पूर्णिया। सदर अस्पताल परिसर की व्यवस्था इस दिनों धराशायी हो चुकी है। अव्यवस्था ने जैसे डेरा डाल रखा है तभी तो परिसर में गैरकानूनी निर्माण भी डंके की चोट पर संचालित हो रहा है। शायद कुंभकरणी नींद में अस्पताल प्रशासन है। जिला पदाधिकारी ने भी समीक्षा बैठक में ऐसे निर्माण को हटाने का निर्देश दे चुके हैं। जीविका रसोई संचालित करने के लिए भवन निर्माण कर देने का निर्देश राज्य स्वास्थ्य समिति से मिला हुआ उसके बाद भी जर्जर भवन में ही कैंटीन संचालित हो रहा है। चिह्नित स्थल को खाली कराने में लक्ष्य कैंटीन और निजी डेंटल क्लीनिक अवरोध बना हुआ है।

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भवन निर्माण के लिए चिह्नित स्थल को खाली कराने का मिल चुका है निर्देश -:

ठीक एक माह पूर्व सिविल सर्जन का आदेश भी अबतक अमल में नहीं लाया गया है। जीविका की रसोई सदर अस्पताल परिसर में संचालित किया जा रहा है। राज्य स्वास्थ्य समिति के साथ करार मुताबिक आंतरिक और बाह्य मरीजों के लिए जीविका दीदी की रसोई से भोजन व नाश्ता मुहैय्या कराया जाएगा। सदर अस्पताल परिसर में जीविका आकाश दीदी की रसोई संचालित हो रही है। जिस भवन में वर्तमान में कैंटिन संचालित किया जा रहा है उस भवन की स्थिति बेहद जर्जर है। भोजन पकाते समय छत के ऊपरी भाग से प्लास्टर तक नीचे भोजन में गिर जाता है। इस जर्जर भवन में रसोई का संचालन उचित नहीं है। जीविका दीदियों और अन्य कर्मियों के इस्तेमाल के लिए शौचालय का भी प्रबंध नहीं है। उक्त बातें सीएस स्वयं अपने जारी पत्र में स्वीकार करते हैं बावजूद चिह्नित स्थल खाली कराने में अबतक अस्पताल प्रशासन विफल रहा है।

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एक माह पूर्व सीएस का आदेश भी ठंडे बस्ते में -:

दरअसल अस्पताल प्रशासन का रवैया प्रारंभ से काफी लचर रहा है। यही कारण है एक निजी डेंटल क्लीनिक का भवन जब मेडिकल कालेज भवन निर्माण के लिए तोड़ कर हटाया जाता है तो महज कुछ महीनों में ही अस्पताल परिसर में खाली जगह उपलब्ध कराई जाती है। कुष्ट कार्यालय के ठीक सामने ही यह क्लीनिक संचालित हो रही है। एक निजी क्लीनिक के संचालक के लाभ की चिता अस्पताल प्रशासन को क्यों है इसको समझा जा सकता है। अब यही भवन जीविका दीदी की रसोई के लिए भवन निर्माण में बाधा बन रही है। इसको हटाने का निर्देश जिला पदाधिकारी की समीक्षा बैठक में स्पष्ट तौर पर दिया गया था। यही नहीं अस्पताल में जीविका के अलावा सभी तरह की कैंटीन हटाने का निर्देश दिया गया है। इसके बावजूद परिसर के मुख्य सड़क किनारे ही लक्ष्य कैंटीन भी संचालित हो रहा है। इसको हटाने का निर्देश काफी पहले ही रोगी कल्याण समिति की बैठक में लिया जा चुका है। दोनों भवन नहीं हटाने के कारण जीविका रसोई के लिए भवन निर्माण नहीं किया जा सका है।

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डीएम के आदेश भी सदर अस्पताल प्रशासन के सामने निस्तेज -:

आखिर सदर अस्पताल प्रशासन के लिए नियम किसी और दुनिया में तैयार किया जाता है। राज्य स्वास्थ्य समिति से करार में यह स्पष्ट उल्लेख है कि अस्पताल परिसर के अंदर केवल जीविका दीदी की रसोई ही चलेगी इसके अलावा सभी कैंटीन को हटाया जाएगा। इसके बावजूद भी वर्ष भर से अधिक समय हो गया है लेकिन इस पर अमल नहीं किया जा रहा है। लक्ष्य कैंटीन का संचालन के साथ दो अन्य कैंटीन अस्पताल परिसर में मजे से संचालित हो रहा है। इस कारण गंदगी और बेवजह लोगों को जमावड़ा भी मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। डेंटल निजी क्लीनिक का करार काफी पहले ही समाप्त हो चुका है। अस्पताल

के ओपीडी में डेंटल विभाग मौजूद है। जिला पदाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में काफी पहले ही इस निजी डेंटल क्लीनिक को हटाना का निर्देश दिया था। इस निर्देश की अवमानना करते हुए क्लीनिक को दोबारा नया स्थल उपलब्ध करा दिया गया।

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एक माह बाद भी सीएस का आदेश पत्र फांक रहा है धूल -

सिविल सर्जन डा. एसके वर्मा ने ठीक एक माह पूर्व ही जगह खाली करा कर जीविका रसोई के लिए भवन निर्माण का निर्देश दिया था लेकिन अबतक उसको अमल में नहीं लाया गया है। मजेदार बात यह है कि सिविल सर्जन के पास ही अभी सदर अस्पताल अधीक्षक की भी जिम्मेदारी है। आदेश को धरातल में क्यों नहीं उतरा जा रहा है यह समझ से बाहर है। इसमें सबसे अधिक हानि आम मरीजों की हो रही है कुछ निजी एजेंसी अस्पताल परिसर में लाभ कमा रहे हैं और अस्पताल प्रशासन मौन बना हुआ है।

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इस संबंध में पत्र जारी कर जीविका रसोई के भवन निर्माण के लिए चिह्नित स्थल को खाली कराने का निर्देश दिया गया है ताकि जल्द से जल्द भवन निर्माण कार्य प्रारंभ हो सके।

डा. एसके वर्मा, सिविल सर्जन