पटना सिटी : सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में नालंदा मेडिकल कॉलेज को विकसित कर विश्व स्तर की स्वास्थ्य सेवा एवं सुविधा देने की कोशिशों को यहां की बीमार व्यवस्था से बट्टा लग रहा है। शुक्रवार को रेडियोलॉजी विभाग में एक चौकाने वाले सच का खुलासा हुआ। यहां लगी चार अल्ट्रासाउंड मशीनों में से एक कई दिनों से सिर्फ इसलिए बंद पड़ी हैं क्यों कि मरीज लिटाने के लिए लगा टेबल उंचा है। डॉक्टर साहब को अल्ट्रासाउंड करने में मुश्किल होती है। कमरे के बाहर गलियारे में तड़पते-छटपटाते मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।

उंचे टेबल को बदल कर नीचा टेबल लगवाने के लिए विभागाध्यक्ष ने काफी मशक्कत की। अफसोस वह कामयाब नहीं हो सके। मरीजों को लिटाने वाले बेड पर चादर नहीं है। पूछने पर पता चला कि धोबी वक्त पर चादर नहीं देता है। डॉक्टर के हाथ धोने के लिए साबुन, पोछने के लिए तौलिया, मरीज के लिए रूई, सेंट्रल पैथोलोजी व अन्य विभागों में गंदी रूई फेकने के लिए डस्टबिन तक नहीं है। महज तार न होने की वजह से महंगी इलेक्ट्रानिक इसीजी मशीन बंद पड़ी है। इन छोटी-छोटी कमियों के कारण डॉक्टर, नर्स व मरीज परेशान हो रहे हैं। आश्चर्य यह भी कि अस्पताल में आधा दर्जन से अधिक स्वास्थ्य प्रबंधक भी सेवारत हैं।

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस