दीनानाथ साहनी, पटना : नौकरी-पेशा या प्रोफेशनल यदि पीएचडी करना चाहते हैं तो अब कोई बाधा नहीं। ऐसे लोगों को यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) ने बड़ी राहत दी है। यूजीसी ने नया रेगुलेशन तैयार किया है। इसके मुताबिक मात्र छह माह का कोर्स वर्क ही रेगुलर मोड (नियमित तौर) में करना अनिवार्य होगा, जबकि शोधार्थी थीसिस समेत अन्य शोध-कार्य पार्टटाइम मोड (अल्पकालिक तौर) में कर सकेंगे। नए रेगुलेशन को शैक्षणिक सत्र 2022-23 से ही लागू करने की तैयारी है। गाइडलाइन में स्पष्ट कहा गया है कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपनी पीएचडी सीटों का ब्योरा आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। इसमें पीएचडी गाइड से लेकर विषय के बारे में भी जानकारी देनी होगी। 

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परीक्षा और साक्षात्कार से नामांकन की सुविधा

कुलाधिपति कार्यालय के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि नये रेगुलेशन के मुताबिक पीएचडी में नामांकन के लिए अभ्यर्थियों को 70 अंकों की लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। उसके बाद 30 अंकों का साक्षात्कार होगा। पीएचडी प्रोग्राम में कम से कम 12 क्रेडिट और अधिक से अधिक 16 क्रेडिट अनिवार्य होंगे। इसके अतिरिक्त सेवानिवृत्ति के बाद शिक्षक 70 वर्ष की आयु तक शोध क्षेत्र में गाइड के रूप में दोबारा उसी विश्वविद्यालय में सेवा दे सकेंगे।  इसमें अलग-अलग वर्ग निर्धारित किए गए हैं। 

  • - यूजीसी का नया रेगुलेशन इसी सत्र से कर दिया है लागू 
  • - 70 अंकों की लिखित परीक्षा और 30 अंकों का होगा साक्षात्कार 
  • - 12 क्रेडिट और अधिक से अधिक 16 क्रेडिट अनिवार्य होंगे

अपनी थीसिस को पेटेंट करा सकेंगे शोधार्थी

नए रेगुलेशन के मुताबिक शोधार्थी अपनी थीसिस को पेटेंट करा सकेंगे। पीएचडी की रिसर्च फाइडिंग को क्वालिटी जर्नल यानी रिव्यू जर्नल में प्रकाशित करा सकेंगे। नौकरी करने वाले या प्रोफेशनल को पीएचडी प्रोग्राम को छह वर्ष में पूरा करना अनिवार्य होगा। महिलाओं और दिव्यांगों (40 प्रतिशत से अधिक होने पर) को छह साल के अतिरिक्त दो साल का अतिरिक्त समय मिलेगा। 

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Edited By: Akshay Pandey