जागरण टीम, पटना। सोमवार को राज्य के 24 जिलों में 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाले तूफान के आने की आशंका से संबंधित जिलों में भय का माहौल बन गया था। देर शाम तक लगा कि खतरा टल गया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने भी इस बाबत जारी अपना अलर्ट वापस ले लिया। लेकिन, रात में तूफान आ ही गया। तूफान से चंपारण व गोपालगंज में अधिक क्षति का अनुमान लगाया जा रहा है।

विदित हो कि रविवार को मौसम विज्ञान विभाग से मिली जानकारी के आधार पर आपदा प्रबंधन विभाग ने तूफान का अलर्ट जारी किया था। इसके सोमवार दोपहर बाद बिहार की सीमा में प्रवेश की आशंका थी। लेकिन, यह रात में पहुंचा।

तूफान ने सोमवार को उत्तर बिहार के चार जिलों को हिलाया। देर रात 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी आई। गरज के साथ बारिश और ओला गिरने से लीची और आम की फसल को नुकसान हुआ। आपदा प्रबंधन विभाग ने फिर से पांच जिलों के लिए अलर्ट जारी किया, लेकिन कहा कि अब स्टार्म कमजोर पड़ रहा है।

उत्तर बिहार में दिखा असर

सोमवार की देर शाम उत्तर बिहार के पश्चिम चंपारण के बेतिया, नरकटियागंज, पूर्वी चंपारण के सीमावर्ती रक्सौल व शिवहर जिलों में आंधी, ओलावृष्टि और फिर बारिश ने काफी नुकसान पहुंचाया। गेहूं, आम व लीची की फसल पर इसका असर दिखा।

मोतिहारी समेत आसपास के इलाकों में तेज हवा से अफरातफरी की स्थिति रही। सीतामढ़ी, सिवान और गोपालगंज में भी तेज हवा चली और बूंदाबांदी हुई। पश्चिमी चंपारण में कई घरों के छप्पर उड़ गए। झोपडिय़ां धराशायी हो गईं।

रक्सौल में तूफान के बाद जमकर बारिश हुई। इस दौरान रक्सौल रेलवे स्टेशन की सीढ़ी के टाइल्स गिर गए। रेल यात्रियों में भगदड़ मच गई।

शिवहर की स्थिति भी कुछ इसी तरह की रही। यहां शाम करीब नौ बजे आंंधी आई और इसके कुछ ही देर बाद बारिश शुरू हो गई। शहर में कई जगह बिजली के खंभे धराशायी हो गए। इससे पूरा शहर अंधेरे में डूब गया। इस बीच ओलावृष्टि होने से फसलों को काफी नुकसान पहुंचा।

रात होते ही रफ्तार में आया तूफान

वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक आरके गिरी के मुताबिक उत्तर-पश्चिम की ओर से बहने वाली तेज हवाओं (नार्वेस्टर) को स्थानीय हालात ने विकराल बना दिया। शाम तक लग रहा था कि थंडर स्टॉर्म का खतरा टल गया है, लेकिन रात होते-होते गोपालगंज एवं बेतिया के ऊपरी हिस्से में बिहार-नेपाल सीमा पर हल्की तेज हवाओं ने धीरे-धीरे रफ्तार पकडऩी शुरू कर दी। पहले 30-35 प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली, जो आधे घंटे के भीतर थंडर स्टॉर्म बन गईं। रात करीब 10 बजे तक इसकी रफ्तार 60 किमी प्रति घंटे हो गई।

बेतिया से शुरू होने वाला थंडर स्टॉर्म देर रात मधेपुरा की ओर गतिमान था। विशेषज्ञों ने कहा कि इसका असर तीन से चार घंटे तक रह सकता है। इसके बाद धीरे-धीरे कमजोर होता जाएगा। हालांकि मौसम विभाग ने यह भी बताया है कि तापमान में उतार-चढ़ाव के चलते अभी आंधी-तूफान के हालात आए दिन बनते रहेंगे।

किया गया था अलर्ट

मौसम विभाग ने बताया था कि राज्य के दक्षिण-पूर्व इलाके के 24 जिलों में सोमवार की शाम तक कभी भी चक्रवाती हवाएं पहुंच सकती हैं। गरज के साथ होने वाली बारिश और नुकसान पहुंचा सकती है। इसके बाद राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों के डीएम को सतर्क कर दिया था। तूफान के प्रवेश के बाद मौसम विभाग रात में अलर्ट पर है।

