पटना, जागरण संवाददाता।  मधुमेह के बाद अब हमारा देश हृदय रोगियों की राजधानी बनने की ओर अग्रसर है। देश की 14 प्रतिशत शहरी और 8 प्रतिशत ग्रामीण आबादी हृदय संबंधी रोगों से जूझ रही है। अस्पतालों में भर्ती होने वाले 33 प्रतिशत मरीजों की मौत हृदय संबंधी रोगों के कारण होती है जो कि ट्रामा-इमरजेंसी के बराबर है। गत दो वर्ष में हृदय संबंधी रोगों से मौतों की संख्या 30 प्रतिशत तक बढ़ी है। नेशनल सेंटर फार बायोटेक्नोलाजी इंफार्मेशन (एनसीबीआइ) के अनुसार देश में हर वर्ष लगभग 30 लाख लोगों की मौत कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक से होती है। बांबे म्युनिसिपल कारपोरेशन के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से जून 2020 के बीच हृदय रोगों से 2816 लोगों की मौत हुई थी। वहीं 2021 में जनवरी से जून के बीच 17 हजार 880 लोगों की मौत हुई। छह माह में 634 प्रतिशत की वृद्धि इस गैर संक्रामक रोग के महामारी बनने का संकेत है। यदि समाज और सरकार ने संयुक्त प्रयास नहीं किए तो हालात तेजी से बेकाबू होते जाएंगे। 

विशेषज्ञों ने बताया, किस तरह बढ़ रहा हृदय रोग का खतरा

विश्‍व हृदय दिवस की पूर्व संध्या पर बुधवार को कार्डियोलाजी सोसायटी आफ इंडिया की बिहार शाखा की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में ये बातें सोसायटी के अध्यक्ष डा. एके झा, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में हृदय रोग के विभागाध्यक्ष डा. बीपी सिंह, इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान के पूर्व निदेशक डा. एसएस चटर्जी, कार्डियक सर्जन डा. संदीप कुमार, पीएमसीएच के डा. अशोक कुमार, फोर्ड हार्ट हास्पिटल के डा. बीबी भारती, मेदांता हार्ट हास्पिटल के डा. अजय कुमार सिन्हा, डा. बसंत सिंह, डा. अरविंद कुमार, डा. नसर अब्दाली आदि ने कहीं। 

17 वर्ष के किशोर पहुंच रहे अस्पताल 

डा. बीपी सिंह ने बताया कि ला कालेज का एक 17 वर्षीय किशोर गंभीर हृदयाघात लेकर आया था। बड़ी संख्या में किशोर और युवा हृदय रोग की चपेट में आ रहे हैं। वहीं डा. संदीप कुमार ने कहा कि अधिक तला-भुना व गलत खानपान के कारण 5 से 10 वर्ष की उम्र में ही हृदय रोग की नींव पड़ जाती है। खानपान व रहन-सहन में बदलाव के कारण एक ओर यूरोप में हृदय रोग घट रहा है तो हमारे देश में बच्चे तक हृदयाघात के शिकार हो रहे हैं। 

मधुमेह रोगियों को नहीं हो पाती हृदयाघात की जानकारी

डा. एके झा ने कहा कि देश की बड़ी आबादी मधुमेह से पीड़‍ित है। इनमें से जितने लोगों को जब मधुमेह की जानकारी हुई, वे हृदय रोग की चपेट में आ चुके थे। शेष 50 प्रतिशत को इसकी जानकारी नहीं होती। उन्होंने कहा कि मधुमेह से रक्त नलिका कमजोर हो जाती है और नसों में दर्द संवेदना समाप्त हो जाती है। ऐसे में हार्ट अटैक आने पर 50 प्रतिशत लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं होती है। इनमें से 25 प्रतिशत लोगों की अचानक मौत होती है। जीवनशैली में सुधार कर 90 प्रतिशत मामलों में मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है।  

हाइपरटेंशन से बचाव को खानपान में सुधार जरूरी

डा. एसएस चटर्जी ने कहा कि दुनिया में 128 करोड़ लोग बीपी या हाइपरटेंशन से पीड़‍ित हैं। देश में 22 करोड़ लोग इसकी चपेट में है, जिससे उन्हें न केवल हृदय बल्कि किडनी, आंख की रोशनी समेत तमाम तरह के रोग घेर लेते हैं। ऐसे में हर व्यक्ति को घर में बीपी मशीन रखकर बीच-बीच में जांच करनी चाहिए। पांच-पांच मिनट के अंतराल में तीन बार जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि बीपी 130 बाई 85 से कम रहे। 5 से 6 मिलीमीटर बीपी अधिक फल-सब्जी, होल ग्रेन जैसे ब्राउन राइस, गेहूं, बार्ली, ओट्स, मेज, पापकार्न, मिलेट, दूध व डेयरी प्रोडक्ट के अलावा आलिव आयल, समुद्री मछली व रेड वाइन के सेवन से कम किया जा सकता है। 

हृदयाघात के बहुत से कारण अब भी अंजान 

वक्ताओं ने कहा कि हृदयाघात के बढऩे के तमाम कारण हैं। प्रदूषण से सम्बद्धता सिद्ध हो चुकी है। आने वाले समय में खान-पान में कीटनाशक, खाद व प्रिजर्वेटिव के बढ़ता इस्तेमाल भी एक कारण साबित हो सकता है। जेनेटिक कारणों की तलाश जारी है। बावजूद इसके अभी हम 10 प्रतिशत कारण ही खोज पाए हैं। 

ऐसे स्वस्थ रहेगा आपका दिल 

  • संतुलित भोजन खाएं जिसमें हरी सब्जियां, फल, सलाद का ज्यादा हो।
  • भोजन बनाने में तेल का कम इस्तेमाल करें, धूम्रपान-शराब से दूरी बनाएं।
  • ब्लड प्रेशर को 130/85 एमएम एचजी तक रखने की कोशिश करें। 
  • ब्लड शुगर और कोलेस्ट्राल को नियंत्रित रखें। नियमित व्यायाम करें। 
  • मेडिटेशन-योग करें, वजन नहीं बढऩे दें। खुश और तनाव मुक्त रहें।
  • अच्छी और भरपूर नींद लें। पसंद की चीजें करें और शौक पूरे करें। 
  • समय-समय पर दिल की जांच कराते रहें। जंक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें। 

Edited By: Vyas Chandra

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