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Bihar Success Story : पूर्ण‍िया के आदिवासी टोले की कविता देवी बनीं नजीर, शादी के बाद गृहस्थी संभालते हुए कर रहीं B.Ed

Published: Wed, 02 Sep 2026 11:33 PM (IST)

Bihar Success Story : पूर्णिया की कविता देवी ने विषम परिस्थितियों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी और अब उच्च ...और पढ़ें

Bihar Success Story : Purnia रुपौली के आदिवासी टोले की कविता देवी बनीं नजीर, शादी के बाद गृहस्थी संभालते हुए कर रहीं B.Ed

Bihar Success Story : Purnia रुपौली के आदिवासी टोले की कविता देवी बनीं नजीर, शादी के बाद गृहस्थी संभालते हुए कर रहीं B.Ed

HighLights

  1. पिता के निधन के बाद पढ़ाई छूटी, शादी के बाद फिर शुरू की।

  2. गृहस्थी संभालते हुए मोबाइल से ऑनलाइन स्नातक पूरा किया, अब कर रही हैं बी.एड।

  3. आदिवासी समाज की बेटियों को शिक्षित करने का लिया संकल्प, बनीं मिसाल।

संवाद सूत्र, रुपौली (पूर्णिया)। Bihar Success Story : मजबूत इच्छाशक्ति, लगन और शिक्षा के प्रति अटूट निष्ठा हो तो कोई भी बाधा सपनों को साकार होने से नहीं रोक सकती। रुपौली प्रखंड अंतर्गत गायत्री नगर (तेलडीहा आदिवासी टोला) की निवासी कविता देवी आज अपने पूरे समाज की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। विषम पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई का सिलसिला दोबारा शुरू किया, बल्कि अब उच्च शिक्षा हासिल कर समाज में बदलाव की नई इबारत लिख रही हैं।

  • रुपौली प्रखंड के तेलडीहा आदिवासी टोला (गायत्री नगर) की रहने वाली हैं कविता देवी; बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

  • 2012 में पिता मुंसी टुडू के निधन से रुकी थी पढ़ाई, 2017 में शादी के बाद पति व सास ने दिया पूरा साथ

  • घर-गृहस्थी और खाना बनाने के बीच मोबाइल से ऑनलाइन पढ़ाई कर स्नातक पूरा किया, अब पूर्णिया विवि से कर रहीं बी.एड

  • पिता की तरह शिक्षक बनकर आदिवासी समाज के पिछड़ेपन को दूर करने और बेटियों को पढ़ाने का लिया संकल्प

कविता के जीवन का संघर्ष उस वक्त शुरू हुआ जब वह इंटर की पढ़ाई पूरी कर स्नातक प्रथम वर्ष में नामांकित थीं। वर्ष 2012 में उनके पिता मुंसी टुडू का अचानक निधन हो गया। परिवार पर आए इस संकट के कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई। इसके बाद वर्ष 2017 में उनका विवाह पिंकूलाल सोरेन से हुआ। विवाह के उपरांत कविता ने आगे पढ़ने की इच्छा जताई, जिस पर उनके पति और सास ने पूरा समर्थन दिया। ससुराल से मिले संबल के दम पर उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की और वर्तमान में पूर्णिया विश्वविद्यालय से बी.एड. (B.Ed) कर रही हैं।

चूल्हा-चौका और गृहस्थी के बीच मोबाइल से पढ़ाई

एक गृहिणी के रूप में परिवार की देखभाल और खाना बनाने जैसी रोजमर्रा की जिम्मेदारियों को निभाते हुए पढ़ाई जारी रखना बेहद चुनौतीपूर्ण काम था। लेकिन कविता ने समय का सदुपयोग करने की ठानी। वे घर का कामकाज निपटाने के बाद जब भी फुर्सत पातीं, मोबाइल के जरिए ऑनलाइन कक्षाओं और अध्ययन सामग्री से जुड़ जातीं। उनका कहना है कि पढ़ाई के लिए अलग से समय निकालना भले ही कठिन रहा हो, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे कोई भी मुश्किल आड़े नहीं आई।

सकारात्मक खबरों से मिला हौसला, परिवार में भी शिक्षा की अलख

कविता ने बताया कि संघर्ष के दिनों में दैनिक जागरण में प्रकाशित होने वाली प्रेरणादायक और सकारात्मक खबरों ने उन्हें विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का संबल दिया। शिक्षा के प्रति उनका पूरा परिवार भी सजग है। उनकी एक बहन आशा कार्यकर्ता हैं, दूसरी पटना में नर्स के रूप में कार्यरत हैं, जबकि एक भाई आईटीआई और दूसरा स्नातक कर रहा है।

पिता की तरह शिक्षक बनकर समाज को संवारने का सपना

कविता देवी का लक्ष्य अपने पिता की तरह शिक्षक बनना है। उनका कहना है कि आदिवासी समाज आज भी शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है। जब तक समाज की बेटियां आगे नहीं आएंगी और शिक्षित नहीं होंगी, तब तक समग्र विकास संभव नहीं है। उनका यह सफर उन तमाम युवतियों के लिए एक संदेश है, जो शादी या जिम्मेदारियों के दबाव में पढ़ाई छोड़ देती हैं।