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गांधी मैदान के बाद अब कर्तव्य पथ पर दिखेगी 'मखाना' की धमक, लाल किला पर दिखेगा बिहार का दम

Published: Sat, 24 Jan 2026 03:32 PM (IST)

मखाना की चमक दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में दिखेगी। बिहार की मखाना झांकी में इसकी ...और पढ़ें

गणतंत्र दिवस पर बिहार की मखाना झांकी। (जागरण)

गणतंत्र दिवस पर बिहार की मखाना झांकी। (जागरण)

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मनोज कुमार, पूर्णिया। सीमांचल-मिथिलांचल में उजला सोना के रूप में ख्याति प्राप्त मखाना की चमक और बढ़ने वाली है। पहले पटना के गांधी मैदान में गत गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह की झांकी में जगह बनाने वाला मखाना इस बार दिल्ली में अपनी धमक दिखाएगा।

77 वें गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाले समारोह में बिहार के मखाना की झांकी को भी स्थान मिला है। इससे सीमांचल के मखाना किसानों एवं उद्यमियों में खासा उत्साह है।

दिल्ली में निकलने वाली झांकी में सुपर फूड मखाना की खेती से लेकर इसके प्रोसेसिंग तक की झलक दिखायी जाएगी। इससे देश-विदेशों में इसकी चमक और बढ़ेगी। इसका सीधा लाभ यहां के किसानों और उद्यमियों को मिलेगा।

मखाना अनुसंधान केंद्र, भोला पासवान शास्त्री कृषि कॉलेज के निदेशक सह कृषि विज्ञानी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि राजधानी में निकलने वाली झांकी में शामिल होने से इसकी ब्रांडिंग होगी तथा पोषण से भरपूर इस सुपर फूड के प्रति लोगों में उत्सुकता बढ़ेगी।

इसका सीधा लाभ मखाना उत्पादकों एवं उद्यमियों को मिलेगा। इससे गैर पारंपरिक वाले राज्यों में मखाना की खेती का विस्तार होगा।

झांकी का विषय: मखाना लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड

विभागीय अधिकारी से मिली जानकारी अनुसार दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित समारोह की झांकी में बिहार से मखाना को शामिल किया गया है। झांकी का विषय रखा गया है मखाना लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड।

झांकी में सीमांचल-मिथिलांचल के तालाबों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बनाने वाले मखाना की पूरी यात्रा को सजीव रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। झांकी में मखाना की परंपरागत खेती, प्रसंस्करण, भुनाई, फोडाई और पैकेजिंग की प्रक्रिया को दर्शाया जाएगा।

यह झांकी बताएगी कि कैसे बिहार का पारंपरिक कृषि उत्पाद आज पोषण समृद्ध सुपरफूड के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। जीआई टैग मिलने के बाद मखाना अमेरिका, यूरोप, यूएई जैसे समृद्ध देशों में धूम मचा रहा है।

पूर्णिया से होता है सबसे अधिक मखाना का कारोबार

पूर्णिया सहित सीमांचल-मिथिलांचल में मखाना का उत्पादन सबसे अधिक होता है। सीमांचल व मिथिलांचल एवं आसपास के 10 जिलों में देश के कुल उत्पादन का 90 फीसद मखाना का उपज होता है।

पूर्णिया मखाना उद्योग का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग और वैश्विक व्यापार तक सब कुछ होता है। पूर्णिया बिहार के मखाना उत्पादन और व्यापार का प्रमुख केंद्र है। पूर्णिया का हरदा मंडी मखाना का राज्य की सबसे बड़ी मंडी है और अंतरराष्ट्रीय खरीदार भी यहां आते हैं। इतना ही नहीं हरदा मंडी से ही पूरे देश में मखाने की दरें तय होती हैं।

हरदा मंडी में मखाना की 100 से अधिक मखाना फैक्ट्रियां हैं जहां देश विदेश के काराेबारी खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। यहां से मखाना अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में निर्यात किया जाता है।

अब जबकि गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजधानी दिल्ली में मखाना की चमक बिखरेगी तो यहां के किसानों, उद्यमियों और कारोबारियों के चेहरे भी चमकेंगे।

इससे पहले पटना के गांधी मैदान में गणतंत्र दिवस पर पूर्णिया के मखाना की झांकी निकाली गई थी। अब दिल्ली में निकलने वाली झांकी से उत्पादक से लेकर उद्यमी तक उत्साहित हैं।