पूर्णिया। पूर्णिया पशु तस्करी का सबसे सुरक्षित जोन बन गया है। आलम यह है कि दिन दहाड़े सरकारी निर्देशों का उल्लंघन कर प्रतिदिन दो सौ से ज्यादा बड़े छोटे वाहनों में लदे मवेशियों को पशु तस्कर खुलेआम बंगाल के रास्ते बंगलादेश ले जाते हैं। पशु तस्करों द्वारा जिस रास्ते पशुओं को ले जाया जाता है उस रास्ते में पड़ने वाले थाने पशु तस्करी की बात जानते हुए भी अंजान बने रहते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि पशु तस्करों द्वारा एक बंधी बंधाई रकम हर थाने को दी जाती है। सोमवार की रात गौ रक्षा पर काम करने वाली एक संस्था के सहयोग से एक साथ कई थाना क्षेत्र में पशु लदे ट्रक जब्त किए गए। कटिहार के फलका थाना क्षेत्र में एक ट्रक, मीरगंज थाना क्षेत्र में दो ट्रक एवं बायसी थाना में एक मवेशी लदा ट्रक जब्त किया गया है। उन वाहनों में 80 से ज्यादा पशुओं को ठूंसृ ठूंस कर लादा गया था। क्षमता से अधिक पशुओं को लादे जाने के कारण कई मवेशियों की मौत ट्रक में दब जाने के कारण ही हो गयी थी। पुलिस ने जब मीरगंज थाना क्षेत्र में जब्त दो ट्रकों से उस पर लदे मवेशियों को उतारा तो उसमें छह मवेशी मृत पाए गये।

बताया जाता है कि जब्त सभी ट्रकों से पशुओं को पहले पश्चिम बंगाल ले जाया जा रहा था वहां से फिर उसे बंगलादेश भेजा जाना था। बताया जाता है कि पशु तस्करी के वाहनों को हर थाना क्षेत्र से पार कराने वाले गिरोह सक्रिय हैं जो स्थानीय पुलिस से सांठगांठ कर खुलेआम पशु लाद वाहनों को पार कराने का काम करते हैं। हद तो यह है कि कई बार खुलेआम उन वाहनों को थाने के सामने रोक कर उनसे वसूली की जाती है।

बताया जाता है कि पशु तस्करों द्वारा कोसी के विभिन्न हाटों से पहले मवेशियों को लाकर बायसी थाना क्षेत्र के कई स्थानों पर जुटाया जाता है फिर उन्हें बड़े कंटेनरों में या ट्रकों पर भरकर बंगाल के रास्ते बंगलादेश सीमा पर ले जाया जाता है जहां से उसे बंगलादेश भेजा जाता है। पूर्णिया के बायसी थाने में एक दर्जन से अधिक ऐसे ठिकाने हैं जहां से हर रोज पशु तस्करों के पशु लदे वाहन खुलते है। यह सब खुलेआम होता है लेकिन इसे देखने तक की किसी को फुर्सत नहीं है।

कोसी एवं पूर्णिया प्रमंडल के जिलों में सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, कटिहार, अररिया एवं पूर्णिया में दो दर्जन से ज्यादा स्थानों पर हाट लगती है। इन हाटों में पशु तस्कर सक्रिय रहते हैं तथा यहां से पशुओं की खरीदारी कर सीधे बंगाल के सीमावर्ती स्थानों तक ले जाते हैं। इन मवेशी हाटों में पशु तस्कर के एजेंट सक्रिय रहते हैं जो पशुओं की खरीदारी करने का काम करते हैं। इसके अलावा कई हाटों से खरीदे गये पशुओं को सड़क के रास्ते पैदल ही बंगाल की सीमा तक तस्करों द्वारा पहुंचाया जाता है। पशु तस्करी के लिए जिन वाहनों का उपयोग किया जाता है उसमें क्षमता से अधिक पशुओं को लोड किया जाता है। जिस कारण कई बार कई पशुओं की रास्ते में ही दबकर मौत हो जाती है। पशु तस्करों द्वारा पशु लदे वाहनों को बायसी थाना होते हुए दालकोला चेक पोस्ट पार कराया जाता है और फिर टुन्नीदीघी होते हुए बांग्लादेश सीमा तक भेज दिया जाता है।

पशु तस्करों द्वारा पशुओं को बायसी थाना के बकहरिया, दालकोला, खपड़ा पंचायत, पुरानागंज के विभिन्न ठिकनों पर लाकर रखा जाता है।

बायसी के बकहरिया एवं दालकोला में मवेशी रखने के करीब आधा दर्जन ठिकाने है। इन ठिकानों को पशु तस्करों द्वारा इस तरह बनाया गया है कि आस पास से गुजरने वाले लोगों की भी उस पर नजर नहीं पड़े। बड़े वाहनों पर पशुओं को लोड करने के लिए इन ठिकानों पर मिट्टी भरकर टीलानुमा बना दिया जाता है ताकि मवेशियों को बड़े वाहनों पर आसानी से चढ़ाया जा सके। वाहन पर पशु लदे हैं इसे कोई नहीं समझ सके इसके लिए पशु तस्कर चार पहिया वाहन ढ़ोने वाले कंटेनर का उपयोग करते है जिसका छत खुला रहता है। पशु तस्कर पशुओं को इसमें क्षमता से अधिक पशुओं को लादकर ताला लगा दिया जाता है। बताया जाता है कि पशु तस्करी द्वारा तस्करी के लिये ले जाए जा रहे पशु वाहन में बैठ ना जाएं इसके लिए उनकी आंखों में मिर्च पाउडर तक का छिड़काव किया जाता है।

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बायसी थाना क्षेत्र में बने हुए पशु तस्करी के कई ठिकाने

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पूर्णिया: बायसी थाना क्षेत्र में पशु तस्करी के एक दर्जन ठिकाने बने हुए हैं जहां हर दिन पशु तस्करों द्वारा तस्करी के लिए पशुओं को लाया जाता है और फिर उन्हें बंगलादेश भेजा जाता है। कई ठिकाने तो सड़क किनारे खुलेआम संचालित किए जा रहे हैं लेकिन इस ओर झांकने तक की किसी को फुर्सत नहीं है। कुछ वर्ष पूर्व किशनगंज के पूर्व एसपी रंजीत कुमार मिश्रा द्वारा पशु तस्करी रोकने को लेकर कई कड़े कदम उठाए गये थे जिससे इस पर रोक भी लगी थी लेकिन बाद में सब कुछ सामान्य हो गया।

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कोट के लिये

पशु तस्करी पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए सभी सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है। इसके बाद उन थानों को चिन्हित करने का भी निर्देश दिया गया है जिस रास्ते पशुओं की तस्करी हो रही है। पशु तस्करी में अगर किसी थाने की संलिप्तता पाई जायेगी तो इसके लिए दोषी पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पकंज दराद, आईजी, दरभंगा प्रक्षेत्र।

Posted By: Jagran

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