पूर्णिया। पूर्णिया जैसे छोटे शहर जहां किसी भी खेल के लिए बेहतर मैदान और जिम तक उपलब्ध नहीं है वहां किसी भी खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देना किसी चुनौती से कम नहीं है। उसमें भी हैंडबॉल और रग्वी जैसे गैर परंपरागत खेलों से शायद ही कोई जुड़ना चाहे। लेकिन इस चुनौती को स्वीकार कर राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रीना बाखला ने खिलाड़ियों की टीम बनाकर उन्हें प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी उठाई है। वे स्वयं एथलेटिक्स, हैंडबॉल और रग्वी फुटबॉल में स्टेट टीम का हिस्सा रही हैं। रीना अब जिले के उभरते खिलाड़ियों को तैयार कर रही हैं। लड़के और लड़कियों को प्रशिक्षण दे रही हैं। लडकियों को रग्वी और हैंडबॉल जैसे खेलों के लिए प्रेरित कर रही हैं। क्लब की स्थापना कर खिलाड़ियों को तराश रही हैं। अबतक 14 लड़के-लड़की बिहार टीम का हिस्सा हैंडबॉल, रग्वी और एथलेटिक्स में बन चुके हैं। वह स्थानीय स्तर पर हैंडबॉल और रग्वी फुटबॉल संघ की संस्थापक हैं। जिला संघ बनाकर खेल का आयोजन करवाया। दो वर्ष के अंदर ही पूर्णिया के खिलाड़ियों ने बिहार राज्य टीम का बने और जिला का नाम रोशन किया। यहां तक कि राज्य स्तर पर होने वाली प्रतियोगिता में बतौर निर्णायक उन्हे खेल संघों से आमंत्रण भी मिलता है। इसके साथ ही महिला कॉलेज और पूर्णिया विश्वविद्यालय में बतौर प्रशिक्षक के रूप में खिलाड़ियों को तराश रही हैं। -: खेल के लिए समर्पित किया है जीवन रीना बाखला का नाम अब जिला खेल जगत में कोई नया या अपरिचित नहीं है। रीना का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा। काफी साधारण परिवार से आने वाली रीना ने 2004-05 से खेलना शुरू किया। एथेटिक्स की विभिन्न प्रतियोगिता( जैबलीन, शॉटफूट व हैमर थ्रो) में प्रथम स्थान हासिल किया। उसके बाद राष्ट्रीय चैंपियनशिप में खेलने का मौका मिला। 2004-05 से 2009 -10 तक बिहार जेबलीन (भालाफेक) एथलेटिक्स प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर आती रहीं। इसी दौरान अखिल भारतीय विश्वविद्यालय चैंपियनशिप में तीन बार एथलेटिक्स प्रतियोगिता के तौर पर चयन हुआ। 2006 07 में पूर्णिया में आयोजित राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में सर्वेश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार हासिल किया। उस समय के तात्कालिक खेल मंत्री जनार्दन सिंह द्वारा सम्मानित किया गया था। रीना को इसके अलावा तैराकी, तीरंदाजी और बैंडमिटन खेलने का भी शौक है। रीना यहां के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने देखना चाहती हैं। उनका कहना है कि इसके लिए खेल संसाधन का यहां पर विकास बहुत आवश्यक है। प्रतिभा को तराशने के लिए संसाधन का काफी महत्व होता है।

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