यहां के लिए था अलर्ट

सुपौल, अररिया, भागलपुर, पूर्णिया, किशनगंज, मधेपुरा, खगडिय़ा, कटिहार, सहरसा, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, बांका, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, शेखपुरा, नालंदा, नवादा और गया।

पटना में दिनभर खिली रही धूप

मौसम विज्ञान विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक आरके गिरी ने बताया था कि पटना में सोमवार को बादल छाएंगे व हल्की बारिश होगी। हालांकि, बादल नहीं आए। दिनभर धूप खिली रही।

क्यों बनी ऐसी स्थिति

उत्तर प्रदेश से आने वाली नमी और बंगाल की तरफ से आने वाली हवाओं के मिलन से तूफान की स्थितियां बनीं। दो दिनों पहले तक बिहार के अधिकतर इलाकों में तापमान 42 डिग्री के आसपास पहुंच गया था। इसके चलते हवा का दबाव बढ़ गया था।

पांच डिग्री तक गिरा तापमान

मौसम में बदलाव नार्वेस्टर के कारण है। इसके पहले रविवार को राजधानी पटना के अधिकतम तापमान में लगभग पांच डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। शनिवार को गया देश के सर्वाधिक गर्म शहरों में था। रविवार को गया और आसपास के इलाके का तापमान 40 डिग्री से ऊपर था।

लंबी खिंच सकती है गर्मी

मौसम विभाग के निदेशक एके सेन ने बताया कि इस बार गर्मी का मौसम लंबा हो सकता है, क्योंकि गर्मी की शुरुआत जल्दी हुई है। साथ ही इस बार गर्मी खूब तपाएगी। पुरवइया के कारण बीच-बीच में राहत मिलेगी।

क्या है नार्वेस्टर

तेज हवा और गरज के साथ बारिश की स्थितियों को थंडर स्टॉर्म कहते हैं। थंडर का मतलब तेज हवा से है। नॉर्थ वेस्ट से आने के कारण इसे नार्वेस्टर भी कहा जाता है। अभी मौसम में गर्मी है। बारिश नहीं होने से वातावरण में धूल है। तापमान बढ़कर अचानक कम हुआ है। ऐसी स्थिति में धूल भरी आंधी भी आ सकती है। बूंदाबांदी से लेकर बारिश की आशंका बनी रहेगी।

अगर कभी तूफान में फंस जाएं तो इन बातों का रखें ध्यान
- सामान्य आंधी-तूफान के वक्त घर में रहना ज्यादा बेहतर है।
- आंधी-तूफान के दौरान कच्चे और पुराने मकानों में न रहें।
- बड़े और पुराने पेड़ों की के नीचे न जाएं
- आसपास अगर बिजली के तार हैं तो उससे भी दूरी बनाकर रखें।
- टीन और सीमेंट की चादर वाले घरों को ऐसे तूफान में ज्यादा नुकसान होता है। ऐसे घर वाले दूर चले जाएं।
- खेतों में अगर काम कर रहे हैं तो खुले मैदान में न रहें। बिजली गिरने की भी आशंका बनी रहती है।
- साथ ही यदि आप कहीं जा रहे हैं तो अपनी गाड़ी को साइड में रोककर आंधी-तूफान के गुजर जाने का इंतजार करें।
- कोशिश करें कि किसी मजबूत आधार के पीछे छिप जाएं, जिससे कि आंधी-तूफान के दौरान उडऩे वाली लोहे के टीन शेड या ऐसी ही कोई दूसरी वस्तुओं से आपको कोई हानि न हो।
- आंधी के साथ बारिश और ओले हों तो अपना सिर बचाने का प्रयास करें।

पिछले साल आया था तूफान, मरे थे 32

पश्चिम से उत्तर की ओर चलनेवाली हवा (नार्वेस्टर) एवं बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के क्षेत्र के कारण थंडर स्टॉॅर्म का जन्म होता है। बिहार में स्थानीय कारणों के कारण यह अक्सर भारी तबाही मचा देता है। पिछले वर्ष 22 अप्रैल को आए तूफान में 32 लोगों की जान गई थी और100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

सबसे ज्यादा तबाही पूर्णिया जिले में हुई थी। यहां 26 लोगों की मौत हो गई थी। मधेपुरा में सात लोग मारे गए थे। कटिहार और सहरसा में भी सैकड़ों घर तबाह हो गए थे। कई पेड़ उखड़ गए थे। बिजली के तार टूट गए थे। फसलों की भी भारी तबाही हुई थी। राज्य सरकार को भरपाई करने में महीनों लग गए थे।

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Posted By: Sanjeev Tiwari

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