पटना, राज्य ब्यूरो। विधानसभा (Bihar Assembly) के नए सदस्य शराब न पीने की शपथ लेंगे या नहीं, अभी यह तय नहीं हुआ है। उधर विधान परिषद में नए सदस्यों से लिखित शपथ पत्र दाखिल करने का आग्रह किया जा रहा है। सरकार इस मुद्दे को विधानमंडल के विवेक पर छोड़ रही है। 26 नवम्बर को राज्य के सरकारी सेवकों को शराब न पीने की शपथ दिलाई गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) खुद इसकी अगुआई कर रहे थे। समारोह में मंत्री और अधिकारी भी थे। 

2016 में दोनों सदनों में लिया गया संकल्‍प  

मालूम हो कि वर्ष 2016 में शराबबंदी लागू होने के बाद दोनों सदनों के सदस्यों ने संकल्प लिया था कि वे खुद शराब नहीं पीएंगे। दूसरों को भी पीने से रोकेंगे। उस समय विधानमंडल की संरचना अलग थी।  सत्ता में शामिल भाजपा विपक्ष में थी। मुख्य विपक्षी दल राजद सत्ता में था। शराबबंदी का समर्थन सर्व सम्मति से हुआ था। 

फिर क्यों है शपथ की जरूरत

2020 के विधानसभा चुनाव में करीब डेढ़ सौ ऐसे विधायक हैं, जो पिछले विधानसभा में सदस्य नहीं थे। लगातार दूसरी बार जीते विधायकों को पिछले टर्म में ही शपथ दिला दी गई थी। संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि विधानमंडल दल के सदस्यों को शराबबंदी की शपथ दिलाना न दिला दोनों सदनों के क्रमश: अध्यक्ष और सभापति का कार्य क्षेत्र है। सरकार इसमें दखल नहीं देगी। अगर शपथ दिलायी जाती है तो यह सराहनीय कदम माना जाएगा। वैसे भी संविधान के निर्माताओं ने मादक पदार्थों के सेवन के निषेध की जिम्मेवारी सरकार को दी थी। मादक पदार्थों के सेवन का समर्थन करने वाले लोग समाज और संविधान के विरोधी हैं।

अभी इस आशय का प्रस्ताव नहीं: सिन्हा

विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने नए विधायकों को शराब न पीने की शपथ दिलाने के विचार को खारिज नहीं किया। लेकिन, इस नए सदस्यों को शपथ दिलाने के सवाल पर कहा-अभी ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। विधान परिषद के कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा-संविधान दिवस के दिन 26 नवम्बर को परिषद के अधिकारियों-कर्मचारियों ने शराब न पीने की शपथ ली। उसमें कुछ सदस्य भी शामिल थे। पूर्व में शपथ न ले पाए सदस्यों से हम शपथ पत्र भरपाएंगे। ये सदस्य हमारे कक्ष में आकर इसके भरेंगे। 

Edited By: Vyas Chandra