पटना [अरविंद शर्मा]। वाल्मीकि नगर संसदीय क्षेत्र की तीन खासियत हैं। महर्षि वाल्मीकि का आश्रय, व्याघ्र अभयारण्य और अपनों पर मेहरबानी में इस क्षेत्र का कोई सानी नहीं है। माना जाता है कि अयोध्या से निर्वासन के बाद मां सीता ने लव-कुश को इसी स्थान पर जन्म दिया था और वर्षों महर्षि की पनाह पाई थी। सियासत में भी सिद्ध हो चुका है कि एक बार इस क्षेत्र ने जिसे आश्रय दे दिया, उसे लंबे समय तक अपनाए रखता है। अपनों पर मेहरबानी करते रहे वाल्मीकिनगर में इस बार दोस्‍ती की परीक्षा तय है।

भोला राउत और महेंद्र बैठा नजीर हो सकते हैं, जिन्होंने 12 बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। आजादी से अबतक हुए 16 संसदीय चुनावों में तीन चौथाई समय उक्त दोनों नेताओं ने ही इस क्षेत्र की सियासत की है। वह भी लगातार। सिर्फ चार बार ही किसी और को मौका मिला।

बहरहाल, दोनों की सियासी पारी अब समाप्त हो चुकी है। नए की इंट्री भी हो चुकी है। जदयू के वैद्यनाथ प्रसाद महतो और भाजपा के सतीश चंद्र दुबे एक-एक बार सांसद चुने जा चुके हैं। सतीश अभी भाजपा की ओर से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। मोदी लहर में उन्होंने कांग्रेस के पूर्णमासी राम को एक लाख से अधिक मतों से हराया था। इसके पहले 1989 से इस सीट पर जदयू का कब्जा है। महेंद्र बैठा ने दो बार जनता दल से और तीन-तीन बार समता पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की थी। महेंद्र के बाद कैलाश बैठा भी एक बार जदयू के लिए इसे जीत चुके हैं।

2008 में परिसीमन में सीट के सामान्य होते ही क्षेत्र का नक्शा, नाम और समीकरण बदल गए। पहले इसे बगहा संसदीय क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। अब वाल्मीकिनगर है। 2009 में जदयू और 2014 में भाजपा को यहां से मौका मिल चुका है। परिसीमन के बाद राजद-कांग्रेस गठबंधन को मौका नहीं मिला है। पिछले चुनाव में कांग्रेस से टिकट लेकर पूर्णमासी राम ने कोशिश जरूर की थी, लेकिन कामयाब नहीं हो सके थे। पूर्णमासी फिर दावेदार हैं। प्रतिपक्षी खेमे की ओर से सामाजिक समीकरण राजद के अनुकूल होने के बावजूद कांग्रेस ने यहां से दावेदारी कर रखी है। ऐसे में मैदान में उतरने से पहले दोनों गठबंधनों को दावेदारी और प्रत्याशी चयन के मुद्दे पर ही परीक्षा देनी पड़ सकती है। भाजपा के साथ सिटिंग का समीकरण है। जदयू के पास सात-सात बार की जीत का संबल। मुस्लिम-यादव (माय) समीकरण के बावजूद राजद का यहां कभी खाता नहीं खुला है। 2009 के चुनाव में राजद के टिकट पर उतरे रघुनाथ झा की जमानत जब्त हो चुकी है, जिसे आधार पर बनाकर कांग्रेस अपना दावा जता रही है। 1984 के बाद खाता तो कांग्र्रेस का भी नहीं खुला है, लेकिन पिछले चुनाव में पूर्णमासी की बदौलत भाजपा को कड़ी टक्कर देने के कारण कांग्रेस ने राजद पर दबाव बना रखा है।

अतीत की हार-जीत

2014 में 14 प्रत्याशी मैदान में थे। मोदी लहर में भाजपा के सतीश चंद्र दुबे ने कांग्रेस के पूर्णमासी राम को एक लाख से ज्यादा वोटों से हराया था। 2009 में जदयू से सांसद बने वैद्यनाथ प्रसाद महतो को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था। निर्दलीय दिलीप वर्मा को 58817 वोट मिले थे।

1952 से 1971 तक लगातार इस सीट पर कांग्रेस के लिए भोला राउत जीतते आए। राउत की रफ्तार को वर्ष 1977 में जनता पार्टी के जगन्नाथ प्रसाद स्वतंत्र ने सिर्फ एक बार के लिए ब्रेक किया। 1980 के चुनाव में भोला की किस्मत फिर चमकी। वह 1984 में भी जीते। इस सिलसिले को 1989 में जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़कर महेंद्र बैठा ने तोड़ा। 1999 तक उन्होंने भी कुल पांच चुनाव जीते। दो बार जनता दल और तीन बार समता पार्टी से सांसद चुने गए।

2004 में कैलाश बैठा का पदार्पण हुआ। उन्होंने यह सीट जदयू की झोली में डाल दी। निर्दलीय फखरूद्दीन ने टक्कर देने की कोशिश जरूरी की, किंतु फासला बड़ा था। बसपा के मनन मिश्रा और राजद के रघुनाथ झा को तीसरे और चौथे नंबर से संतोष करना पड़ा। इसके बाद यह सीट सामान्य हो गई। आजादी के पहले विभूति मिश्र, कमलनाथ तिवारी भी यहां से निर्वाचित हो चुके थे।

मुद्दे पर महाभारत

नारायणी (गंडक) नदी के तट पर बसे इस क्षेत्र का सबसे बड़ा मुद्दा बाढ़ से सुरक्षा और गन्ना बकाये का भुगतान है। सात चीनी मिलें हैं। किसानों का करोड़ों बकाया है। अभी तक मार्च का भुगतान भी नहीं मिला है। सब्सिडी के पैसे भी बाकी हैं। जंगलों में थारू आदिवासियों की भी बड़ी संख्या है। उन्हें जंगल और जमीन का अधिकार चाहिए। नेपाल से आने वाली नारायणी नदी हर साल कहर बरपाती है। पंडई, बलोर, सिकहरना आदि भी जानलेवा हो जाती है। बाढ़ राहत राशि में भी भेदभाव किया जाता है।

2014 के महारथी

सतीश चंद्र: भाजपा: 364011

पूर्णमासी राम : कांग्रेस: 246218

वैद्यनाथ महतो: जदयू: 81612

दिलीप वर्मा: निर्दलीय: 58817

अमर सहनी: बीकेडी: 35888

कुल वोटर

14.56 लाख

विधानसभा क्षेत्र

वाल्मीकि नगर, रामनगर (सु), नरकटियागंज, बगहा, लौरिया और सिकटा

Posted By: Amit Alok

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