पटना, एसए शाद। केंद्र की एनडीए सरकार में मंत्री रहते हुए घटक दल जदयू पर हमला और भाजपा के राम मंदिर पर स्टैंड के विरोध पर विधिवत पार्टी की मीटिंग में मुहर के बाद अब स्पष्ट है कि रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा जल्द ही एनडीए से नाता तोड़ लेंगे।

परन्तु, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि उपेंद्र कुशवाहा खुद केंद्रीय मंत्रिमंडल से अलग नहीं होंगे। वह उस समय तक मंत्रिमंडल का हिस्सा बने रहेंगे जबतक कि प्रधानमंत्री उन्हें खुद हटा न दें।

तब वह राज्य में नीतीश सरकार की विफलता और भाजपा के राम मंदिर पर स्टैंड को राजनीतिक मुद्दा बनाकर जनता के बीच जाएंगे, और खुद को सिद्धांत एवं नीतियों से समझौता नहीं करने वाले नेता के रूप में पेश करेंगे। किन समूहों के बीच मुख्य रूप से जनसंपर्क चलेगा उसे भी स्पष्ट किया गया है।

नीतीश पर तल्ख हुए कुशवाहा के तेवर 

वाल्मिकीनगर में दो दिवसीय चिंतन शिविर के अंतिम दिन लिए गए संकल्प रालोसपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा के तेवर से भी तीखे रहे। उन्होंने नीतीश कुमार पर अपना हमला जारी रखा और एनडीए का हिस्सा रहने के बावजूद नीतीश सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प ले लिया। पार्टी द्वारा पारित चार पृष्ठों के प्रस्ताव में उन्होंने अपनी आगे की रणनीति यह कह और स्पष्ट कर दी कि मंदिर-मस्जिद बनवाना राजनीतिक दलों का काम नहीं है। 

इनमें किसान, नौजवान, पिछड़े, अतिपिछड़े, दलित-महादलित एवं अल्पसंख्यक शालिम हैं। चिंतन शिविर में पारित प्रस्ताव में नीतीश कुमार के 'तीन सी'(क्राइम, कम्युनलिज्म और करप्शन) से किसी भी हाल में समझौता नहीं करने के दावे पर तीखा प्रहार किया गया है।

क्राइम की चर्चा करते हुए राज्य की बिगड़ी विधि व्यवस्था और कम्युनलिज्म की चर्चा करते हुए कहा गया है कि नीतीश सरकार ने सांप्रदायिक शक्तियों के सामने घुटने टेक दिए हैं। वहीं करप्शन का नाम लेते हुए कई घोटालों, मंत्री के जेल जाने आदि का जिक्र किया गया है।

प्रस्ताव के ये वाक्य अधिक चौंकाने वाले हैं-'केंद्र सरकार और भाजपा द्वारा हाल के दिनों में लिए गए कई आपत्तिजनक व अनावश्यक निर्णयों पर रालोसपा गंभीर चिंता व्यक्त करती है। देश में उचित ढंग से कहीं भी मंदिर-मस्जिद बनाने के हम विरोधी नहीं है। ऐसे कामें में राजनीतिक दलों का हस्तक्षेप समाज में विवाद व तनाव पैदा करता है। 

 

Posted By: Kajal Kumari