प्रभात रंजन, पटना। अशोक राजपथ पर बना पटना विश्वविद्यालय का व्हीलर सीनेट हॉल दशकों से विश्वविद्यालय ही नहीं, पूरे शहर की शान है। वक्त बीतने के साथ इस इमारत का रंग-रोगन बदला है, लेकिन इसका आकर्षण पूर्ववत है। यहां नवनिर्मित शताब्दी द्वार हॉल की गरिमा में चार-चांद लगाता है। इस हॉल के निर्माण की परिकल्पना पटना विश्वविद्यालय के पहले हिदुस्तानी वाइस चांसलर सैयद सुल्तान अहमद ने की थी। मुंगेर के राजा देवकीनंदन सिंह की मदद से कोलकाता के टाउन हॉल की तर्ज पर ग्रीक डोरिक शैली में तत्कालीन गवर्नर और चांसलर सर हेनरी व्हीलर के नाम पर व्हीलर सीनेट हॉल का निर्माण कराया गया था।

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पहले हिदुस्तानी वाइस चांसलर ने हॉल निर्माण को लेकर की थी परिकल्पना -

अशोक राजपथ स्थित पटना विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद व्हीलर सीनेट हॉल के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए इतिहास अध्येता अरुण सिंह बताते हैं कि तब दीक्षा समारोह, सेमिनार जैसे आयोजनों के लिए विवि के पास कोई बड़ा हॉल नहीं था। इसके कारण बड़े आयोजन के लिए शहर में जगह तलाशनी पड़ती थी। सीनेट हॉल की परिकल्पना के बारे में इतिहास अध्येता अरुण सिंह बताते हैं कि हॉल की रूप रेखा तैयार करने में पटना विश्वविद्यालय के पहले हिदुस्तानी वाइस चांसलर सैयद सुल्तान अहमद ने अपना योगदान दिया था। हॉल के बनने पहले विवि की ओर से होने वाले आयोजन दूसरे जगहों पर होता था। अरुण सिंह बताते हैं कि पटना विश्वविद्यालय के अस्तित्व में आने के पहले पांच वर्षो में 1917-1922 तक इसका अस्थायी कार्यालय पटना उच्च न्यायालय की एक शाखा में था। फैकल्टी की बैठकें पटना कॉलेज के एक कमरे में होती थीं। वही सीनेट की बैठकें पटना सचिवालय के सभा कक्ष में आयोजित की जाती थीं। विवि का दीक्षा समारोह गवर्नर हाउस के दरबार हॉल में होता था।

कैंब्रिज विवि की तर्ज पर बना पीयू का सीनेट हॉल =

पटना विश्वविद्यालय के पहले हिदुस्तानी वाइस चांसलर सैयद सुल्तान अहमद ने इंग्लैंड में रहकर वकालत की पढ़ाई की थी। उन्होंने इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज विवि की तरह पटना विवि के लिए भी दीक्षा हॉल बनाने की सोची। अपनी परिकल्पना को साकार करने के लिए सर सैयद ने अपने प्रिय मित्र मुंगेर के राजा देवकीनंदन सिंह से मदद मांगी, क्योंकि इस भवन को तैयार करने के लिए काफी पैसे की जरूरत थी। राजा देवकीनंदन ने अपने मित्र के अनुरोध पर छात्र कल्याण की भावना से प्रभावित होकर करीब 1.75 लाख रुपये उपलब्ध करा दिए। सर सैयद को वास्तुशिल्प की अच्छी समझ थी। विदेश में स्थापित कॉलेज और भवन के वास्तुशिल्प से प्रभावित सर सैयद की दिली इच्छा थी कि वैसे ही भवन का निर्माण अपने शहर में भी हो। भव्य इमारतों के प्रति दीवानगी की वजह से ही उन्होंने खुद के रहने के लिए वीरचंद पटेल रोड पर भवन बनवाया था, जिसे अब सुल्तान पैलेस के नाम से जाना जाता है। यह भवन इन दिनों परिवहन विभाग का कार्यालय बना है।

का लकाता के टॉउन हॉल की तर्ज पर सीनेट हॉल का निर्माण -

सर सैयद ने सीनेट हॉल का निर्माण कोलकाता के टाउन हॉल की तर्ज पर करवाया था। कोलकाता के टाउन हॉल का डिजाइन पटना के गोलघर निर्माता कैप्टेन जॉन गासिर््टन ने किया था। कैप्टन जॉन गासिर््टन ने ही व्हीलर सीनेट हॉल के लिए भी डिजाइन तैयार किया। वर्ष 1825 में सर सैयद के नेतृत्व में व्हीलर सीनेट हॉल का निर्माण कार्य आरंभ हुआ और अगले वर्ष बनकर तैयार हो गया। ग्रीक मंदिर की शैली में बना यह भवन आरंभ से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। ग्रीक डोरिक शैली में बने गोल विशाल खंभे इसकी भव्यता को और निखारते हैं। इसका नामकरण बिहार के तत्कालीन गवर्नर और चांसलर सर हेनरी व्हीलर के नाम पर किया गया था। सीनेट हॉल के निर्माण के बाद पटना विश्वविद्यालय को अपना सीनेट हॉल मिल गया था।

गुरु रवींद्र नाथ टैगोर का सीनेट हॉल ने किया था अभिनंदन -

पटना विश्वविद्यालय के व्हीलर सीनेट हॉल से गुरु रवींद्र नाथ टैगोर का भी पुराना संबंध रहा। गुरु रवींद्र कोलकाता में नृत्य नाटिका 'चित्रांगदा' का सफलता पूर्वक मंचन किए थे। उन दिनों गुरु रवींद्र द्वारा स्थापित 'विश्वभारती' आर्थिक संकट से गुजर रही थी। इसकी आर्थिक बदहाली दूर करने के लिए अस्वस्थ होने के बाद भी कविगुरु 75 साल की उम्र में धन जुटाने के लिए निकल पड़े थे। उन्होंने जगह-जगह अपने दल के साथ नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर धन जुटाया था। इसी क्रम में वे 15 मार्च 1936 को अपने दल के साथ कोलकाता से रवाना हुए और पटना आए। पटना में कवि के आगमन से पहले तैयारी को लेकर छह मार्च 1936 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री अब्दुल अजीज के घर पर बैठक हुई थी, जिसमें उनका अभिनंदन किए जाने पर प्रस्ताव पारित हुआ था। टैगोर का अभिनंदन 17 मार्च 1936 को इसी सीनेट हॉल में हुआ था। समारोह के दौरान पटना हाई कोर्ट के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश सर सर कॉर्टनी टैरल, सर सुल्तान अहमद, पटना विवि के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा, राय बहादुर मिहिरनाथ राय के साथ काफी संख्या में लोग मौजूद थे। इस दौरान टैगोर ने सीनेट हॉल में 'गीतांजलि' पुस्तक की एक कविता भी सुनाई थी।

Posted By: Jagran

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