प्रकाश वत्स, पूर्णिया: 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में रुपौली थाना क्षेत्र के जिन गांवों के सेनानियों की अहम भूमिका रही थी, उसमें एक गांव झलारी भी था। गांव के सेनानी श्रवण सिंह व राजेंद्र सिंह की थाने को जलाने में अहम भूमिका रही थी और इस कारण दोनों को जेल भी जाना पड़ा था। इस गांव ने रुपौली को विधायक भी दिया है और यहां के कवि मधुकर गंगाधर की ख्याति राष्ट्रीय स्तर पर भी रही है। सुंदर अतीत वाला यह गांव अब नटवरलाल की पाठशाला के कारण चर्चा में है। इस गांव से एटीएम कार्ड बदलकर लोगों के खाते से रुपये उड़ाने वाले बड़े गिरोह का संचालन हो रहा है। दूसरे जिलों के युवकों को यहां बुलाकर इस काम का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

दिल्ली से लौटे युवक ने कोसी-सीमांचल में खड़ा किया गिरोह

ग्रामीण बताते हैं कि एटीएम कार्ड बदलने वाले गिरोह को छोड़ दिया जाए तो इस गांव का कभी अपराध से कोई खास नाता नहीं रहा है। पुलिस के अनुसार दिल्ली व मुंबई में कार्य करने वाला गांव का युवक राजेश कुमार सिंह उर्फ राजीव कुमार सिंह तकरीबन चार साल पूर्व लौट कर गांव आया और इस तरह का गिरोह खड़ा कर दिया। उसने पहले गांव के कुछ युवकों को इस अपराध का प्रशिक्षण देकर कुछ घटनाओं को अंजाम दिया। इसके बाद इस गिरोह का संजाल बढ़ाते हुए रुपौली, बिरौली, बड़हरी, डूमरा, कसमरा के साथ-साथ अररिया, मधेपुरा व खगड़िया के युवकों को भी गिरोह में शामिल कर लगातार कई वारदातों को अंजाम देता रहा।

गिरफ्तारी के बाद खुलासा, सीएसपी से भी जुड़े तार

कुछ माह पूर्व पूर्णिया पुलिस ने गिरोह के सरगना राजीव कुमार सिंह के साथ-साथ आधा दर्जन सदस्यों को गिरफ्तार किया था। इस गिरोह के पास से काफी संख्या में विभिन्न बैंकों के एटीएम कार्ड भी बरामद किए गए थे। उस दौरान भी पूछताछ में राजीव सिंह ने इसका खुलासा किया था। दो दिन पूर्व इसी गांव के दुष्यंत कुमार सिंह व रमण कुमार सिंह को सरसी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों के पास से कुल 115 एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। मधेपुरा, पूर्णिया सहित कई जिलों में इस गिरोह के सदस्यों की गिरफ्तारी हुई है। सभी के तार झलारी गांव से ही जुड़े हैं। पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि इसमें कई सीएसपी संचालकों की भी सहभागिता है।

पिन नंबर लिखने के लिए लेजर पेन का इस्तेमाल

इस गिरोह के द्वारा बेहद ही शातिराना अंदाज में पूरी वारदात को अंजाम दिया जाता है। पुलिस गिरफ्त में आए गिरोह के सदस्यों ने बताया कि वे लोग एटीएम के आस-पास नजर रखते हैं। महिला व गांव के भोले-भाले ग्राहकों पर नजर पड़ते ही वे लोग भी कतार में लग जाते हैं। ऐसे लोगों द्वारा मदद मांगने पर हाथ की सफाई से उनका एटीएम कार्ड बदल लेते हैं और दूसरे साथी लेजर पेन से अपने हाथ आदि पर उनका पिन नंबर लिख लेते हैं। इस तरह लिखे गए पिन को सिर्फ लेजर लाइट से ही देखा जा सकता है।

"रुपौली थाना क्षेत्र का झलारी गांव एटीएम कार्ड बदल खाते से रुपये उड़ाने वाले गिरोह का बड़ा बसेरा बन गया है। गिरोह का कनेक्शन कोसी व सीमांचल के कई जिलों से है। गिरोह का संचालन उक्त गांव से हो रहा है।"

-एसके सरोज, एसडीपीओ, पूर्णिया सदर

Edited By: Ashish Pandey

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