पटना [जेएनएन]। मैट्रिक का रिजल्ट आ गया है। अब तैयारी, आगे की पढ़ाई की है। इंटर में किस विषय का चयन किया जाए? किस कॉलेज में एडमिशन लिया जाए? ये उलझन हर छात्र के साथ होती है। आइए जानते हैं, दसवीं के बाद कॅरियर के 10 विकल्प।

रेलवे : भारतीय रेल दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है। रेलवे के तकनीकी या गैर तकनीकी पदों के लिए न्यूनतम योग्यता मैट्रिक है। रेलवे भत्र्ती बोर्ड अलग-अलग पद के लिए परीक्षा आयोजित कराता है। मैट्रिक के बाद आइटीआइ, पॉलीटेक्निक आदि की डिग्री प्राप्त कर लेते हैं तो रेलवे में नौकरी आसान हो जाती है। इसके साथ क्लर्क ग्रेड की नौकरी के लिए इंटर और स्नातक पर भी वैकेंसी आते हैं।

डिफेंस सेक्टर: भारतीय थल सेना, नेवी, एयरफोर्स सहित बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआइएसएफ, एसएसबी, आइटीबीपी समेत कई अद्र्धसैनिक बलों में 10वीं उत्तीर्ण युवाओं को अवसर मिलते हैं। थल सेना में जवान के लिए केवल मैट्रिक होना जरूरी है। शारीरिक मापदंड पर दुरुस्त हैं तो नौकरी पक्की है। कुक, मशालची, बार्बर, गार्डेनर आदि के पद की योग्यता भी मैट्रिक ही है। इंटर कर लेने के बाद विकल्प का दायरा बढ़ जाता है। 

स्टोनोग्राफर : मैट्रिक परीक्षा के बाद टाइपिंग एवं शॉर्टहैंड सीख लेते हैं तो इंटर बाद स्टोनोग्राफर की नौकरी आपका इंतजार कर रही है। स्टेनोग्राफर के लिए शॉर्टहैंड की जानकारी अनिवार्य है। शॉर्टहैंड कोर्स के जानकार की दरकार निजी और सरकारी दोनों ही तरह के संस्थानों में है। अर्धसैनिक बल में सीधे जमादार और सब इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति होती है। इसका एक साल का सर्टिफिकेट कोर्स आइटीआइ में होता है। तीन वर्षों का डिप्लोमा पाठ्यक्रम पॉलीटेक्निक संस्थानों से होती है।

आइटीआइ : वर्तमान दौर तकनीक का है। जिनके पास तकनीक की अच्छी जानकारी है वह नियोक्ता बन रहे हैं। इसके लिए वर्तमान परिवेश में आइटीआइ सबसे बेहतर विकल्प है। यह पूरी तरह से जॉब ओरिएंटेड कोर्स है। निजी के साथ सरकारी सेवा में भी यह कई विकल्प उपलब्ध कराता है। आइटीआइ से डिप्लोमा के बाद बीई या बीटेक इंजीनियरिंग डिग्री भी प्राप्त कर सकते हैं। आइटीआइ कोर्स में इलेक्ट्रिशियन, फिटर, मेकेनिकल, कारपेंटर, वेल्डर, सिलाई, प्रोडक्शनन, लैब असिस्टेंट, मशीनिस्ट जैसे विकल्प स्वरोजगार के द्वार खोलते हैं। शॉर्ट टर्म कोर्स बहुत ही उपयोगी है। रेलवे में ड्राइवर, तकनीशियन या अप्रेंटिस के रूप में आइटीआइ उत्तीर्ण अभ्यर्थी ही चयनित किए जाते हैं। 10वीं पास के बाद एक औ दो साल का कोर्स आइटीआइ से कर सकते हैं। जिस विषय में रुचि है, उससे मिलता-जुलता ट्रेड का चयन करें।

पॉलीटेक्निक डिप्लोमा : 10वीं के बाद ही इंजीनियर बनने की सपना पॉलीटेक्निक में नामांकन लेकर पूरा कर सकते हैं। सरकारी और निजी पॉलीटेक्निक इंस्टीट्यूट सूबे में भरे पड़े हैं। इससे जुड़ें सभी टेक्निकल कोर्स इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआइसीटीई) से मान्य होता है। 10वीं में 50 फीसद अंक प्राप्त करने वाले छात्र पॉलीटेक्निक इंस्टिट्यूट की प्रवेश परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। सूबे में प्रवेश परीक्षा बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (बीसीईसीई) आयोजित करता है।

