पटना [जेएनएन]। बिहार की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से लगातार अपनी और अपनी पार्टी की मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश में जुटे जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) की नैया आखिर नाथनगर में डूब ही गई। साथ ही, राजद को भी हम पार्टी ने झटका दे दिया है। नाथनगर विधानसभा सीट (Nath Nagar Assembly Seat) के परिणाम से महागठबंधन (Grand Alliance) में मांझी के भविष्‍य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। गुरुवार को इस सीट पर हुई मतगणना में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के लक्ष्‍मीकांत मंडल (Lakshmi Kant Mandal) ने आरजेडी प्रत्‍याशी राबिया खातून को हराया। मांझी के प्रत्‍याशी तीसरे नंबर पर रहे।  

जीतनराम मांझी कर रहे थे जीत का दावा

हालांकि, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी नाथनगर में अपनी जीत के दावे कर रहे थे और वे इस बात के लिए भी आश्वस्त थे कि महागठबंधन की दूसरी सहयोगी विकासशील इंसान पार्टी (VIP) भी सिमरी बख्तियारपुर (Simri Bakhtiyarpur) से अपनी सीट जीतेगी। लेकिन सिमरी बख्तियारपुर में भी वीआइपी प्रत्‍याशी लड़ाई में नहीं दिखी तथा तीसरे नंबर पर रही।

प्रतिष्ठा का विषय बनी नाथनगर सीट

मांझी के लिए नाथनगर सीट पर जीत प्रतिष्ठा का विषय बन गई थी। दरअसल, मांझी शुरू से नाथनगर सीट पर अपनी दावेदारी कर रहे थे, लेकिन महागठबंधन में उनकी बात की अनसुनी हो रही थी। जब राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) को मनाने में मांझी हर तरफ से फेल हो गए तो उन्होंने बगावती तेवर दिखाते हुए उसके विरोध में नाथनगर से अपनी पार्टी के प्रत्याशी अजय राय (Ajay Rai) को सिंबल दे दिया, लेकिन वे खुद भी डूबे और सहयोगी राजद को भी ले डूबे।

सभाओं में आरजेडी पर भी साधा निशाना

मांझी ने इस सीट पर जीत के लिए महागठबंधन के दूसरे बागी नेता विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के अध्यक्ष मुकेश सहनी (Mukesh Sahni) से समझौता कर लिया। इन दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के लिए चुनावी सभाएं की। इन सभाओं में राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ ही आरजेडी को भी निशाने पर लिया गया।

जीत पर मांझी का कद घटना तय

अब नाथनगर सीट पर 'हम' प्रत्याशी के साथ ही आरजेडी भी हार चुका है। ऐसे में कहा जा रहा है कि इस हार के बाद मांझी का महागठबंधन में कद घटना तय है। इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव 2020 (Assembly Election 2020) में सीटों के लिए दावेदारी पर पड़ेगा।

हार से पराजय का ठीकरा टूटना तय 

नाथनगर से 'हम' के साथ आरजेडी भी हार गया है। ऐसी स्थिति में महागठबंधन की पराजय का ठीकरा मांझी पर टूटना तय है। इसमें दो राय नहीं कि महागठबंधन में मांझी के लिए आने वाला वक्त चुनौतियों भरा होगा। अगले वर्ष होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में मांझी और उनकी पार्टी का कद क्या होगा या फिर मांझी महागठबंधन का हिस्सा होंगे भी या नहीं, इन्‍हें लेकर कयास अब तेज हो गए हैं।

Posted By: Amit Alok

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