पटना [प्रभात रंजन]। बॉलीवुड निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा की पहली फिल्म 'दामुल' याद है आपको? तब फिल्‍म ने देश-विदेश में धूम मचा दी थी। इसके साथ ही फिल्‍म के कलाकार भी शोहरत की बुलंदियों पर पहुंच गए थे। लेकिन, उसमें 'बुधवा' का कैरेक्‍टर निभाने वाले कलाकार ओम प्रकाश आजकल पटना की सड़कों पर अखबार बेचकर गुजारा कर रहे हैं।

अखबार से ही उनकी रोजी-रोटी चलती है। लेकिन, कला के प्रति सम्‍मान ऐसा कि वे आज भी खाली समय में नाटकों की तैयारी करते हैं। साथ ही नवोदित कलाकारों को रंगमंच की बारीकियों से अवगत कराते रहते हैं।

बचपन से रहा रंगमंच की ओर रूझान

मूल रूप से छपरा के बैनया बड़का गांव के रहने वाले ओम प्रकाश बताते है कि पिताजी शहर में अखबार बेचने का काम करते थे। घर की माली हालत ठीक नहीं होने के कारण पढ़ाई-लिखाई ढंग से नहीं हो पाई। लेकिन, पढऩे की ललक रही। इसके लिए पिता के साथ सात साल की उम्र से ही अखबार बेचने लगे। किसी तरह स्नातक और फिर एलएलबी की पढ़ाई पूरी की।

साथ में रंगमंच की आेर भी रूझान रहा। इसी क्रम में पटना के रंगकर्मी अनिल कुमार मुखर्जी का सानिध्य मिला। वे कालिदास रंगालय में अभिनय का गुर सिखाते थे। ओम प्रकाश बताते हैं कि बचपन से ही उनके साथ कालिदास रंगालय जाने लगे। वर्ष 1976 से 1979 तक वे अनिल मुखर्जी के सानिध्य में रंगमंच की बरीकियों से अवगत हुए।

फिल्म दामुल में मिला काम करने का मौका

फिल्म निर्देशक प्रकाश झा ने ओम प्रकाश को अभिनय करते देखा था। उन्‍होंने अपनी फिल्‍म 'दामुल' में उन्‍हें मौका दिया। फिल्म की शूटिंग बेतिया के छपवा गांव में की थी। इसमें ओम प्रकाश को बुधवा का किरदार दिया। फिल्म की शूटिंग के दौरान पटना के दीपश्रेष्ठ, हरिशरण, प्यारे मोहन सहाय, गोपाल शरण आदि लोगों ने भी काम किया था। कलाकार ओम प्रकाश बताते है कि फिल्म को बर्लिन में प्रथम पुरस्कार मिला था। फिल्म में अभिनय के बाद दोस्तों ने मेरा नाम ओम कपूर रखा दिया।

आर्थिक तंगी ने रोक दिए कदम

ओम प्रकाश बताते हैं कि दामुल फिल्म का प्रदर्शन 1985 में हुआ था। इसके बाद उन्‍हें अभिनय के कई प्रस्‍ताव मिले। लेकिन, आर्थिक तंगी व पारिवारिक जिम्‍मेदारियों ने रास्‍ते बंद कर दिए। कम उम्र में शादी और फिर चार बच्चों के भरण-पोषण के कारण अभिनेता बनने का सपना कब खत्म हो गया पता ही नहीं चला।

ओम प्रकाश कहते हैं, दामुल के बाद अंदर के कलाकार को जिंदा रखने के लिए लगातार रंगमंच तथा भोजपुरी व मैथिली फिल्मों में छोटे-मोटे किरदार करता रहा। भोजपुरी फिल्मों में प्रेमलीला, हमार घरवाली, दुलरूआ बाबू, जिंदगी महक सिंदूर, कब अएब अंगना हमार आदि फिल्मों के साथ टीवी सीरियल और पटना रेडियो में छोटे-मोटे काम करने के अवसर मिले।

ओम बताते हैं, रंगमंच पर काम करने वाले कई कलाकार जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं, उन्‍हें मुंबई में काम करने का मौका मिला। दबंग फिल्म में सलमान खान के साथ सिपाही चौबे का किरदार निभाने वाले राम सुजान सिंह पटना के ही हैं। वही रीना रानी भी निमकी मुखिया में काम कर रही हैं। वैसे बहुत से कलाकार हुए जो थियेटर के बाद फिल्मों में आ गए। लेकिन, ओम प्रकाश के नसीब में यह नहीं था।

अखबार के साथ गढ़ रहे कलाकार

ओम बताते है कि कोई भी मौसम हो, वे सुबह तीन बजे उठकर अखबार लेने पटना के मौर्या काम्पलेक्स जाते हैं। फिर वहां से अखबार के बंडल साइकिल पर लेकर घर-घर बांटने के बाद सुबह सात बजे तक वापस आ जाते हैं। आगे अपराह्न तीन से पांच बजे तक नाटकों की तैयारी के लिए कलाकारों के साथ अभ्यास करने का सिलसिला चलता है।

ओम अपनी संतानों को भी रंगमंच की बारीकियों से अवगत करा रहे हैं। कहते हैं, फिलहाल बच्‍चे ही उनकी प्राथमिकता हैं। बेटियों की शादी होने के बाद अगर फिल्म इंडस्ट्रीज से बुलावा आएगा तो जाने का प्रयास अवश्य करेंगे।

Posted By: Amit Alok