पटना [जेएनएन]। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने एक वेब पोर्टल पर छपी खबर को शेयर करते हुए, जिसमें सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा द्वारा सीवीसी को सौंपी गयी सनसनीखेज़ जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सुशील मोेदी पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने आज लगातार कई ट्वीट किए और उसमें लिखा कि....

हम लगातार कह रहे थे कि नीतीश कुमार भाजपा के साथ मिलकर घिनौना षड्यंत्र रच रहे है। अब उनकी नंगई उजागर हो गई है। हमसे पब्लिक डोमेन में स्पष्टीकरण मांग रहे थे कि सीबीआइ ने केस किया है अब तो सीबीआइ निदेशक ने ही सच बोल दिया है अब कुटिल कुमार क्या कहेंगे ? है शर्म क्या श्रीमान अनैतिक कुमार?

अपने अगले ट्वीट में तेजस्वी ने लिखा कि-नीतीश कुमार में अगर नैतिकता, अंतरात्मा और शर्म बची है तो जवाब दें। बेशर्मी से सियासत मत किजीए। जनता की अदालत में आमने-सामने लड़िये। आप विरोधियों को फँसाते है और गोद में बैठने वाले अपराधियों को बचाते है। चाचा, अब जनता जनार्दन और भगवान आपके कर्मों या कुकर्मों का हिसाब करेंगे।

इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने परिवार के चरित्र हनन का आरोप लगाते हुए लिखा कि-हम शुरू दिन से कह रहे थे कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह, नीतीश कुमार और सुशील मोदी राजनीतिक प्रतिशोध के चलते हम पर झूठे केस थोप चरित्रहनन कर रहे है क्योंकि उन्हें सबसे बड़ा ख़तरा सबसे मुखर धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्यायवादी दल से है। हम डरने वालों में से नहीं है और ना रहेंगे।

सीबीआई की लीगल विंग के बाद अब डायरेक्टर आलोक वर्मा ने सीवीसी को दी अपनी रिपोर्ट में हमारे परिवार पर पीएमओ द्वारा किए जा रहे ज़ुल्मों पर सबूत सहित तथ्य पेश किए है। क्या अब ऐसे ही लोकतंत्र और सीबीआइ ईडी और आइटी जैसी संवैधानिक स्वायत्त संस्थाओं का मज़ाक बनाया जाएगा?

सीबीआइ  निदेशक के अनुसार बिहार में हारे हुए अफ़वाह मियां सुशील मोदी किस हैसियत से पीएमओ अधिकारी से मिलकर सीबीआई से विपक्षी नेता के केस का फ़ॉलोअप कर रहे थे? क्या अब ऐरा गैरा नत्थू खैरा कोई भी भाजपाई सीबीआइ को डिक्टेट करेगा? यह एक ग़लत परिपाटी स्थापित की गई है। इसके अनेकों दुष्प्रभाव होंगे।

दरअसल इस वेब पोर्टल पर छपे आलेख में सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा के सीवीसी के समक्ष रखे पक्ष के हवाले से कहा गया है कि किस तरह से सीबीआई में दूसरे नंबर के अधिकारी राकेश अस्थाना बिहार के उपमुख्यमंत्री के संपर्क में थे। इसमें ये भी कहा गया है कि पीएमओ के एक अधिकारी के निर्देश पर आईआरसीटीसी घोटाले की जांच को निर्देशित किया जा रहा था।

आलोक वर्मा के हवाले से कहा गया है कि आईआरसीटीसी के डायरेक्टर राकेश सक्सेना से मिलीभगत और उनके द्वारा केस को कमजोर किए जाने के आरोप भी गलत हैं।

 

Posted By: Kajal Kumari

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