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बिहार में ही उद्योग क्यों लगा रहे कारोबारी? नोएडा से मुजफ्फरपुर तक निवेशकों ने बताई वजह

Published: Fri, 09 Oct 2026 01:12 PM (GMT+05:30)

बिहार में औद्योगिक निवेश और विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार हो रहा है, जहां उद्यमी किफायती जमीन, श्रमिकों की उपलब्धता और सरकारी सहयोग के कारण आकर्षित हो रहे हैं।

HighLights

  1. किफायती जमीन, श्रमिक उपलब्धता बिहार में निवेश के मुख्य कारण।

  2. गौरव भाटिया, अंशु कुमार मुजफ्फरपुर में औद्योगिक इकाइयां स्थापित कर रहे।

  3. नई इकाइयों से स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार, बढ़ेगा विनिर्माण।

डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार में औद्योगिक निवेश और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार को लेकर नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। किफायती जमीन, श्रमिकों की उपलब्धता और सरकारी सहयोग जैसे पहलू उद्यमियों को राज्य में उद्योग स्थापित करने के लिए आकर्षित कर रहे हैं।

नोएडा में कारोबार कर रहे Dev Handicrafts के गौरव भाटिया से लेकर Avyam Construction Pvt. Ltd. के अंशु कुमार तक, उद्यमियों की निवेश योजनाएं बिहार में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की तस्वीर पेश करती हैं।

जहां पहले बिहार में औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर चर्चा होती थी, वहीं अब निवेश और रोजगार से जुड़ी योजनाएं आकार ले रही हैं।

बेहतर होती औद्योगिक सुविधाओं और निवेश के लिए विकसित किए जा रहे इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच उद्यमी राज्य में अपनी विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

गौरव भाटिया और अंशु कुमार ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि बिहार उनके लिए निवेश का विकल्प क्यों बना।

नोएडा छोड़ बिहार क्यों पहुंचे गौरव भाटिया?

Dev Handicrafts के गौरव भाटिया नोएडा में पहले से अपना व्यवसाय चला रहे थे। अब कारोबार के विस्तार के लिए उन्होंने बिहार का रुख किया है।

प्लग एंड प्ले शेड के लिए आवेदन करने के बाद उन्हें मुजफ्फरपुर के मेगा लेदर एवं फुटवियर पार्क में जगह आवंटित की गई है।

बिहार को निवेश के लिए चुनने की वजह बताते हुए गौरव भाटिया कहते हैं कि श्रमिकों की उपलब्धता और जमीन की कम लागत उनके फैसले के प्रमुख कारण हैं।

उनके मुताबिक, बिहार में जमीन की कीमत नोएडा के मुकाबले काफी किफायती है। वह कहते हैं, “जिस कीमत पर यहां जमीन मिल रही है, उतनी कीमत में शायद नोएडा में हमें एक बेडरूम भी नहीं मिले।”

जमीन आवंटन की प्रक्रिया को बताया आसान

गौरव भाटिया के अनुसार, बिहार में जमीन आवंटन की प्रक्रिया भी उन्हें सरल लगी। वह बताते हैं कि आवेदन के बाद संबंधित प्रक्रिया में उन्हें ज्यादा समय नहीं लगा। अधिकारियों की ओर से लगातार प्रोत्साहन और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहयोग का आश्वासन भी मिला है।

उनका कहना है कि पिछली बैठक में भी अधिकारियों ने प्लग एंड प्ले शेड से जुड़ी अतिरिक्त सहायता की जरूरत होने पर सहयोग देने की बात कही थी। गौरव के मुताबिक, इस तरह का सहयोग नए उद्योगों को स्थापित करने और कारोबार आगे बढ़ाने में मददगार हो सकता है।

स्थानीय युवाओं को घर के पास मिलेगा रोजगार

गौरव भाटिया के बिहार आने के फैसले के पीछे एक अहम वजह उनके कारखाने में काम करने वाले श्रमिक भी हैं। वह बताते हैं कि उनकी फैक्ट्री में काम करने वाले करीब 70 से 80 प्रतिशत कर्मचारी मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं।

वह चाहते हैं कि ये श्रमिक अपने गृह क्षेत्र में रहकर ही काम कर सकें और उत्पादन में योगदान दें। गौरव कहते हैं, “हम चाहते हैं कि ये सभी अपने घर वापस आएं और यहीं रहकर काम करें तथा उत्पादन करें। हम भारत के लिए काम कर रहे हैं और हमारा पूरा उत्पाद ‘मेड इन इंडिया’ है।”

कानून-व्यवस्था को लेकर आशंकाओं के बीच दिखीं नई संभावनाएं

गौरव भाटिया बताते हैं कि बिहार में निवेश करने से पहले कानून-व्यवस्था को लेकर उनके मन में आशंकाएं थीं। हालांकि, पिछले छह महीनों में राज्य के बारे में जानकारी जुटाने, खबरों पर नजर रखने और सरकारी योजनाओं को समझने के बाद उनका नजरिया बदला है।

उनके अनुसार, बिहार में गारमेंट और लेदर जैसे उद्योगों के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। वह राज्य में औद्योगिक विकास को लेकर मुख्यमंत्री के विजन को प्रभावी बताते हैं।

गौरव का मानना है कि यदि इसी दिशा में काम जारी रहा, तो औद्योगिक क्षेत्रों को सक्रिय करने की प्रक्रिया अपेक्षा से कम समय में आगे बढ़ सकती है।

मुजफ्फरपुर में कंटेनर निर्माण इकाई लगाएगी Avyam Construction

बिहार में निवेश की तैयारी कर रही कंपनियों में Avyam Construction Pvt. Ltd. भी शामिल है। कंपनी के अंशु कुमार मुजफ्फरपुर के बरियारपुर औद्योगिक क्षेत्र में कंटेनर निर्माण इकाई स्थापित करने जा रहे हैं।

अंशु कुमार के मुताबिक, उनकी कंपनी बिहार के समस्तीपुर जिले के पूसा में पंजीकृत है। कंटेनर निर्माण इकाई स्थापित करने के उद्देश्य से बिहार में आगे बढ़ने के दौरान उनका अनुभव अच्छा रहा है।

वह बताते हैं कि कंपनी को संबंधित अधिकारियों की ओर से भी सहयोग मिला है और उन्हें यहां अपनी विनिर्माण इकाई स्थापित होने की उम्मीद है।

नई इकाई से 150 से 200 लोगों को रोजगार की उम्मीद

अंशु कुमार के अनुसार, प्रस्तावित कंटेनर निर्माण इकाई से करीब 150 से 200 लोगों को रोजगार मिल सकता है। इनमें कुशल और अकुशल, दोनों श्रेणियों के कर्मचारी शामिल होंगे।

उनका कहना है कि कंपनी ऐसे कंटेनर बनाने की योजना पर काम कर रही है, जो गुणवत्ता और मानकों के लिहाज से वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।

इस इकाई के जरिए कंपनी बिहार में विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ाने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करना चाहती है।

बिहार में बनेंगे कंटेनर, विदेशी बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी

अंशु कुमार बताते हैं कि कंपनी बिहार में निर्मित कंटेनरों को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बेचना चाहती है। उनके अनुसार, दुबई, सिंगापुर और ओमान जैसे देशों में कंपनी का कारोबार नेटवर्क पहले से मौजूद है।

वह कहते हैं कि बिहार में उत्पादन शुरू होने के बाद यहां बने कंटेनरों को भारत और विदेशों के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने की योजना है। इससे राज्य में विनिर्माण के साथ निर्यात से जुड़ी गतिविधियों के विस्तार की भी संभावना बन सकती है।

निवेश से उद्योग और रोजगार को मिल सकती है नई गति

गौरव भाटिया और अंशु कुमार के अनुभव बिहार में निवेश के पीछे जमीन की लागत, श्रमिकों की उपलब्धता, प्रशासनिक सहयोग और बाजार तक पहुंच जैसे पहलुओं को सामने लाते हैं।

एक ओर लेदर और गारमेंट क्षेत्र में विस्तार की योजना है, तो दूसरी ओर कंटेनर निर्माण के जरिए विनिर्माण और संभावित निर्यात को बढ़ावा देने की तैयारी है।

राज्य में इन परियोजनाओं की प्रगति और इनके संचालन में आने के बाद मिलने वाले परिणाम यह तय करेंगे कि स्थानीय स्तर पर रोजगार, उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों को कितनी गति मिलती है।

फिलहाल, इन उद्यमियों की योजनाएं बिहार में उद्योग स्थापित करने को लेकर उभर रही संभावनाओं की एक झलक देती हैं।