पटना। हर भारतीय के लिए 26 जनवरी का दिन काफी महत्वपूर्ण होता है। 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ था। इस दिन तिरंगा फहराकर हम अपने संविधान की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं। बागबानों की स्मृतियों में गणतंत्र दिवस की कई मीठी यादें हैं। दैनिक जागरण बागबान क्लब की ओर से मंगलवार को आयोजित परिचर्चा में बुजुर्गो ने ऐसी ही यादों को साझा किया।

.................

गणतंत्र दिवस आते ही खुशियों का माहौल बना रहता था। यह दिवस एक उत्सव की तरह होता था। स्कूलों में झंडा फहराने के साथ मिठाई बांटी जाती थी। इस दिन नये कपड़ों को पहन कर इसका आनंद उठाते थे।

राम सूर्य पांडेय, नेहरू नगर

वर्ष 1962 में पहली बार गणतंत्र दिवस को नजदीक से देखने का अनुभव मिला। स्कूल के दिनों में क्रांतिकारियों के जयकारे लगाने के साथ नये कपड़े पहन कर झंडोत्तोलन करने का आनंद मिलता था।

बीके सिन्हा, शास्त्रीनगर

गणतंत्र दिवस पर 1972 में काफी ठंड पड़ी थी। इसके बावजूद छात्रों में दिवस को लेकर गजब का उत्साह रहता था। बारिश के बावजूद हम सभी स्कूलों में नये ड्रेस पहन कर उत्सव मनाए थे।

पुष्पा बाला, बेली रोड

गणतंत्र दिवस के दिन सुबह से ही तैयार होकर स्कूल जाने की उत्सुकता बनी रहती थी। वर्ष 1964 में दिवस के मौके पर शाम में स्कूल परिसर में सांस्कृतिक प्रस्तुति होती थी, जिसमें स्कूल के छात्र बढ़-चढ़कर भाग लेते थे।

प्रवीण कुमार, खाजपुरा

उन दिनों रेलवे स्कूल में गणतंत्र दिवस को लेकर छात्रों में उत्सुकता होती थी। शिक्षक दिवस के मौके पर पटना जंक्शन परिसर के बाहर छात्रों को लेकर पहुंचते थे। स्टेशन पर स्टेशन मास्टर झंडा फहरा कर छात्रों को मिठाई देते थे।

ईश्वर चंद्र शर्मा, आशियाना नगर

वर्ष 1963 के दिनों में प्राइमरी स्कूल का छात्र था। दिवस के कुछ दिन पहले छात्रों की टोली गांवों में प्रभातफेरी निकाला करते थे। वही उन दिनों गांधी टोपी का बहुत चलन था। इसे पहन कर छात्र जोर-जोर से क्रांतिकारियों के नारे लगाते थे।

कृष्ण प्रसाद सिंह, पटेल नगर

गणतंत्र दिवस के कुछ दिन पहले हर घर से गांधी, नेहरू जिंदाबाद की गूंज सुनाई पड़ती थी। छात्रों में पर्व को लेकर काफी उमंग होती थी। इसको लेकर स्कूल में वाद-विवाद प्रतियोगिता होती थी। साथ ही उन दिनों राष्ट्रीय गीत गाने को लेकर होड़ लगी रहती थी।

रामशरण सिंह, बोरिग रोड

गणतंत्र दिवस के मौके पर डुमरांव के स्कूल परिसर में तिरंगा फहराने के साथ जलेबी प्रतियोगिता होती थी। इसमें छात्र-छात्राएं बढ़-चढ़ कर भाग लेती थी। वही शिक्षक बच्चों को दिवस की महत्ता के बारे में जानकारी देते थे।

रेणु गुप्ता, मौर्या पथ, खाजपुरा

गणतंत्र दिवस के कुछ दिन पहले से ही गांव में एक अलग वातावरण हुआ करता था। छात्र अपने घरों में झंडा बनाने के साथ कपड़ों को लेकर काफी सजग होते थे। वही युवा सुबह में प्रभातफेरी निकालकर लोगों को जागरूक करते थे।

गौतम देव सिंह, इंद्रपुरी

गांव में स्कूल के शिक्षक दिवस के बारे में बताने के साथ अपने संविधान की रक्षा करने की बात छात्रों को बताते थे। शिक्षक झंडा फहराने के साथ बच्चों को खाने के लिए जलेबी दिया करते थे। इसको लेकर काफी उत्सुकता होती थी।

सत्येंद्र नारायण यादव, पटेल नगर

गणतंत्र दिवस के मौके पर पूरा शहर दुल्हन की तरह सजता था। लोग अपने घरों के आगे तिरंगा झंडा लगाए रहते थे। उस दिन बड़ों के साथ बच्चे भी नये कपड़े पहन कर झंडा फहराने को जाते थे। गुड़ की जलेबी उन दिनों काफी लोकप्रिय हुआ करती थी।

सत्यदेव जायसवाल, कृष्णापुरी

उन दिनों राष्ट्रीय पर्व का महत्व था। पर्व को लेकर नेताओं से लेकर अधिकारी और लोगों में उत्सुकता रहती थी। बड़े नेताओं के जयकारे लगते थे। आजादी के शुरुआती दौर में लोगों में एक जज्बा होता था, लेकिन अब औपचारिकता रह गई है।

श्यामजी सहाय, अध्यक्ष, बागबान क्लब

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस