कारोबार में चाहते हैं तरक्की तो ऐसे करें भगवान विश्वकर्मा की आराधना, नोट कर लें पूजा का शुभ मुहूर्त
17 सितंबर को सर्वार्थ सिद्धि योग में भगवान विश्वकर्मा की पूजा होगी। यह पूजा कारोबार में वृद्धि और रोजगार में उन्नति के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है।

सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी विश्वकर्मा पूजा
HighLights
17 सितंबर को सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी विश्वकर्मा पूजा।
कारोबार में वृद्धि और रोजगार उन्नति के लिए विशेष फलदायी।
पटना में कल-कारखानों, गैराजों में होगी विधिवत पूजा-अर्चना।
जागरण संवाददाता, पटना। भाद्रपद शुक्ल षष्ठी 17 सितंबर को देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा होगी। कल-कारखानों, गैराज, कंपनियों, हार्डवेयर प्रतिष्ठानों, मोटर वाहन, साइकिल दुकानों और अन्य कार्यस्थलों पर मशीनों व उपकरणों की सफाई कर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी।
धार्मिक मान्यता है कि विश्वकर्मा पूजा से कारोबार में वृद्धि और रोजगार में उन्नति के अवसर बनते हैं। ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि 17 सितंबर की रात 11:31 बजे सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। रात 8:41 बजे तक अनुराधा नक्षत्र और इसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र रहेगा।
इसी अवधि तक सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का संयोग भी रहेगा। इस दिन भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा के सातवें धर्म पुत्र के रूप में जन्म लिए थे।
शुभ संयोग में विश्वकर्मा पूजा करने से नौकरी-पेशा, व्यवसाय और रोजी-रोजगार में प्रगति की कामना की जाती है। पूजा में पंचदेव, विष्णु, गणेश, नवग्रह, भगवती और महादेव की भी आराधना होगी।
देवताओं के वास्तुकार हैं विश्वकर्मा
भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का वास्तुकार और निर्माण-कला का अधिष्ठाता माना जाता है। मान्यता के अनुसार उन्होंने स्वर्गलोक, लंका, द्वारका और हस्तिनापुर सहित अनेक दिव्य नगरों का निर्माण किया।
कलाकार, बुनकर, शिल्पकार और व्यापारी वर्ग के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है। इस दिन कई कल-कारखानों में अवकाश रखकर उत्साहपूर्वक पूजा की जाती है।
पूजन का शुभ मुहूर्त:
- सर्वार्थ सिद्धि व रवियोग: रात 8:41 बजे तक
- शुभ मुहूर्त: सुबह 5:37 से 7:09 बजे तक
- चर-लाभ-अमृत: सुबह 10:12 से दोपहर 2:47 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:19 से दोपहर 12:08 बजे तक
