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बिहार के हजारों शिक्षकों की नौकरी पर संकट! तेजस्वी ने CM सम्राट से की सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग

Published: Sun, 18 Oct 2026 10:11 AM (IST)

तेजस्वी यादव ने बिहार के अप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखा है। उन्होंने ...और पढ़ें

तेजस्‍वी यादव ने श‍िक्षकों के मुद्दे पर सीएम सम्राट चौधरी को ल‍िखा पत्र। फाइल

तेजस्‍वी यादव ने श‍िक्षकों के मुद्दे पर सीएम सम्राट चौधरी को ल‍िखा पत्र। फाइल

HighLights

  1. तेजस्वी ने अप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर पत्र लिखा।

  2. सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग की।

  3. उर्दू-बांग्ला विशेष शिक्षकों को भी राहत देने की अपील।

डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार में 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा पर मंडरा रहे संकट के बीच नेता प्रतिपक्ष और राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखा है।

उन्होंने राज्य सरकार से सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) दाखिल करने और प्रभावित शिक्षकों की सेवा सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी पैरवी करने की मांग की है।

तेजस्वी ने पत्र में कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और प्राथमिक शिक्षा निदेशक के पत्र के बाद नियोजित शिक्षकों सहित 31 मार्च 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है।

उर्दू-बांग्ला विशेष शिक्षकों को राहत देने की मांग

उन्‍होंने ल‍िखा है क‍ि वर्ष 2015 में नियुक्त उर्दू और बांग्ला विशेष शिक्षकों के बीच भी भय और असमंजस की स्थिति है। तेजस्वी यादव ने कहा है कि उर्दू और बांग्ला विशेष शिक्षकों का नियोजन किसी नई प्रक्रिया के तहत नहीं हुआ था। 

बल्कि यह वर्ष 2014 में शुरू हुई नियोजन प्रक्रिया की निरंतरता में न्यायिक आदेशों और विभागीय निर्देशों के अनुपालन में किया गया था।

ऐसे में केवल नियुक्ति की तारीख 31 मार्च 2015 के बाद होने के आधार पर इन शिक्षकों को सेवा समाप्ति के दायरे में रखना उचित नहीं होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित शिक्षकों में कई प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, सक्षमता परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं और वर्तमान में विशिष्ट शिक्षक, प्रधान शिक्षक अथवा विद्यालय अध्यापक के रूप में काम कर रहे हैं। ऐसे शिक्षकों की वर्तमान योग्यता और नियुक्ति को ध्यान में रखते हुए उन्हें संरक्षण दिया जाना चाहिए।

अभिलेखों की कमी के लिए शिक्षकों को दंडित करना अनुचित

राजद नेता ने पत्र में कहा कि वर्षों से सरकारी विद्यालयों में पढ़ा रहे हजारों शिक्षकों के नियोजन अभिलेख या मेधा सूची में कमी अथवा दस्तावेजों का अभाव होने पर इसकी जिम्मेदारी संबंधित नियोजन इकाइयों की होनी चाहिए।

प्रशासनिक त्रुटियों की सजा शिक्षकों और उनके परिवारों को देना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने नियोजन अभिलेखों के गायब होने या उनमें गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की है।

सेवा समाप्ति और वेतन रोकने पर रोक लगाने की मांग

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार के सामने छह मांगें रखी हैं। इनमें सर्वोच्च न्यायालय में अविलंब पुनर्विचार याचिका दाखिल करना शामिल है।

इसके अलावा वर्ष 2014 की नियोजन प्रक्रिया के तहत नियुक्त उर्दू और बांग्ला विशेष शिक्षकों को सेवा समाप्ति की कार्रवाई से अलग रखना तथा बाद में प्रशिक्षण, सक्षमता परीक्षा या बीपीएससी के माध्यम से नियुक्त शिक्षकों को संरक्षण देना शामिल है।

उन्होंने यह भी मांग की है कि पुनर्विचार याचिका पर निर्णय होने तक शिक्षकों का वेतन रोकने, सेवा समाप्त करने और बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं।

आवश्यकता पड़ने पर शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए नियमावली में संशोधन या अन्य वैधानिक उपाय करने का भी आग्रह किया गया है।

तेजस्वी ने कहा कि हजारों शिक्षक परिवारों का भविष्य अनिश्चितता में है। सरकार को मानवीय, न्यायिक और प्रशासनिक पहलुओं पर विचार करते हुए तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि किसी शिक्षक के साथ अन्याय न हो।