पूर्णिया। सीमांचल में पशु तस्करी की आड़ में बड़े पैमाने पर काला धन को खपाया जा रहा है। पशु तस्करी में लगने वाले पैसे का कोई हिसाब-किताब नहीं होता है और न ही इस पर कोई टैक्स भरना पड़ता है। यह पूरी तरह से काला धन को खपाने का एक जरिया भी है। उक्त बातें एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की नीलू गुप्ता ने मंगलवार को एक होटल में प्रेसवार्ता के दौरान कही। उन्होंने कहा कि इस तस्करी में करोड़ों इन्वेस्ट है। यह काला धन को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि एक खबर आई थी कि बांगलादेश के बोर्डर पर एक बीएसफ ऑफिसर 50 लाख के साथ पकड़े गए थे। जो निश्चित रूप से बोर्डर पर मवेशी तस्करी के एवज में दिया गया पैसा हो सकता है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि इन मवेशी लदे ट्रकों के साथ क्या-क्या जा रहा है एवं क्या-क्या आ रहा है, यह जांच का विषय है। ऐसा भी तो हो सकता है कि इनके मार्फत नकली नोट एवं हथियार भी आ रहा हो।

नीलू गुप्ता ने बताया कि पूर्णिया एवं आस-पास के क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग दो हजार मवेशियों की तस्करी हो रही है। इसमें काफी पूंजी इन्वेंस्ट होता है। इस कारोबार में ट्रक चालकों को भी मुंहमांगा पैसा दिया जाता है। ताकि तस्करी का सामान गंतव्य तक पहुंच सके। अधिक पैसे की लोभ में ही ट्रक चालक इसमें फंसते हैं। एक ट्रक पर छह की जगह 30 से 32 पशुओं को लादा जाता है। आखिर क्या कारण है कि हाइवे पर इन ट्रकों के गुजरने पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। सवाल उठाया कि आखिर वे बेरोक-टोक कैसे निकलते जाते हैं। यदि पुलिस प्रशासन का सहयोग मिले तो इस पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सकती है।

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