पटना, राज्य ब्यूरो। कोरोना काल ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक-दूसरे की अहमियत खूब समझाई है। नेता के लिए कार्यकर्ता जरूरी हैं और कार्यकर्ता के लिए नेता। कोरोना में इनके बीच दूरी बनी, लेकिन इसका भी हल ढूंढ लिया गया। अब नेता अपने कार्यकर्ताओं से परदे के पीछे से मिल रहे हैं। दोनों के बीच शीशे की दीवार होती है या फिर नेता के बंगले में एक कमरे में नेता और दूसरे कमरे में कार्यकर्ता बैठ कर फोन से बतिया रहे हैं। लेकिन पैरवीकार भी नेताओं के पास जुगाड़ लगा पहुंच ही जाते हैं। हालंकि इसमें उनकी सांसें भी फूल रही हैं। 

हाल राजद का

विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव सुबह की सैर में तेज चलते हैं। इधर दो दिनों से उनकी चाल कुछ अधिक ही तेज हो गई है। वजह: विधान परिषद की नौ में से तीन सीटों पर राजद की जीत की गारंटी है। तेजस्वी चाह लें तो मेंबरी पक्की। सो, लोग सैर के दौरान ही बताने लगते हैं कि संगठन और राज्य के लिए उनका परिषद में जाना कितना जरूरी है। बचने का एक ही रास्ता है...इतनी तेज चलें कि बोलने में पैरवीकार की सांस फूल जाए। 

हाल जदयू का 

तीन सीटें जदयू को मिलेंगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, लेकिन वहां पहुंचना संभव नहीं है। लिहाजा, पैरवीकार उन लोगों को पकडऩे की कोशिश करते हैं, जो कोरोना की सख्ती के दौर में भी कभी-कभार मुख्यमंत्री निवास में जाते रहते हैं। पैरवीकार प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह का इंतजार कर रहे हैं। उनका दरवाजा हमेशा खुला रहता है। सबकी सुन लेते हैं। क्या संयोग है- आठ जून को मंदिरों के पट खुलेंगे। उसी दिन दादा भी पटना आ रहे हैं। 


हाल भाजपा का

प्रदेश भाजपा की कोर कमिटी की पिछली बैठक में परिषद चुनाव पर चर्चा हुई। सबसे अधिक दावेदार इसी दल में हैं। भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह प्रभारी संजय मयूख भी हैं। माना जा रहा है कि अंतिम फैसला दिल्ली को ही करना है। बता दें कि नौ में से दो सीटें भाजपा के उम्‍मीदवार जीतेंगे। 

हाल कांग्रेस का

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डा. मदन मोहन झा सोमवार से सदाकत आश्रम आने लगे हैं। वह पैरवीकारों को बता देते हैं कि उम्मीदवार का नाम आलाकमान के स्तर पर तय होगा। हां, प्रदेश कमिटी सक्षम और संगठन के लिए उपयोगी नाम की सिफारिश जरूर कर देगी। एक सीट पर कांग्रेसी उम्‍मीदवार जीतेंगे।  

इन पार्टियों के खाते में जाएंगी सीटें 

विधायकों के वोट से भरी जाने वाली विधान परिषद की नौ सीटें मई में खाली हुई हैं। विधायकों की संख्या के हिसाब से नौ में जदयू और राजद के खाते में तीन-तीन सीटें जाएंगी। दो पर भाजपा और एक पर कांग्रेस के उम्मीदवार जीतेंगे। 

इधर, सुशील मोदी दो दीवार की दूरी बनाकर करते हैं बात 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरह उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी पूरी सख्ती से कोरोना से बचाव के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करते हैं। थोड़ा फर्क है। मुख्यमंत्री निवास में जहां बिन बुलाए लोगों की आवाजाही पर पाबंदी रहती है, मोदी के सरकारी आवास का मुख्य द्वार अधिक समय खुला ही रहता है। मोदी अपने सरकारी आवास का उपयोग कार्यालय की तरह ही करते हैं। बंदी के दिनों में भी मोदी दोपहर एक बजे सरकारी आवास पर पहुंच जाते हैं। मुलाकातियों को अतिथि कक्ष में बिठाया जाता है। उनके शरीर का तापमान चेक किया जाता है। हथेली पर सैनिटाइजर दिया जाता है। मास्क की जांच की जाती है। उप मुख्यमंत्री अपने कमरे में रहते हैं। उन्हें फोन पर मुलाकातियों के बारे में जानकारी दी जाती है। वे बारी-बारी से मुलाकातियों से फोन पर ही बात करते हैं। बातचीत पूरी होने के बाद मुलाकाती निकल जाते हैं। हां, चुनिन्दा नेताओं से उनकी अपने कमरे में भी बातचीत होती है, लेकिन इनकी संख्या काफी कम है।

मोदी बताते हैं- इस बीमारी से बचाव का यही एकमात्र तरीका है कि हम लोगों से पर्याप्त दूरी बनाकर मिलें। इधर मुलाकातियों का कहना है कि फोन पर बातचीत तो हो जाती है, लेकिन आमने-सामने की बातचीत जैसी असरदार नहीं होती है। शायद इसलिए भी कि अतिथि कक्ष और उप मुख्यमंत्री के कक्ष के बीच दो गज नहीं, दो दीवारों की दूरी है। और यह भी कि जब ये मुलाकाती विधान परिषद की सीट की मांग करते हैं, ठीक उसी वक्त उन्हें मोदी याद दिला देते हैं कि देश अभी भीषण संकट के दौर से गुजर रहा है।  

Posted By: Rajesh Thakur

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