Waqf Board: वक्फ बोर्ड की आड़ में PFI का क्लोन तैयार करने की कोशिश, गृह मंत्रालय ने किया अलर्ट
वक्फ बोर्ड पर नए कानून के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ा है और राष्ट्र विरोधी तत्व इसका लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रतिबंधित पीएफआई का क्लोन तैयार करने की कोशिश हो रही है जिसमें खास समुदाय के सामाजिक संगठनों को माध्यम बनाया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने खुफिया एजेंसियों को सतर्क किया है और पीएफआई के पूर्व सचिव महबूब आलम की तलाश तेज कर दी गई है।

प्रकाश वत्स, पूर्णिया। वक्फ बोर्ड पर नये कानून बनने के बाद केवल राजनीतिक तापमान ही नहीं बढ़ा है बल्कि इस माहौल का लाभ उठाने की जुगत में राष्ट्र विरोधी तत्व भी जुट गए हैं। इसी कड़ी में महज दो साल पूर्व प्रतिबंधित पोपुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआइ) का क्लोन तैयार करने की कोशिश भी शुरु हो गई है।
इसके लिए एक खास समुदाय कुछ सामाजिक संगठनों को माध्यम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस मामले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा खुफिया एजेंसियों को सतर्क किया गया है। इस निर्देश के बाद भूमिगत पीएफआइ के उत्तर व मध्य बिहार के पूर्व सचिव सह कटिहार जिला निवासी महबूब आलम की तलाश भी तेज कर दी गई है।
कानून पर भ्रांतियां फैला नया संगठन खड़ा करने का प्रयास
पश्चिम बंगाल से सटे सीमांचल के इलाके में पीएफआइ की गहरी पैठ हो चुकी थी। दो साल पूर्व पटना में छापेमारी के दौरान संदिग्ध दस्तावेज व संगठन के कुछ बड़े चेहरे की गिरफ्तारी के बाद इसका खुलासा हुआ था। बाद में एनआइए की टीम ने पीएफआइ के पूर्णिया स्थित कार्यालय सहित कटिहार व अररिया में भी कई बार छापेमारी की थी।
इस दौरान अररिया व कटिहार से संगठन के तीन सक्रिय सदस्यों की गिरफ्तारी भी हुई थी। यद्यपि इस परिक्षेत्र में संगठन को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाने वाले जेएनयू के छात्र रहे कटिहार के महबूब आलम की गिरफ्तारी संभव नहीं हो पायी थी।
यह चर्चा आम थी कि महबूब आलम पश्चिम बंगाल में कहीं शरण लिया है और संगठन पर प्रतिबंध के बावजूद सदस्यों से उसका संपर्क कायम रहा है। अब वक्फ बोर्ड पर नये कानून बनने के बाद मचे राजनीतिक घमासान के बीच इस माहौल को भुनाने की फिराक में महबूब आलम सहित संगठन के अन्य वैसे चेहरे, जो खुफिया विभाग की निगाहों से दूर रह गए थे, सक्रिय हो गए हैं।
वे कुछ सामाजिक संगठनों की आड़ लेकर लोगों के बीच कानून पर भ्रांतियां पैदा कर नये छद्म संगठन को खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।
सन 2012 में हो चुकी थी सीमांचल में पीएफआइ की इंट्री
पूर्व में प्रतिबंधित संगठन सिमी की क्लोन माने जाने वाली पीएफआइ का गठन वर्ष 2007 में हुआ था। पूर्व में इसका दायरा दक्षिण भारत तक ही सीमित था। वर्ष 2012 में सीमांचल में इसकी पहली इंट्री हुई थी। जेएनयू के छात्र रहे महबूब आलम, आफताब आलम, अफसर पासा, उस्मान गनी व गुलाम सरवर आदि ने यहां संगठन की नींव डाली थी।
लोगों की नजर में पीएफआइ पहली बार तब सामने आया जब 2011 में दिसंबर के अंतिम सप्ताह व वर्ष 2012 के जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में अचानक अररिया शहर के चौक-चौराहों पर इसका पोस्टर लगा। बाद में इसका फैलाव सीमांचल के साथ-साथ कोसी के जिलों सहित बिहार के अन्य जिलो में हुआ।
कालांतर में देश विरोधी गतिविधियों में सीधे संलिप्तता के साक्ष्य मिलने पर दो साल पूर्व केंद्र सरकार द्वारा इसे प्रतिबंधित किया गया।

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