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भरणी नक्षत्र में महिलाएं रखेंगी वट सावित्री व्रत: ब्रह्मा, विष्णु; महेश से करेंगी अखंड सौभाग्य की कामना

Published: Thu, 14 May 2026 07:53 PM (IST)

महिलाएं 16 मई को अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु के लिए वट सावित्री व्रत रखेंगी। इस बार भरणी-कृत्तिका ...और पढ़ें

वट सावित्री व्रत

वट सावित्री व्रत

जागरण संवाददाता, पटना। अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु की कामना को लेकर सुहागिन महिलाएं 16 मई को वट सावित्री व्रत रखेंगी। व्रत को लेकर शुक्रवार को महिलाएं नहाय-खाय करेंगी और पूजा की तैयारी में जुटेंगी।

इस बार वट सावित्री व्रत पर भरणी और कृत्तिका नक्षत्र के साथ सौभाग्य योग का विशेष संयोग बन रहा है। शनिवार को शनैश्चरी अमावस्या और शनि जयंती भी पड़ रही है, जिससे इस व्रत का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।

वट वृक्ष की होगी विशेष पूजा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु, महेश और देवी सावित्री का वास माना जाता है। इसकी लटकती शाखाओं को देवी सावित्री का स्वरूप माना जाता है।

महिलाएं वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सुहाग का आशीर्वाद मांगेंगी। पूजा के दौरान व्रती महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा भी करेंगी।

अंकुरित चने का विशेष महत्व

भविष्य पुराण में वट सावित्री पूजा में अंकुरित चने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि यमराज ने चने के रूप में ही सत्यवान के प्राण सावित्री को लौटाए थे।

इसी वजह से पूजा में अंकुरित चना अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है। महिलाएं इसे प्रसाद के रूप में भी ग्रहण करती हैं।

मिथिलांचल में होगी बरसाइत पूजा

मिथिलांचल में नवविवाहित महिलाएं बरसाइत की विशेष पूजा करेंगी। महिलाएं दिनभर निर्जला उपवास रखकर सोलह श्रृंगार करेंगी और पति के साथ वट वृक्ष की पूजा करेंगी।

पूजा के बाद लाल-पीले रंग के हाथ पंखे से वट वृक्ष को हवा देने की परंपरा निभाई जाएगी। इस पूजा में आम और लीची का भी विशेष महत्व माना जाता है।

वट सावित्री पूजा का शुभ मुहूर्त

  • अमावस्या तिथि: देर रात 1:44 बजे तक
  • सौभाग्य योग मुहूर्त: सुबह 10:13 बजे तक
  • शुभ योग मुहूर्त: सुबह 6:45 बजे से 8:26 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:19 बजे से 12:13 बजे तक
  • चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: दोपहर 11:46 बजे से शाम 4:47 बजे तक