पटना, जेएनएन। भारत ने पूरे विश्व को शांति, दया, प्रेम का पाठ पढ़ाया है। यहां का योग, साधना और अध्यात्म को आज पूरे विश्व के लोग अपना रहे हैं। आध्यात्मिक संस्कृति का आधार मानवता है। इसे अपनाकर ही देश फिर से विश्वगुरु बन सकता है। ये बातें शनिवार को भारतीय नृत्य कला मंदिर के मुक्ताकाश मंच पर गायत्री परिवार के प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ के वार्षिकोत्सव के मौके पर आयोजित यूथ एक्सपो में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहीं। इससे पहले कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, शांतिकुंज हरिद्वार से आए चिन्मय पंड्या, गायत्री शक्तिपीठ, कंकड़बाग के प्रभारी डॉ. अशोक कुमार, मनीष कुमार और जदयू नेता छोटू सिंह ने संयुक्त रूप से किया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में उच्च महत्वाकांक्षी परिवार एवं सामाजिक दबाव के कारण वर्तमान समय का युवा तनाव में रहता है। इसके कारण देश के लगभग 12 फीसद किशोर-किशोरियों मानसिक पीड़ा व समस्या से ग्रस्त होकर आत्महत्या कर रहे हैं। यह स्थिति बड़ी भयावह है। तनाव से मुक्ति के लिए अध्यात्म ही एकमात्र सहारा है। गायत्री परिवार का युवा प्रकोष्ठ इस दिशा में सकारात्मक पहल कर रहा है जो सराहनीय है।

खुद के लिए नहीं समाज और राष्ट्र के लिए जिएं

बिहार के लोगों  ने अपनी प्रतिभा और परिश्रम के कारण देश ही नहीं दुनिया में अपने संस्कार, संस्कृति के साथ राज्य का मान बढ़ाया है। हम स्वयं के लिए सिर्फ नहीं समाज और देश के लिए जिएं। ये बातें गायत्री परिवार सीखा भी रहा है। इसी से राष्ट्र और राज्य का विकास होगा। उन्होंने प्रांतीय युवा प्रकोष्ठ के संचालक मनीष कुमार, निशांत रंजन और प्रिंस रंजन के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि इनके प्रयास से युवाओं में बदलाव आएगा।

वर्तमान समय में नकारात्मक चीजों से भर गया वातावरण

शांतिकुंज से आए चिन्मय पंड्या ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में वातावरण में नकारात्मकता भर गई है। इसका परिणाम है कि आए दिन कुकृत्य जैसी घटनाएं बढ़ गई हैं। यदि घर में धुआं भरा है तो सांस लेने में घर के सभी सदस्यों को परेशानी होगी, धुंधला दिखेगा। इसी तरह वातावरण में नकारात्मकता भरी होगी तो इससे हर कोई प्रभावित होगा। इसका उदाहरण आज हर घर में दिख रहा है। घर-घर में महाभारत और हर घर लंका बना हुआ है। 

बच्चों को कैसे सिखाएंगे राष्ट्रप्रेम

चिन्मय पंड्या ने कहा कि आज परिवार में ही प्रेम नहीं है तो बच्चों को राष्ट्रप्रेम कैसे सिखाएंगे। व्यक्ति अशांत हो गया है। इसका मूल कारण चिंतन में आया स्वार्थ और भावनाओं में आई संकीर्णता है। प्यार पाना है तो प्यार देना होगा, सम्मान पाना है तो सम्मान देना होगा। लेकिन वर्तमान समय में स्थिति सीधे विपरीत है। इंसान के चिंतन में गंदगी आ गई है। वातावरण की शुद्धि से ही यह नियंत्रण संभव है। इसके लिए एक मंत्र और एक यज्ञ है मानवता।

नाटक से बच्चों ने दिखाई बिहार की संस्कृति

युवा प्रकोष्ठ द्वारा संचालित बाल संस्कारशाला में पढऩे वाले स्लम एरिया के बच्चों ने बिहार की संस्कृति का मंचन किया। इसके तहत छठ महापर्व की महता, होली पर्व को दर्शाया। बिहार की गौरव गाथा को भी बच्चों ने नाटक के माध्यम से बताया। इसके बाद युवा कलाकारों ने गीत के माध्यम से युवाओं में ऊर्जा भरी। हम युग का निर्माण करेंगे यह संकल्प हमारा है..., हम संस्कृति के लिए स्वयं विवेकानंद बन जाएंगे, बिहार की धरती तुझपर जीवन कुर्बान है आदि गीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में युवा प्रकोष्ठ के समन्वयक मनीष कुमार, प्रिंस रंजन, जोनल समन्वयक डॉ. अशोक कुमार, विजय शर्मा, ज्ञान प्रकाश, निशांत रंजन, राजीव कुमार आदि मौजूद थे। 

Posted By: Rajesh Thakur

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