पटना [जेएनएन]। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएएफ के काफिले पर गुरुवार की शाम में हुए आतंकी हमले में 44 जवान शहीद हो गए। पाकिस्‍तान में जड़ें जमा भारत में आतंक फैलाते रहे आतंकवादी संगठन 'जैश-ए-मोहम्मद' ने इस आत्‍मघाती हमले की जिम्‍मेदारी ली है। घटना के बाद पूरे देश में गम व गुस्‍से का माहौल है। सोशल मीडिया पर भी गम व गुस्से के इजहार का सिलसिला जारी है। सोशल मीडिया पर यूजर्स आतंकवादियों से बदला लेने व आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की मांग की है।

फेसबुक पर दिवाकर तेजस्‍वी, नेहा राय, निशा वर्मा, पुलवामा में शहीद सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि देती हैं। सभी यूजर्स शहीद जवानों का नमन किया है। अधिकांश ने सरकार से कार्रवाई की मांग की है। फेसबुक व ट्विटर पर यूजर्स ने हमले के लिए आतंकियों व पाकिस्‍तान को जिम्‍मेदार ठहराते हुए भारत सरकार से फिर सर्जिकल स्ट्राइक या निर्णायक युद्ध की मांग की है।

ट्विटर पर जागृति पांडेय ने आतंकी हमले की निंदा करते हुए कहा है कि आतंकियों ने कायराना हरकत की है। उन्‍होंने शहीद जवानों को भारत का गौरव बताया है।

प्रज्ञानदीप सिंह ब्रार ने ट्वीट कर अमेरिका द्वारा ओसामा बिन लादेन को ठिकाने लगाने की तरह की कार्रवाई की मांग की है। उन्‍होंने लिखा है कि हमें अमेरिका से सैनिकाें सें की एक-एक बूंद खून का बदला लेना सीखना चाहिए। हालांकि, ध्रुव राठी जैसे कुछ यूजर्स ट्विटर पर सवाल कर रहे हैं कि अगर बदला ही समाधान होता तो अमेरिका ने अफगानिस्‍तान व इराक की समस्‍याओं को दशकों पहले सुलझा लिया होता।

एस चंद्रशेखर ने ट्वीट किया कि क्या सर्जिकल स्ट्राइक पार्ट 2 शुरू होगी। यही एक भाषा है, जिसे पाकिस्तान में स्थित आतंकी समझते हैं। पीएम मोदी को संबोधित करते हुए उन्‍होंने लिखा कि हम आपके साथ हैं सरजी।
एक अन्‍य यूजर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहा है कि वे पाकिस्तान स्थित सभी आतंकी कैंपों को तबाह कर दें। उन्‍होंने फिर सर्जिकल स्ट्राइक की मांग की है। रमेश सोलंकी ने लिखा है कि अब कोई राजनीति या कूटनीति की जरूरत नहीं, केवल पाकिस्‍तान पर हमला की जरूरत है।

फेसबुक पर यूजर रमेश कुमार व शिवानी मुजमदार ने इस घटना को उड़ी हमले की पुनरावृत्ति मानते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फिर सर्जिकल स्ट्राइक की मांग की है। उन्‍होंने लिखा है कि जनता महंगा पेट्रोल और गैस खरीदने को तैयार है, लेकिन कार्रवाई जरूरी है। फेसबुक यूजर कौशल किशोर, ज्‍याेति व शाहनवाज सवाल करते हैं कि आखिर पृथ्वी-अग्नि मिसाइल, अर्जुन टैंक, सुखोई विमान, ब्रह्मोस, अरिहंत-विक्रमादित्य जैसे घातक हथियारों काे किसलिए रखा गया है? इनका क्‍या केवल 26 जनवरी काे मेला लगाना है?

फेसबुक पर अलीम अंसारी घटना के लिए राजनीति को जिम्‍मेदार ठहराते हैं। लिखते हैं, 'सियासत तुम्हारे जिगर में अगर हौसला होता, लहू जवानों का सड़कों पर यू नहीं पड़ा होता... श्रद्धांजलि...।' लोग सुरक्षा मामलों में राजनीति या लापरवाही के भी आरोप लगा रहे हैं। फेसबुक पर राजकुमार कहते हैं कि सरकार केवल बातें करती है, कार्रवाई भी तो करे। खुर्शीद ने लिखा है, '56 इंची शासन में ये 17वां हमला था। विपक्ष में रहते हुए ये एक के बदले 10 सर ला रहे थे, और अब एक-एक बार में 30-30 सैनिकों को मरवा दे रहें हैं। जवाबी कारर्वाई कड़ी-निंदा के अलावा कुछ नहीं!'
यशवंत व शमशाद का सवाल है कि आखिर आतंकियों को हमारे सैनिकों की बस की सटीक जानकारी कैसे मिली? आतंकियों के पास विस्फोटक और हथियार मिले, वे की चेक प्‍वाइंट से बचकर हमला कर बैठे और हमें भनक तक नहीं लगी। जवान हमारी सुरक्षा के लिए हैं, जवानों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी कौन लेगा?
 

Posted By: Amit Alok

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