इसमें शामिल होने के लिए मार्च-अप्रैल में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन होता है। मेकेनिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, पैकेजिंग टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, एप्लाइड इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन, कंप्यूटर इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, माइनिंग इंजीनियरिंग, मेटोलॉर्जिकल इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल टेक्नोलॉजल, केमिकल इंजीनियरिंग, केमिकल इंजीनियरिंग इन प्लांट एंड पॉलिमर्स, पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग, एयरक्राफ्ट मेटेनेंस इंजीनियरिंग, ऑफिस मैनेजमेंट एंड कंप्यूटर एप्लीकेशन, कंप्यूटर साइंस जैसे कोर्सेज हैं।

पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट सर्टिफिकेट कोर्स भी ऑफर करते हैं पॉलिटेक्निक संस्थानों से आप फैशन डिजाइन, टेक्सटाइल डिजाइन, इंजीनियरिंग, मास कम्युनिकेशन, इंटीरियर डिजाइन, होटल मैनेजमेंट कोर्स भी कर सकते हैं। दिल्ली पॉलिटेक्निक में एडमिशन लेने के लिए सेंट्रल एडमिशन टेस्ट (सीईटी) पास करना जरूरी होता है। बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन इस टेस्ट की आयोजन करता है।

एनआइओएस : नेशनल स्कूल ऑफ ओपेन स्कूलिंग (एनआइओएस) घर बैठे पत्राचार के माध्यम से 100 से अधिक कोर्स में पढ़ाई करने का अवसर प्रदान करता है। मानव संसाधन विकास विभाग, भारत सरकार द्वारा संचालित होने के कारण इसकी मान्यता सभी राज्यों में है। घर बैठे एकेडमिक वोकेशनल क्षमताओं को धार दे सकते हैं। एनआइओएस सेकेंड्री, सीनियर सेकेंड्री के साथ कम्युनिटी ओरिएंटेड, वोकेशनल, लाइफ इनरिचमेंट आदि प्रोग्राम के लिए वेतर विकल्प हो सकता है।

कम्प्यूटर : आज कम्प्यूटर के मौलिक ज्ञान के बगैर कॅरियर को उड़ान देना संभव नहीं है। परंपरागत कोर्स के साथ-साथ कम्प्यूटर के सर्टिफिकेट कोर्स भी कर सकते हैं। इसमें बेहतर कॅरियर बनाने के लिए डिप्लोमा और डिग्री के साथ-साथ विशेषज्ञता प्राप्त कर लेने पर खुद को नियोक्ता बना सकते हैं। 10वीं के बाद कोर्स ऑन कंप्यूटर कांसेप्ट किया जा सकता है। यह कुल 80 घंटे का कोर्स है। इसमें व्यक्तिगत व व्यावहारिक पत्र तैयार करना, मेल भेजना, डाटा बेस तैयार करना, प्रेजेंटेशन तैयार करना आदि शामिल है।

इग्नू : इग्नू से बीपीपी यानी बैचलर ऑफ प्रीपरेटरी प्रोग्राम्स का कोर्स छह माह में कर सीधे बीए या बीकॉम कर सकते हैं। इसके लिए न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष होनी चाहिए। इसके अलावा छह माह का सर्टिफिकेट इन गाइडेंस कोर्स भी कर सकते हैं। इस कोर्स को करने के बाद शिक्षण का माहौल तैयार करने की जानकारी मिल जाती है। मैट्रिक में सफलता नहीं मिलने और उम्र 18 वर्ष से अधिक होने पर यह छात्रों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।

एनओयू : नालंदा खुला विश्वविद्यालय 10वीं पास विद्यार्थियों के लिए कई सर्टिफिकेट और रेगुलर कोर्स का विकल्प देता है। 10वीं में कम अंक या नियमित कक्षा करने में असमर्थ हैं तो एनओयू से घर बैठे मनपंसद कोर्स कम पैसे में कर सकते हैं। सूबे के सभी अनुमंडलों में कमोबेश एनओयू के स्टडी सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।

व्यावसायिक कोर्स : 10वीं पास विद्यार्थियों को जल्द रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई व्यावसायिक कोर्स संचालित रेगुलर और ओपेन माध्यम से कराए जाते हैं। छह माह के कंप्यूटर हार्डवेयर, नेटवर्किंग, कारपेंटर, प्लंबर, एसी फिटिंग, रेडियो, टेलीविजन, मोबाइल, फ्रीज, कुलर रिपेयरिंग, ब्यूटिशियन, हेल्पर, टेक्नीशियन, हेयर डिजाइनर, टेलरिंग आदि में सर्टिफिकेट कोर्स कर जल्द रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। 

Posted By: Ravi Ranjan

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