पटना : महिलाओं को अधिकार मिला, लेकिन वे अपने अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं। महिला मुखिया, जिला परिषद सदस्य या प्रमुख के अधिकारों का इस्तेमाल उनके पति कर रहे हैं। लड़कियों को शिक्षा हासिल कर सशक्त होना होगा। उन्हें अपने अधिकारों का खुद इस्तेमाल करना होगा। ये बातें बुधवार को मगध महिला दिवस के स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन करने के बाद शिक्षामंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने कहीं।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में शिक्षा चौपाल का आयोजन किया जाएगा। लोगों के साथ शिक्षा पर चर्चा होगी। महिला कॉलेजों की खराब वित्तीय हालत पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। लड़कियों की मुफ्त शिक्षा से कॉलेजों को जो आर्थिक नुकसान हुआ है, उतनी राशि मिलनी ही चाहिए। साथ ही बिजली भुगतान को लेकर भी विभाग में चर्चा की जा रही है।

: सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति :

स्थापना दिवस के मौके पर छात्राओं ने आकर्षक रंगारंग कार्यक्रम भी पेश किए। शुरुआत हुई गणेश वंदना नृत्य से। इसके बाद संगीत विभाग की छात्राओं ने समूह गायन पेश किया। छात्राओं ने गरबा पेश कर यह भी अहसास दिला दिया कि नवरात्र नजदीक आ चुका है। इसके बाद छात्राओं के एक समूह ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आम जीवन में महिलाओं के साथ हो रहे दु‌र्व्यवहार और भेदभाव को दिखाया। कार्यक्रमों को मौसमी, अनुष्का, जया, आयुषी, रिचा, दृष्टि, पूजा, संजू, बबीता, आरिया आदि ने पेश किया।

: लड़कियों को आगे बढ़ाने में कॉलेज का अहम योगदान :

समारोह में पटना विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रास बिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि लड़कियों को आगे बढ़ाने में मगध महिला कॉलेज का अहम योगदान रहा है। इस कॉलेज ने लड़कियों को रसोई से निकालकर उन्हें प्रगति के पथ पर बढ़ना सिखाया। यहां से निकली छात्राओं ने हर क्षेत्र में परचम लहराया। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि को दरकिनार कर प्रतिभा के दम पर अपनी पहचान बनाएं। प्रति-कुलपति और मगध महिला कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉ. डॉली सिन्हा ने कहा कि इस कॉलेज से उनका गहरा रिश्ता रहा है। उनके कार्यकाल में कॉलेज को नैक से 'ए' ग्रेड मिला था। इस बार 'ए प्लस' मिलने की उम्मीद है। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. धर्मशीला प्रसाद ने अतिथियों का स्वागत किया। वनस्पति विज्ञान की शिक्षक प्रो. पुष्पांजलि ने कार्यक्रम का संचालन किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अरुणा चौधरी ने किया। मौके पर पीयू के डीएसडब्ल्यू डॉ. एनके झा, शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. रणधीर कुमार, बीएन कॉलेज के प्राचार्य प्रो. राजकिशोर प्रसाद, कॉलेज की सभी विभागाध्यक्ष, शिक्षक और छात्राएं मौजूद थीं।

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: बांकीपुर ग‌र्ल्स हाई स्कूल से शुरुआत :

इस कॉलेज के जन्म की कहानी बांकीपुर ग‌र्ल्स हाई स्कूल से जुड़ी हुई है। जुलाई 1938 में आइए की पढ़ाई के साथ इसकी शुरुआत मानी जा सकती है। 26 जून 1946 को उस स्कूल से आइए की छात्राओं को एक अलग पुराने भवन में पढ़ाने की व्यवस्था की गई। नाम अधिसूचित किया गया 'गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज फॉर वीमेन'। यही तिथि कॉलेज की स्थापना की मानी जाती है। स्थापना के साथ यहां बीए की कक्षाएं भी शुरू की गई। तब कार्यकारी प्राचार्य थीं ओसी रिच‌र्ड्स। 26 अप्रैल 1947 को रमोला नंदी प्राचार्य नियुक्त हुई। वर्तमान नाम यानी मगध महिला कॉलेज नाम मिला 26 जुलाई 1949 को। इस नाम से तब के शिक्षा सचिव जगदीश चंद्र माथुर ने अधिसूचित किया। कॉलेज की प्रतिष्ठा और कोर्स का दायरा बढ़ता रहा। 1960 के दशक से स्नातक ऑनर्स स्तर की पढ़ाई होने लगी। 1984-85 से स्नातकोत्तर की कक्षाएं भी शुरू हो गई। अभी यहां कॉमर्स, कंप्यूटर विज्ञान, बीबीए समेत कई व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई भी हो रही है। नैक से 'ए' ग्रेड हासिल करने के बाद कॉलेज की प्रतिष्ठा और भी बढ़ी। अभी सबसे बड़ी समस्या शिक्षकों- कर्मियों की किल्लत और आर्थिक परेशानी है।

Posted By: Jagran

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