पटना [राज्य ब्यूरो]। यह बिहार की बदहाल व्यवस्था का सटीक उदाहरण है। इंटरमीडिएट की परीक्षा में फिजिक्स जैसे विषय में फेल अभ्यर्थी विधि विज्ञान प्रयोगशाला में बैलेस्टिक एक्सपर्ट के रूप में वरीय वैज्ञानिक का काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं, जब यह मामला प्रकाश में आया तो अपराध अनुसंधान विभाग ने इसकी जांच भी कराई।

बिहार कर्मचारी चयन आयोग से सीआइडी द्वारा मंतव्य मांगा गया कि क्या किसी छात्र को इंटरमीडिएट की परीक्षा में फिजिक्स जैसे विषय में फेल होने के बाद उसे उत्तीर्ण घोषित किया जा सकता है। तब आयोग ने भी स्पष्ट किया कि नहीं, इंटर की परीक्षा में सभी पांचों विषय में उत्तीर्ण होना जरूरी है।

बता दें कि सीआइडी के अधीन विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) में वर्ष 2013 में हुई वरीय वैज्ञानिक पदाधिकारी व वरीय वैज्ञानिक सहायकों की संविदा पर हुई नियुक्ति में कई अनियमितताएं सामने आई हैं।

इसमें एक नाम संदीप सिंह का भी है। संदीप ने अपनी शैक्षणिक योग्यता के जो प्रमाण पेश किए हैं उसमें उन्हें वर्ष 2003 की सीबीएसई की इंटर परीक्षा में फिजिक्स विषय में अनुत्तीर्ण बताया गया है।

आयोग ने अपने मंतव्य में यह भी कहा कि यदि उक्त छात्र पूरक परीक्षा के माध्यम से फिजिक्स या किसी अन्य विषय की परीक्षा उत्तीर्ण कर लेता है तो उसे उत्तीर्ण माना जाएगा। लेकिन संदीप सिंह ने अबतक पूरक परीक्षा में फिजिक्स विषय में अपनी उत्तीर्णता का कोई प्रमाण नहीं दिया है लेकिन एफएसएल में बैलेस्टिक शाखा में अभी भी कार्यरत हैं।

यह मामला विगत वर्ष अक्टूबर माह में ही सीआइडी के अपर पुलिस महानिदेशक विनय कुमार के संज्ञान में आया था। तब उन्होंने सीआइडी के डीआइजी, एफएसएल के तत्कालीन निदेशक व अन्य अधिकारियों की एक कमेटी भी बनाई। बिहार कर्मचारी चयन आयोग से मंतव्य मांगा गया। आयोग ने अपना मंतव्य उपलब्ध करा दिया। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी।

सूत्र बताते हैं कि यह एफएसएल में हुई नियुक्तियों में अनियमितता का कोई पहला मामला नहीं है। ऐसे कई मामले हैं जिसकी जांच या तो चल रही है या जांच पूरी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

Posted By: Kajal Kumari

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