवाना होगी। दल 21 अक्टूबर को आयोजन स्थल पर रिपोर्टिंग करेगा, जिसके बाद 22 अक्टूबर से देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों के साथ संयुक्त महाअभ्यास (रिहर्सल) शुरू होगा। 31 अक्टूबर को मुख्य मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य गणमान्य अतिथियों के समक्ष बिहार की जीवंत लोक परंपरा झिझिया की प्रस्तुति दी जाएगी।

चयनित कलाकारों में खुशी की लहर

झिझिया लोक नृत्य दल में विश्वजीत कुमार सिंह (निर्देशक), स्नेहा झा, रिंकल कुमारी, दिप्रिया, स्नेहा राय, लकी प्रिया, संजना दास, ज्योति कुमारी, दीक्षा कुमारी, कोमल कुमारी, साक्षी सांडिल्य, रिया डे, प्रीति डे, काजल देवनाथ, संजना कुमारी और शिवम कुमार शामिल हैं।

कला भवन परिवार ने दी बधाई

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर कला भवन के अध्यक्ष डॉ. डी. राम, मंत्री राम नारायण सिंह, प्रबंध समिति सदस्य संजय कुमार सिंह, नाट्य निर्देशक कुंदन कुमार, अंजनी श्रीवास्तव और शिवाजी राम राव ने सभी चयनित कलाकारों को बधाई दी है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी विश्वजीत कुमार सिंह के नेतृत्व में कला भवन के कलाकार जमुई में आयोजित प्रधानमंत्री के कार्यक्रम और नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय स्तर की सफल प्रस्तुतियां दे चुके हैं।

क्या है लोक नृत्य झिझिया

झिझिया केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि मिथिला और सीमांचल की गहरी लोक आस्था और अनुष्ठान से जुड़ा पर्व-नृत्य है। मुख्य रूप से शारदीय नवरात्र में षष्ठी तिथि से विजयादशमी तक महिलाएं और युवतियां यह नृत्य करती हैं।

सिर पर जलता दीप और संतुलन का विस्मय

इस नृत्य का सबसे विस्मयकारी पहलू इसका संतुलन है। नृत्यांगनाएं अपने सिर पर अनेक छिद्रों वाला मिट्टी का घड़ा रखती हैं, जिसके भीतर एक दीया जलता रहता है। ढोल, ढाक, शहनाई और बांसुरी की तेज लयबद्ध थाप पर घूमते हुए नृत्य करने के दौरान घड़े के भीतर जलता दीपक बुझना नहीं चाहिए। लोक मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में सुखाड़, महामारियों और डायन-तांत्रिकों की बुरी नजर से बच्चों व गांव की रक्षा के लिए यह अनुष्ठानिक नृत्य देवी दुर्गा और भैरवी को प्रसन्न करने के लिए शुरू हुआ था।