पटना, जेएनएन। ऑल इंडिया बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन और बैंक इम्प्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (बेफी) के आह्वान पर 22 अक्टूबर को सरकारी बैंकों के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। दिन भर सरकार विरोधी नारेबाजी चलती रही। शाखाओं पर धरना-प्रदर्शन हुआ। बिहार में 30 हजार बैंक कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए और 10 हजार करोड़ का लेन-देन बाधित हुआ। बिहार की 770 शाखाओं पर ताले लटके रहे।  

 

हड़ताल के कारण सरकारी बैंकों के ग्राहकों को परेशानी जरूर हुई, लेकिन स्टेट बैंक, ग्रामीण बैंक, कोऑपरेटिव बैंक और निजी बैंकों के हड़ताल से बाहर रहने से हड़ताल का मिलजुला असर रहा। बिहार में राष्ट्रीयकृत बैंकों की कुल 4042 शाखाएं हैं। इनमें 770 शाखाएं बंद रहीं, जबकि ग्रामीण बैंकों की 2110, निजी बैंकों की 876, और को-ऑपरेटिव बैंक की 286 शाखाएं खुली रहीं। भारतीय स्टेट बैंक भी हड़ताल में शामिल नहीं था। 

ऑल इंडिया बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन और बैंक इम्प्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के संयुक्त आह्वान पर इस एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल को बैंक अधिकारियों ने भी नैतिक समर्थन दिया। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के वरीय उपाध्यक्ष डॉक्टर कुमार अरविंद ने कहा कि हड़ताल को संघ ने पूरा समर्थन दिया है। इलाहाबाद बैंक के अंचल कार्यालय, आर ब्लॉक स्थित पंजाब नेशनल बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय सहित अन्य बैंकों के अंचल व क्षेत्रीय कार्यालयों पर गोलबंद होकर बैंकों के विलय का विरोध किया गया।

बिहार प्रोविंशियल बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन के उप महासचिव संजय तिवारी, बैंक इम्प्लाइज फेडरेशन के महासचिव जेपी दीक्षित ने कहा कि बैंकों के विलय पर सरकार रोक लगाए। यह किसी के हित में नहीं है। इससे बेरोजगारी बढ़ेगी। इसके अलावा उन्होंने छह अन्य मांगें भी रखीं। इसमें बैंकिंग रिफॉर्म पर रोक  लगाने, एनपीए की हर हाल में वसूली करने, ग्राहकों पर दंडात्मक शुल्क न लगाने, रोजगार सुरक्षा की गारंटी देने, सभी बैंकों में नियुक्तियां करने, बैंकों में वेतन समझौता अविलंब करने की मांग की। 

एआइबीओए के संयुक्त सचिव डीएन त्रिवेदी ने कहा कि जनता के मुद्दों को लेकर यह हड़ताल की गई है, कोई आर्थिक मांग नहीं है। इलाहाबाद बैंक के महामंत्री उत्पलकांत ने कहा कि पूरे देश में यह हड़ताल सफल रही। सरकार की नीति जनविरोधी है। 

Posted By: Kajal Kumari

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